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राज्य विश्वविद्यालय को मिलेगा राजा महेंद्र प्रताप सिंह का नाम:पीएम मोदी कल पहुंचेंगे अलीगढ़, रखेंगे विश्वविद्यालय की नींव, राजा महेंद्र प्रताप सिंह के वंशज को भी भेजा गया है निमंत्रण

अलीगढ़12 दिन पहले
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कल पीएम रखेंगे राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर नींव। - Dainik Bhaskar
कल पीएम रखेंगे राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर नींव।

हाथरस के राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर मंगलवार यानि 14 सितंबर को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ में उनके नाम पर राज्य विश्वविद्यालय की नींव रखने आ रहे हैं। इसको लेकर सीएम योगी ने पहले घोषणा की थी। घोषणा के बाद यूपी सरकार और केंद्र सरकार अलीगढ़ में राज्य विश्व विद्यालय स्थापित कर रहे हैं। जिसको लेकर राजा महेंद्र प्रताप सिंह के वंशज राजा चरण प्रताप सिंह को भी इस कार्यक्रम का विशेष निमंत्रण मिला है। जिसमें राजा चरण प्रताप सिंह शिरकत करेंगे। चरण प्रताप सिंह ने कहा है कि यह हाथरस और देश के लिए गौरव की बात है कि देश के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले राजा साहब के नाम पर सरकार एक राज्य विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का महल।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह का महल।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह का इतिहास

हाथरस राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का नाम यूं ही इतिहास के पन्नों में नहीं है। उन्होंने 31 वर्ष तक विभिन्न देशों में तमाम यातनाएं सहकर देश की आजादी की अलख जगाई। तमाम राष्ट्रध्यक्षों से उन्हें ऐसा समर्थन मिला कि लोग उनके कामों को आज भी याद करते हैं। एक दिसम्बर 1886 को मुरसान के नरेश बहादुर घनश्याम सिंह के यहां राजा महेन्द्र प्रताप का जन्म हुआ था। बाद में उन्हें हाथरस नरेश राजा हरिनारायण सिंह ने गोद ले लिया। पिता के देहांत के बाद 20 वर्ष की उम्र में राजा साहब की ताजपोशी हाथरस रियासत के राजा के रुप में हुई। अंग्रेजी निजाम ने उन्हें राजा बहादुर की उपाधि नहीं दी, लेकिन उनके कुशल नेतृत्व की वजह से जनता ने उन्हें शुरू से ही राजा साहब कहना शुरू कर दिया था। विदेशें में उन्होने 31 वर्ष सात माह तक आजादी का बिगुल बजाया। देश और समाज की सेवा करते हुए वर्ष 1979 में पंचतत्व में विलीन हो गए।

केंद्र सरकार ने चलाई थी डाक टिकट

वर्ष 1979 में केंद्र सरकार ने राजा साहब नाम से स्पेशल डाकटिकट जारी किया था। यह स्पेशल टिकट संग्रहकर्ताओं के पास आज भी सुरक्षित है। आजाद हिंद फौज की स्थापना में राजा साहब का नाम प्रथम पंक्ति में था। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, जैसे देशभक्ति और क्रांतिकारियों ने कुर्बानियां दी, तो राजा साहब ने जिंदगी भर यातनाएं सहकर देश की खातिर संघर्ष को चुना था। वे चाहते तो अंग्रेजों के प्रस्ताव को चुनकर अपनी जिदंगी को बेहतर बना सकते थे, लेकिन उन्होने अंग्रेजी प्रस्ताव को ठुकरा कर आजादी की जंग चुनी।

राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षा के क्षेत्र में किए कई कार्य

राजा महेंद्र प्रताप ने 1909 में वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की, जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केंद्र था। मदनमोहन मालवीय इसके उद्धाटन समारोह में उपस्थित रहे। राजा महेंद्र प्रताप सिंह का वृंदावन में ही 80 एकड़ में उद्यान था। 1911 में आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश को दान में दे दिया। जिसमें आर्य समाज गुरुकुल है और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी है। प्रेम महाविद्यालय ही नहीं बल्कि राजा महेन्द्र प्रताप ने साल 1916 में बीएचयू के लिए अपनी जमीन दान में दी। इसके बाद साल 1929 में राजा महेन्द्र प्रताप ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए अपनी जमीन दी।

खंडहर हालात में राजा महेंद्र प्रताप का किला

हाथरस के मुरसान में राजा महेंद्र प्रताप सिंह का किला खंडन हालत में है। इस ओर ना तो कभी किसी सरकार ने ध्यान दिया और ना ही यहां के जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया। अब जब केंद्र व यूपी सरकार राजा साहब के नाम पर एक विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है, तो राजा साहब के इस कीले को भी सुंदर बनाने की मांग स्थानीय लोग कर रहे हैं।

दैनिक भास्कर की खबर के बाद राजा साहब की मूर्ति को कचरे के ढेर से मिली थी आजादी

अभी कुछ दिन पहले हाथरस के मुरसान में राजा महेंद्र प्रताप सिंह की एक पार्क में कूड़े के कचड़े में राजा साहब की मूर्ति पड़ी हुई थी। इस खबर को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से दिखाया था। जिसके बाद स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और तत्काल खबर का संज्ञान लेकर उसने पार्क में साफ सफाई कराई। तब जाकर राज साहब की मूर्ति को कचरे के ढेर से आजादी मिली थी।

सांसद ने उठाई थी भारत रत्न देने की मांग।
सांसद ने उठाई थी भारत रत्न देने की मांग।

सांसद ने लोकसभा में उठाई थी राजा साहब के नाम पर रेलवे स्टेशन की मांग

हाथरस के पूर्व सांसद राजेश दिवाकर ने अपने कार्यालय में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को भारत रत्न देने व उनके नाम पर पर मुरसान रेलवे स्टेशन का नाम रखने की मांग लोकसभा में उठाई थी।

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