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पीटर पीर प्रताप सिंह कहलाना पसंद करते थे... राजा महेंद्र:​​​​​​​अलीगढ़ यूनिवर्सिटी ने सहेजकर रखा जाट राजा महेंद्र का खत, 45 साल पहले देहरादून चर्च के पादरी के निधन पर उर्दू में लिखा था

अलीगढ़10 दिन पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अलीगढ़ में जाट राजा महेंद्र प्रताप राज्य विश्वविद्यालय का शिलान्यास करेंगे। योगी सरकार ने साल 2019 में अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर स्टेट लेवल का विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। इस जिले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) जैसी बड़ी यूनिवर्सिटी पहले से है। इस बीच लोग इस नई यूनिवर्सिटी को AMU बनाम एक हिंदू राजा की यूनिवर्सिटी से जोड़ रहे हैं। लेकिन राजा महेंद्र खुद की नजरों में सभी धर्म बराबर थे। वे खुद को पीटर पीर प्रताप सिंह कहलाना पसंद करते थे। उनके नाम में ईसाई, मुस्लिम और हिंदू तीनों का संगम दिखता था।

दैनिक भास्कर ने अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में म्यूजिक क्लब के प्रोफेसर जॉनी फॉस्टर से बात की। उन्होंने राजा महेंद्र सिंह के साथ बिताए पलों का जिक्र किया। साथ ही 45 साल पहले उनके पिता को लिखा गए खत का इतिहास भी बताया।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करेंगे।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूनिवर्सिटी का शिलान्यास करेंगे।

राजा ने उर्दू में लिखा था पत्र

बात 1976 की है। प्रोफेसर जॉनी फॉस्टर के पिता फादर जॉन फास्टर देहरादून के चर्च में पादरी थे। उनकी मुलाकात देहरादून में ही राजा महेंद्र प्रताप सिंह से हुई थी। उन्होंने बताया कि राजा महेंद्र प्रताप के हाथों से लिखा गया खत आज भी सुरक्षित है। यह खत राजा महेंद्र ने उनके पिता के निधन पर लिखा था। जाट राजा कहे जाने वाले राजा महेंद्र प्रताप ने यह पत्र उर्दू में लिखा था। इस पत्र में उन्होंने अपने मित्र की पत्नी व प्रो. जॉनी फॉस्टर की मां को शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि “अजीज बेगम, फॉस्टर साहिबा। दुआ, निहायत अफसोस हुआ कि मेरे अजीज दोस्त फॉस्टर साहब इस दुनिया में नहीं रहे। खालिक उनकी रूह को राहत बख्शे। बहरकैफ हमको यही समझाना चाहिए, जिसमें उसकी रजा है, उसी में हमारी खुशी है। - खैर ख्वाहा ए आलम”।

यह खत आज भी एएमयू के मूसा डाकरी म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है।
यह खत आज भी एएमयू के मूसा डाकरी म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है।

कोई नाम पूछे तो कहते थे 'पीटर पीर प्रताप सिंह'
प्रो. जॉनी फॉस्टर ने बताया कि राजा महेंद्र प्रताप का स्वभाव काफी मिलनसार और हसमुख किस्म का था। वह हमेशा विश्व भाईचारा, आपसी प्रेम और सद्भाव का संदेश लोगों को दिया करते थे। जब वह उनके पिता के साथ होते थे और कोई शख्स उनका नाम पूछता था तो वह उसे अपना नाम 'पीटर पीर प्रताप सिंह' बताते थे, जिसका मूल भाव मेल मिलाप और भाईचारा होता था।

1977 में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि बनाया गया था।
1977 में राजा महेंद्र प्रताप सिंह को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी समारोह में मुख्य अतिथि बनाया गया था।

अलीगढ़ के हाथरस में हुआ था जन्म
राजा महेंद्र प्रताप का जन्म 1 दिसंबर 1886 को एक जाट परिवार में हुआ था, जो मुरसान रियासत के शासक थे। यह रियासत वर्तमान में हाथरस जिले में है। वे राजा घनश्याम सिंह के तीसरे पुत्र थे। जब वे 3 वर्ष के थे, तब हाथरस के राजा हरनारायण सिंह ने उन्हें पुत्र के रूप में गोद ले लिया। मथुरा के वृंदावन में राजा महेंद्र प्रताप का बचपन बीता। वृंदावन में उनका महल है। अलीगढ़ में सर सैय्यद खां द्वारा स्थापित स्कूल में उन्होंने बीए तक शिक्षा ली।

ससुराल जाते तो 11 तोपों की सलामी मिलती

राजा महेंद्र प्रताप का 1902 में जिंद रियासत की राजकुमारी बलवीर कौर से संगरूर में विवाह हुआ। विवाह के बाद जब कभी महेन्द्र प्रताप ससुराल जाते तो उन्हें 11 तोपों की सलामी दी जाती। एक बार जिंद के महाराजा की इच्छा के विरुद्ध राजा महेंद्र प्रताप ने कलकत्ता के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में भाग लिया और वहां से स्वदेशी के रंग में रंगकर लौटे। 1909 में वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केंद्र था।

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