कलयुग में साक्षात श्रीहरि का रूप है भागवत:अलीगढ़ में महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती के सान्निध्य में शुरू हुई कथा, धूमधाम से निकली शोभायात्रा

अलीगढ़3 महीने पहले
कथा व्यास का तिलक लगाकर स्वागत करती महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती

कलयुग में भागवत कथा साक्षात श्रीहरि विष्णु का रूप है। जो मनुष्य को सद्बुद्ध प्रदान करती है और मोक्ष का मार्ग दिखाती है। मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तो मोह माया और सांसारिक बंधनों में बंध जाता है। तब भागवत कथा ही उसे मोक्ष के मार्ग तक ले जाती है।

यह बात बी दास कंपाउंड में महामंडलेश्वर डॉ अन्नपूर्णा भारती के सान्निध्य में शुरू हुई भागवत कथा के दौरान बताई गई। भागवत कथा में कथा व्यास स्वामी अमृतानंद महाराज ने कहा कि कथा की सार्थकता तब सिद्ध होती है, जब हम इसे जीवन में धारण करते हैं। अन्यथा यह कथा सिर्फ मनोरंजन और कानों के रस तक ही सीमित रह जाती है।

भागवत कथा से पहले धूमधाम से निकाली गई शोभायात्रा
भागवत कथा से पहले धूमधाम से निकाली गई शोभायात्रा

धूमधाम से निकली कलश यात्रा
भागवत कथा से पहले भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष कलश यात्रा में शामिल हुए और भगवान के भजन गात हुए कलश यात्रा निकाली गई। गाजे बाजे के साथ लोग नंगे पैर सिर पर कलश रखकर शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरे। जहां लोगों ने यात्रा का स्वागत किया।

शहर के जिस भी मार्ग से यात्रा निकली, लोगों ने पूरी आस्था के साथ शीष झुकाए और भगवान को नमन किया। इसके साथ ही कलश यात्रा पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए यह यात्रा बी दास कंपाउंड में आकर समाप्त हुर्इ। जिसके बाद भागवत कथा शुरू हुई। कथा लगातार जारी रहेगी।

सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया कथा का आनंद
सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया कथा का आनंद

भागवत कथा सुनकर नष्ट हो जाते हैं पाप
कथा व्यास स्वामी अमृतानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही मनुष्य के जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं और प्राणी का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है।जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं। वहीं कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है।

भागवत कथा के प्रताप से सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है।कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है। इसलिए अपने बच्चों को भी संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करना चाहिए। कथा के दौरान आयोजक अशोक कुमार पाण्डेय, दिलीप त्रिपाठी, चक्रवर्ती शर्मा, श्रीकांत उपाध्याय, शुभम अग्रवाल, डॉ कुमुद विवेक, विनोद प्रकाश अग्रवाल, प्रदीप वार्ष्णेय समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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