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लिव इन रिलेशनशिप को लेकर फैसला:HC ने कहा- शादीशुदा होने के बाद भी दूसरे के साथ पति-पत्नी की तरह रहना लिव इन रिलेशन नहीं, यह एक अपराध

प्रयागराजएक महीने पहले
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लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा होने के बादवजूद लिव इन में रहना अपराध है। - Dainik Bhaskar
लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा होने के बादवजूद लिव इन में रहना अपराध है।
  • हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया फैसला

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लिव इन रिलेशनशिप पर एक अहम निर्णय सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि शादीशुदा होते हुए गैर पुरुष के साथ पति-पत्नी की तरह रहना लिव इन रिलेशन नहीं है, बल्कि यह अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे संबंध को संरक्षण देने का अर्थ है अपराध को संरक्षण देना।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति डॉ. वाई के श्रीवास्तव की खंडपीठ ने हाथरस, सासनी थाना क्षेत्र की महिला और उसके साथ रह रहे व्यक्ति की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि जो पुरुष किसी विवाहित महिला के साथ लिव रिलेशन में रह रहा है, वह भारतीय दंड संहिता के 494 (पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरा विवाह करना) और 495 (पहले से किए गए विवाह को छिपाकर दूसरा विवाह करना) के तहत दोषी होगा। इसी प्रकार से धर्म परिवर्तन करके शादीशुदा के साथ रहना भी अपराध है।

किसी अपराधी को संरक्षण देने के लिए परमादेश नहीं
कोर्ट ने कहा कि परमादेश विधिक अधिकारों को लागू करने या संरक्षण देने के लिए जारी किया जा सकता है। किसी अपराधी को संरक्षण देने के लिए नहीं। यदि अपराधी को संरक्षण देने का आदेश दिया गया तो यह अपराध को संरक्षण देना होगा।कानून के खिलाफ कोर्ट अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग नहीं कर सकता।

याची आशा देवी महेश चंद्र की विवाहिता पत्नी है। दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है। किंतु याची अपने पति से अलग अरविंद के साथ पत्नी की तरह रहती है। कोर्ट ने कहा कि यह लिव इन रिलेशनशिप नहीं है वरन दुराचार का अपराध है, जिसके लिए पुरुष अपराधी है।

शादीशुदा महिला के साथ लिव इन में रहना अपराध

याची का कहना था कि वह दोनों लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। उनके परिवार वालों से सुरक्षा प्रदान की जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि शादीशुदा महिला के साथ धर्म परिवर्तन कर लिव इन रिलेशनशिप में रहना भी अपराध है। जिसके लिए अवैध संबंध बनाने वाला पुरुष अपराधी है।

ऐसे संबंध वैधानिक नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा कि जो कानूनी तौर पर विवाह नहीं कर सकते उनका लिव इन रिलेशनशिप में रहना , एक से अधिक पति या पत्नी के साथ संबंध रखना भी अपराध है। ऐसे लिव इन रिलेशनशिप को शादीशुदा जीवन नहीं माना जा सकता और ऐसे लोगों को कोर्ट से संरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

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