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स्मृति के अमेठी से ग्रामीणों का ऐलान:रोड नहीं तो वोट नहीं, गांव के बाहर बोर्ड लगाया; खतरे में डालकर रेलवे ट्रैक से आवागमन कर रहे ग्रामीण

अमेठी2 महीने पहले
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ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है। - Dainik Bhaskar
ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।

स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी से ग्रामीणों ने बड़ा ऐलान किया है। ग्रामीणों ने गांव के बाहर रोड नहीं तो वोट नहीं का बोर्ड लगा दिया है। मामला मिश्रौली रंकापुर गांव के पूरे ईश्वरी लाला का पुरवा का है। यहां पर आवागमन का कोई रास्ता नहीं है। एक तरफ से लखनऊ-वाराणसी रेलवे ट्रैक है तो दूसरी तरफ बाग है। अन्य दो दिशाओं में मैदानी क्षेत्र है। ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय नेता लोग आते हैं वोट मांगने चले जाते हैं। इस बार हम लोगों ने वोट न देने का फैसला किया है। जब तक रास्ता नहीं बनेगा तब तक वोट नहीं डालेंगे।

गांव की महिला सिराजी ने बताया कि गांव में कोई भी विकास नही हुआ है। जबकि हमारी सांसद स्मृति ईरानी मंत्री और विधायक सुरेश पासी सरकार में मंत्री हैं। ऐसा नहीं है मामले की शिकायत नहीं की गई। बार बार शिकायत के बावजूद भी कोई हल नहीं निकला।

रेलवे लाइन बनने से बंद हो गया रास्ता

गांव की महिला जसमता ने बताया कि हमारे गांव में जब से रेलवे लाइन बनी है तब से गांव में आने जाने के लिए रास्ता बंद हो गया है। जब दुलहन आती है तो तीन सौ मीटर पहले ही उतरना कर पैदल जाना पड़ता है। आज तक किसी ने रास्ता नहीं बनवाया हम लोगों को गंभीर बीमारी में दवा कराने के लिए एंबुलेंस वा अन्य आकस्मिक सेवाओं का लाभ नहीं मिलता है।

बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान हथेली पर रख कर रेलवे ट्रैक पारकर जाना पड़ता है। आए दिन जानवर दुर्घटनाग्रस्त होते रहते हैं। यही नहीं हम लोगों के घर में जब शादी विवाह पड़ता है तो गांव के बाहर बारात रोकना पड़ता है।

रिश्तेदारों ने आना बंद कर दिया

गांव के राम प्रकाश ने बताया कि घर बनवाने के लिए सामान भी लाइन के उस पार उतार कर सिर पर लादकर लाना पड़ता है। जिसके चलते पैसा अधिक खर्च होता है। यहां तक की रिश्तेदार वह अन्य संबंधी रास्ते की वजह से गांव में आना नहीं चाहते हैं। हमारे गांव में कोई रिश्ता भी नही करना चाहता है। अब तो हालत यह हो गए है की शादी विवाह के भी लाले पड़ रहे है। हम लोग आधुनिक युग में भी चहारदीवारी में क़ैद हैं।

ग्राम प्रधान सियाराम ने कहा कि गांव में समस्या बहुत जटिल है। छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल जाना हो या किसी की तबीयत खराब हो जाए रास्ता कहीं नहीं है। यहां रास्ता बनना बहुत जरूरी है। हम गांव वालों के साथ हैं।

300 की आबादी वाला गांव में नहीं कोई सुविधा

छात्र शिव प्रताप ने बताया कि मिश्रौली रंकापुर ग्राम सभा में लगभग पांच हजार की आबादी है। इस गांव में सात पुरवा है। जिसमें पूरे ईश्वरी लाला का पुरवा में लगभग 30 घर निवास करते है। लगभग 300 की आबादी वाला यह पुरवा सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। गांव में महज दो इंडिया मार्का नल है। उसमें भी एक नल खराब है। गांव में एक भी शिक्षा के लिए एक भी स्कूल नहीं।लोग नरकीय जीवन यापन करने को मजबूर है।सरकार की कोई सुविधाएं ग्रामीणों को नही मिल पा रही है।

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