स्मृति ईरानी के विकास की खुलती पोल:अमेठी में ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार का किया ऐलान, गांव में लगाया बोर्ड- 'रोड नहीं तो वोट नहीं'

अमेठी7 दिन पहले
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अमेठी में विधानसभा चुनाव से पहले यहां की सांसद और केंद्रीय मंत्री के विकास के हवा-हवाई दावों की पोल खुलने लगी है। गौरीगंज तहसील और ब्लॉक क्षेत्र अंतर्गत ग्रामसभा मेंदन मवई के सूजापुर गांव में रोड नहीं तो वोट नहीं का बोर्ड लगाकर चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया गया है।

गांव में जगह-जगह पर बैनर लगाए गए हैं। उसमें लिखा हुआ है ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ और ‘सूजापुर की जनता का यही संकल्प, नेता ढूंढ है स्वयं विकल्प'। बड़ी बात तो यह है कि इस गांव के प्रत्येक घर में काले झंडे लगे हुए हैं, जो बिना कुछ बोले अपना विरोध प्रदर्शित करते रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां पर बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग से निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-931 को मिलाने वाले संपर्क मार्ग की स्थिति अत्यंत दयनीय है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। जहां पर हमेशा जलभराव रहता है। ग्रामीणों को आने-जाने में बड़ी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

18 वर्ष पहले बीजेपी विधायक ने बनवाई थी सड़क

यह सड़क 18 वर्ष पहले बीजेपी विधायक तेजभान सिंह ने बनवाई थी। इसके बाद से इस सड़क की मरम्मत नहीं हुई। जिसके कारण इसकी स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। गौरीगंज क्षेत्र जहां पर समाजवादी पार्टी के विधायक राकेश प्रताप सिंह हैं। पिछले 10 वर्षों से पद पर हैं। 3 वर्ष पहले सड़क पर लेपन हेतु कार्य लगाया गया, लेकिन यह कार्य सिर्फ कागजों पर किया गया। पैसा खारिज हो गया, लेकिन सड़क की हालत जस की तस बनी रही।

जल निकासी की बड़ी समस्या

यही नहीं गांव के अंदर नालियां नहीं बनी हैं। जिसके कारण गांव में जल निकासी की बड़ी समस्या है। गांव के बाहर बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक लोगों को पहुंचने का रास्ता नहीं है। जनपद मुख्यालय ब्लॉक से महज 6 किमी की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद यहां विकास के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया है। ऐसे में ग्रामीणों का विरोध लाजमी है।

जब तक समाधान नहीं तब तक चुनाव का बहिष्कार

सूजापुर ही नहीं आसपास के 3-4 गांव के लोगों का कहना है कि जब तक हम लोगों की समस्या का समाधान नहीं किया जाता है तब तक हम लोग चुनाव का बहिष्कार करते रहेंगे। आने वाले 27 फरवरी को यहां के बूथ पर कोई भी वोट डालने नहीं जाएगा। अब जितने भी नेता हैं, सभी अपना विकल्प ढूंढ लें, क्योंकि हम लोग वोट नहीं करेंगे। यही तो हम लोगों का हथियार है, जो 5 साल में एक बार हमारे हाथ आता है।

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