UPSC में 23वीं रैंक लाने वाली सदफ से बातचीत:अमरोहा की बेटी बोली- ये परीक्षा एक लॉन्ग गेम है, लेकिन ईमानदारी से 8-10 घंटे की मेहनत मंजिल तक जरूर पहुंचाती है

अमरोहा4 महीने पहलेलेखक: कोमल निगम
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IAS सदफ ने अपने परिवार को उनकी सफलता का कारण बताया है। - Dainik Bhaskar
IAS सदफ ने अपने परिवार को उनकी सफलता का कारण बताया है।

उत्तर प्रदेश के अमरोहा की बेटी सदफ चौधरी ने अपने दूसरे प्रयास में UPSC 2020 में 23वीं रैंक हासिल की। IAS बनना सदफ का बचपन का सपना था। अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने 2018 में बैंक की जॉब छोड़ी और अपने लक्ष्य की तरफ चलने लगी। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद बिना किसी कोचिंग के उन्होंने यह मुकाम हासिल कर लिया।

दैनिक भास्कर से बातचीत में सदम ने बताया कि मैं पहले खुद के दम पर खड़ी होना चाहती थी इसलिए मैंने बैंक की नौकरी की, जब मुझे लगा कि अब यहां पैर जम गए हैं, वैसे ही मैं अपने सपने को साकार करने में लग गई।

पढ़िए आईएएस सदफ से बातचीत...

सवाल: बिना कोचिंग के आपने ये मुकाम कैसे हासिल किया, आपको किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता था?
जवाब:
आईएएस बनना मेरा बचपन का सपना था और मुझे वो किसी भी हाल में पूरा करना था। कोंचिग न करना मेरा खुद का फैसला था। मुझे पढ़ाई के बीच में कभी कोई दिक्कत नहीं आई। बस कभी-कभी गाइडेंस की कमी लगती थी, लेकिन ऐसे में मैं खुद की ही टीचर बन जाती थी और फिर से लक्ष्य को पाने में लग जाती थी।

सवाल: आपकी पढ़ाई का क्या रूटीन था, कैसे आप घर में रहकर सब कुछ मैनेज करती थीं?
जवाब:
मैं रोज 10 घंटे पढ़ाई करने का लक्ष्य रखती थी। जिसमें से मैं 8 घंटे पढ़ पाती थी। घर में रहने के कारण परिवार को भी टाइम देना जरूरी होता है। मैं रोज एक सब्जेक्ट पूरा करने का लक्ष्य रखती थी। अगर ऐसा नहीं हो पाता था, तो पढ़ाई का समय बढ़ा भी देती थी। कभी-कभी लो फील करने पर घरवाले पूरा सपोर्ट करते थे। मेरी बहन ने मेरी बहुत मदद की है, इस मंजिल को पाने में।

सवाल: आपसे इंटरव्यू के दौरान क्या सवाल पूछे गए थे?
जवाब:
मेरा ऑप्शनल सब्जेक्ट पॉलिटिकल साइंस था। मेरे इंटरव्यू में मुझसे इसी से रिलेटड सवाल किए गए थे। मुझसे मेरे काम के बारे में पूछा गया। मैंने अपने कॉलेज में पढ़ाई के अलावा और क्या-क्या गतिविधियां की हैं, इसके बारे में पूछा गया। साथ ही मुझसे भारत-अफगानिस्तान के रिश्तों के बारे में भी पूछा गया।

सवाल: आपका ये दूसरा प्रयास था, पहले प्रयास में आप इंटरव्यू तक पहुंचने के बाद भी लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई थीं, क्या कहना है इसके बारे में?
जवाब:
जब मेरा पहले प्रयास में सेलेक्शन नहीं हुआ था, तो मैं दुखी नहीं हुई थी, क्योंकि उस चीज ने मुझे और मजबूत बना दिया था। मैंने और मेहनत की, खुद को और निखारा और देख लीजिए रिजल्ट आपके सामने हैं।

सवाल: तैयारी के टाइम आपकी दिनचर्या कैसी थी और आप क्या डाइट लेती थीं?
जवाब:
मैं तैयारी करने के टाइम 6 से 7 घंटे की नींद लेती थी और घर का ही खाना खाती थी। साथ ही नमाज जरूर पढ़ती थी, क्योंकि ऐसा करने से मुझे एनर्जी मिलती थी और अल्लाह का आशीर्वाद भी बना रहता था। पढ़ाई के दौरान तो मैं हेल्थ पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाई, लेकिन अब मैं इस पर पूरा ध्यान दूंगी।

सवाल: आपने बताया कि आपकी बहन ने आपकी बहुत मदद की है, कुछ उनके बारे में बताइए और उन्होंने आपकी कैसे मदद की और आपके परिवार की क्या भूमिका रही?

जवाब: मेरी बहन दिल्ली यूनिवर्सिटी से एमकॉम की पढ़ाई कर रही हैं। वो बहुत ही सपोर्टिव हैं। उन्होंने कभी भी कोई दिक्कत मेरे तक नहीं आने दी। वो इंटरव्यू में भी मेरे साथ गई थी। वो मेरे फोन से लेकर मेरी सारी दिक्कतें हैंडल करती थीं। परेशान होने पर मुझे समझाती थीं और निगेटिव चीजों को मुझसे बहुत दूर रखती थीं। मेरे पापा बैंक मैनेजर हैं और मम्मी हाउस वाइफ हैं। परिवार का सपोर्ट हमेशा मेरे साथ रहता था। मुझे ऐसा लगता है कि परिवार का साथ आपका सबसे बड़ा स्ट्रेस बस्टर होता है।

सवाल: आपकी तरह देश के कई युवा आईएएस बनना चाहते हैं, वो भी अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं, क्या कहना चाहती हैं आप उनसे?
जवाब: मैं उन सभी लोगों से कहना चाहूंगी की आप लोग लगन के साथ पढ़ाई करो, मेहनत करो और बिना ध्यान भटकाए अपने लक्ष्य को पाने में लग जओ, क्योंकि आईएएस बनना कोई एक रात का सपना नहीं है बल्कि ये एक लॉन्ग गेम है, जिसमें आपकी मेहनत ही आपको जीत दिला सकती है।

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