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आरोपों की हो निष्पक्ष जांच:अयोध्या पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चंपत राय और अनिल मिश्र से की इस्तीफे की मांग, डीएम को दिया पत्र

अयोध्या3 महीने पहले
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जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि मामले पर निर्मोही अखाड़ा के अधिवक्ता रहे रणजीत लाल वर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की। - Dainik Bhaskar
जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि मामले पर निर्मोही अखाड़ा के अधिवक्ता रहे रणजीत लाल वर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामलला के दर्शन किए। साथ ही, आरोपी ट्रस्टियों चंपत राय व अनिल मिश्र से इस्तीफ़े की मांग की। सर्वोच्च न्यायलय के सेवानिवृत्त जजों से निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग की।

जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि मामले पर निर्मोही अखाड़ा के अधिवक्ता रहे रणजीत लाल वर्मा से उनके आवास पर मुलाकात की। अयोध्या के महंत जन्मेजय शरण के आश्रम पर उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों चंपत राय व अनिल मिश्र से इस्तीफे की मांग की। सर्वोच्च न्यायलय के सेवानिवृत्त जजों से जांच कराए जाने की बात कही। उन्होंने रामजन्मभूमि के आसपास खरीदे जा रहे मंदिरों का विरोध कर उनके संरक्षण की मांग की। इस संबंध में उन्होंने डीएम को पत्र भी दिया।

संतों को डराया धमकाया जा रहा
महंत जयराम दास, बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास, नागा राम लखन दास से मुलाकात कर मंदिर ट्रस्ट पर चल रहे विवाद पर चर्चा की। बताया कि संतों का आरोप है कि संतों को डराया धमकाया जा रहा है। उनके मंदिर को जबरदस्ती लिया जा रहा है। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री व सीएम योगी से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच कराकर जो भी दोषी हैं, उन पर कार्रवाई की बात कही।

स्वेच्छा से दे दें इस्तीफा
सरस्वती ने मांग की है किजिसके ऊपर आरोप लगे हैं, उनको स्वेच्छा से इस्तीफा दे देना चाहिए। कम से कम जांच पूरी होने तक। वहीं, वकील रणजीत लाल वर्मा से राम जन्म भूमि के विस्तारीकरण के दरमियान खरीदे जा रहे मंदिरों के विरोध में न्यायालय में अपील करने के लिए उन्हें नियुक्त किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि राम मंदिर के लिए हम ही नहीं हमारे पूर्वज भी काफी समय से संघर्ष करते आ रहे हैं। अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि मुक्त हो इसके लिए प्रयास सभी ने किया।

ट्रस्ट में आ गए राजनीतिक लोग
धर्म का कार्य धर्माचार्य करें लेकिन बीच में राजनीतिक लोग ट्रस्ट में आ गए हैं। मंदिर बनाने के लिए एकत्रित हुए धन से अन्य मंदिरों को खरीदा जा रहा है। मंदिर को खरीद करके उनको तोड़ा जा रहा है। ऐसे में विधिक प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया गया है। रंजीत लाल वर्मा जिन्होंने राम जन्मभूमि केस निर्मोही अखाड़े का पक्ष रखा था, इसके लिए हमने इनको अपना वकील नियुक्त किया है। हमने उनके चेंबर में आकर रंजीत लाल वर्मा से निवेदन किया था, जिसको इन्होंने स्वीकार किया है। अब केस बनाया जाएगा और विधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा जाएगा।

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