कल्याण के बारे में अयोध्या क्या कहती है...:कल्याण सिंह कभी हेलिकॉप्टर से अयोध्या नहीं गए, कहते थे- इस धरती पर सड़क से आना उनका सौभाग्य होगा

अयोध्या5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

कल्याण सिंह जून 1991 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिरने से पहले अयोध्या में मौजूद लाखों कारसेवकों पर गोली नहीं चलाने का आदेश दिया था। कल्याण ने अधिकारियों से कहा था कि सरकार भले ही कुर्बान हो जाए, पर गोली नही चलनी चाहिए। बाबरी विध्वंस के दिन हुआ भी ऐसा ही। 6 दिसंबर को अधिग्रहित परिसर में सर्वदेव अनुष्ठान के लिए जमा हुए लाखों कारसेवकों ने विवादित ढांचे को मलबे में बदल दिया।

बाद में कल्याण सिंह ने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उस समय उनके करीबी रहे और बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार उन्हें याद कर बेहद भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि 92 की घटना में जो साहस, निडरता व त्याग का परिचय कल्याण सिंह ने दिया, शायद ही कोई और कर पाता।

राम मंदिर आंदोलन के दौरान कल्याण सिंह का साथ निभाने वाले अयोध्या के साधु-संत और नेता क्या कहते हैं-

राम विलास वेदांती- मैंने कल्याण सिंह से कहा था, जब सीएम बनोगे तभी ढांचा टूटेगा
पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय सदस्य राम विलास वेदांती बताते हैं कि कल्याण सिंह जब अयोध्या आते थे तो हमसे ही बात किया करते थे। जब बाबरी विध्वंस नहीं हुआ था, उससे एक साल पहले हमारी उनसे बातचीत हुई थी। कल्याण सिंह ने हमसे कहा कि अशोक सिंघल कहते हैं, जब तक बाबरी विध्वंस नहीं होगा, तब तक मंदिर निर्माण को लेकर कोई भी कार्य नहीं हो सकता। तब हमने कल्याण को कहा, 'यह तब होगा, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आप बनेंगे।' तब कल्याण सिंह हंसे और बोले, ऐसा कैसे आप कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री मैं बनूंगा।

अगर भाजपा की सरकार आई, तब मैं ही क्यों मुख्यमंत्री बनूंगा। इस विषय में आपको कैसे विश्वास है। मैंने जवाब दिया यह मैं जानता हूं कि जब भाजपा की सरकार बनेगी, तब आप ही मुख्यमंत्री बनेंगे। इस विषय पर हमारी अटलजी और अशोक सिंघल से कई बार चर्चा भी हो चुकी है। फिर जब वे मुख्यमंत्री बने तो अयोध्या आए। उन्होंने मुझसे मुलाकात की और कहा आपने जो कहा वो सच हो गया। जब मैंने पूछा कि अब ढांचा गिरेगा कि नहीं गिरेगा, तो उन्होंने कहा, ढांचा भी जरूर गिरेगा।

मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह अपने मंत्रिमंडल के साथ अयोध्या के कारसेवकपुरम पहुंचे थे। लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. रामविलास वेदांती की मौजूदगी में कल्याण सिंह ने मंच से ही राम मंदिर बनाने की शपथ ली थी।
मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह अपने मंत्रिमंडल के साथ अयोध्या के कारसेवकपुरम पहुंचे थे। लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. रामविलास वेदांती की मौजूदगी में कल्याण सिंह ने मंच से ही राम मंदिर बनाने की शपथ ली थी।

मुख्यमंत्री बनने के बाद कभी अयोध्या हेलिकॉप्टर से नहीं आए
राम विलास वेदांती बताते हैं कि कल्याण सिंह जी में एक खास बात थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या में मंत्रिमंडल के साथ मंदिर निर्माण को लेकर शपथ लेने का कार्यक्रम तय हुआ। मैं दोपहर 2 बजे तक कार्यक्रम में इंतजार ही करता रहा, लेकिन सुबह 7:00 बजे लखनऊ से चले कल्याण सिंह शाम 5:00 बजे अयोध्या पहुंचे। लखनऊ से अयोध्या तक उनका भव्य स्वागत किया गया। कल्याण सिंह ने अयोध्या में 7:00 बजे शाम को महासभा को संबोधित भी किया। कल्याण सिंह ने हमसे कहा कि मैं कभी अयोध्या हेलिकॉप्टर से नहीं आऊंगा। यह वह धरती है, जहां पर सड़क मार्ग से ही आना हमारा सौभाग्य रहेगा।

तस्वीर 1991 की हैं। जब सीएम बनने के बाद कल्याण सिंह अयोध्या पहुंचे थे। विनय कटियार उस पल को याद कर बताते हैं कि राम मंदिर के निर्माण में कल्याण सिंह के पराक्रम को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
तस्वीर 1991 की हैं। जब सीएम बनने के बाद कल्याण सिंह अयोध्या पहुंचे थे। विनय कटियार उस पल को याद कर बताते हैं कि राम मंदिर के निर्माण में कल्याण सिंह के पराक्रम को कभी नहीं भुलाया जा सकता।

अयोध्या आते तो दिगंबर अखाड़ा जरूर आते थे
नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास बताते हैं कि कल्याण सिंह राम मंदिर विवाद पर 2010 में हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद मंदिर आए थे। बोले- मैंने राम जन्मभूमि के लिए सत्ता को ठोकर मार दी। मेरी यही अंतिम इच्छा है कि मेरे जीते जी रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन जाए।

दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास बताते हैं कि हमारे गुरु रामचंद्र दास परमहंस से उनका बेहद लगाव था। वे जब भी अयोध्या आते तो दिगंबर अखाड़ा जरूर आते। ढांचा विध्वंस के बाद उन्होंने उसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। यह उनके जैसा साहसी ही कर सकता था ।

बाबरी ढांचा गिरने के बाद जब कल्याण पहली बार अयोध्या पहुंचे तो दिगंबर अखाड़े में उनका स्वागत किया गया। अखाड़े के संत यह मानते हैं कि कल्याण के सहयोग के बिना यह मुश्किल काम था।
बाबरी ढांचा गिरने के बाद जब कल्याण पहली बार अयोध्या पहुंचे तो दिगंबर अखाड़े में उनका स्वागत किया गया। अखाड़े के संत यह मानते हैं कि कल्याण के सहयोग के बिना यह मुश्किल काम था।

कल्याण के एहसान को हिंदू पीढ़ियों तक नहीं भूल पाएंगे
श्रीराम वल्लभाकुंज के प्रमुख स्वामी राजकुमार दास कहते हैं कि हम कल्याण सिंह को कभी नही भुला सकेंगे। वे अमर रहेंगे। यदि उन्होंने कारसेवकों पर गोली न चलाने के लिए आदेश नहीं दिया होता, तो आज तस्वीर अलग होती। उनके इस एहसान को कोई भी हिन्दू, खासकर राम भक्त पीढ़ियों तक नहीं भूल पाएगा।

तस्वीर 1991 की है। मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह का अयोध्या के रिकाबगंज में स्वागत किया गया था।
तस्वीर 1991 की है। मुख्यमंत्री बनने के बाद कल्याण सिंह का अयोध्या के रिकाबगंज में स्वागत किया गया था।

उनसे मिलकर एक ऊर्जा का संचार होता था
राम मंदिर आंदोलन के नायक रामचन्द्र दास परमहंस के शिष्य और विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा हमेशा कल्याण सिंह का दिगंबर अखाड़े में स्वागत करते थे। इन लोगों ने कहा कि उनसे मिलकर एक ऊर्जा का संचार होता था। वे हिंदुत्व के महानायक के रूप में अमर रहेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वसुदेवाचार्य आदि से भी उनके बेहद करीबी संबंध रहे हैं।

खबरें और भी हैं...