यहां हनुमान को आंगन में ही मिला स्थान:भगवान श्रीराम-जानकी संग कनक भवन में करते हैं निवास, कैकेयी ने सीताजी को मुंह दिखाई में दिया था

अयोध्या2 महीने पहले
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अयोध्या का कनक भवन मंदिर जहां भगवान श्रीराम जानकी संग आज भी निवास करते हैं। - Dainik Bhaskar
अयोध्या का कनक भवन मंदिर जहां भगवान श्रीराम जानकी संग आज भी निवास करते हैं।

भगवान श्रीराम और माता सीताजी का निज भवन जिसे कनक भवन के नाम से जाना जाता है, वह परम दिव्यता, शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक हैं। इसे श्रीराम विवाह के बाद माता कैकेयी ने सीताजी को मुंह दिखाई में दिया गया था। जिसे भगवान राम और सीता जी ने अपना निज भवन बना लिया। उस समय का यह भवन 14 कोस में फैली अयोध्‍या नगरी में स्थित सबसे दिव्‍य महल था। कनक भवन उस समय पांच कोस में फैला था। मान्यता है कि दीपावली पर अयोध्या लौटने पर भगवान इसी महल में दीपावली मनाते हैं। दीपावली पर दैनिक भास्कर आपको बताएगा इस महल के बारे में खास जानकारी।

कनक भवन में विराजमान श्रीराम सीता।
कनक भवन में विराजमान श्रीराम सीता।

कनक भवन कैकेयी के अनुरोध पर बना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कनक भवन का निर्माण महारानी कैकेयी के अनुरोध पर अयोध्‍या के राजा दशरथ द्वारा विश्वकर्मा की देखरेख में श्रेष्ठ शिल्पकारों द्वारा कराया गया था। मान्‍यताओं के अनुसार, कनक भवन के किसी भी उपभवन में पुरुषों का प्रवेश वर्जित था। भगवान के परम भक्‍त हनुमान जी को भी बहुत अनुनय विनय करने के बाद आंगन में ही स्‍थान मिल पाया। इसी मान्यता के तहत कनक भवन के गर्भगृह में भगवान श्रीराम-जानकी के अलावा किसी अन्य देवता का विग्रह स्थापित नहीं किया है।

बड़ी दीपावली पर कनक भवन सरकार का दिव्य श्रृंगार।
बड़ी दीपावली पर कनक भवन सरकार का दिव्य श्रृंगार।

त्रेता युग में भगवान राम के श्रीधाम जाने के बाद उनके पुत्र कुश ने कनक भवन में राम और सीता की मूर्तियां स्‍थ‍ापित की। यह भवन अयोध्‍या के पराभव के बाद जर्जर हो गया। मान्यताओं के अनुसार, कनक भवन से विक्रमादित्‍य कालीन एक शिलालेख प्राप्‍त हुआ। उसके अनुसार, द्वापर युग में जब कृष्ण जरासंध का वध करने के उपरांत प्रमुख तीर्थों की यात्रा करते हुए अयोध्या आए तो कनक भवन के टीले पर एक पद्मासना देवी को तपस्या करते हुए देखा। टीले का जीर्णोद्धार करवाकर मूर्तियां पुन: स्थापित की। इसी शिलालेख में ही आगे वर्णन है कि आज से लगभग 2070 वर्ष पूर्व समुद्रगुप्त ने भी इस भवन का जीर्णोद्धार करवाया। सन् 1761 ई. में भक्त कवि रसिक अलि ने कनक भवन के अष्टकुंज का जीर्णोधार करवाया था।

कनक भवन में हर रोज होता है भगवान का मनमोहक दर्शन।
कनक भवन में हर रोज होता है भगवान का मनमोहक दर्शन।

महल ओरछा की महारानी वृषभानु कुंवरि की देखरेख में कराया गया
वर्तमान के कनक भवन का निर्माण ओरछा राज्‍य के राजा सवाई महेन्द्र प्रताप सिंह की पत्नी महारानी वृषभानु कुंवरि की देखरेख में कराया गया था। सन् 1891 ई. को उनके द्वारा प्राचीन मूर्तियों की स्थापना के साथ ही राम सीता की दो नए विग्रहों की भी प्राण प्रतिष्ठा करवाई गई।
कनक भवन में श्रीराम-जानकी संग भ्रमण करते हैं
आठ सखियां ऐसी हैं जो सीताजी की अष्टसखी कही जाती हैं। उनमें चंद्र कला, प्रसाद, विमला, मदन कला , विश्व मोहिनी, उर्मिला, चम्पाकला, रूपकला हैं। मान्यता है कि किशोरी जी प्रतिदिन श्रीराम को उनके भक्तों अर्थात भक्तमाल की कथा सुनातीं है। इसी भावना के तहत भक्तमाल की पुस्तक भी रखी रहती है। जानकी संग भगवान श्रीराम प्रतिदिन चौपड़ भी खेलते हैं, इसके लिए चौपड़ की भी व्यवस्था की गयी है। संतों को ऐसा अनुभव रहा है कि कनक भवन में भगवान श्रीराम-जानकी संग भ्रमण भी करते-रहते हैं। चैत्र रामनवमी, सावन झूलनोत्सव, अन्नकूट, दीपावली श्रीहनुमत-जयंती, महालक्ष्मी पूजन, दीपावली,अन्नकूट और ग्यारस (देवोत्थानी एकादशी) आदि पर्व मंदिर में धूमधाम से मनाया जाता है।

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