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दुर्गा सप्तशती में है कामाख्या के इस मंदिर का जिक्र:551 कन्याओं भोज के साथ नौ दिवसीय भंडारे सम्पन्न ,कोरोना काल के बाद कामाख्या मंदिर पर नवरात्र में उमड़े श्रद्धालु

अयोध्या12 दिन पहले
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दुर्गा सप्तशती में है कामाख्या भवानी के इस मंदिर का जिक्र : यहां कोरोना काल के बाद कामाख्या मंदिर पर नवरात्र में उमड़े श्रद्धालु और कन्याओं का पूजन किया गया - Dainik Bhaskar
दुर्गा सप्तशती में है कामाख्या भवानी के इस मंदिर का जिक्र : यहां कोरोना काल के बाद कामाख्या मंदिर पर नवरात्र में उमड़े श्रद्धालु और कन्याओं का पूजन किया गया

अयोध्या जिले के मवई क्षेत्र के सुनबा गांव में घने जंगलो के बीच गोमती नदी के तट पर विराजमान माता कामाख्या के ऐतिहासिक सिद्ध पीठ पर शारदीय नवरात्र के अन्तिम दिन श्रद्धालुओं की आस्था का हुजूम उमड़ पड़ा। सवा लाख श्रद्धालु माता कामाख्या में हवन पूजन अर्चन एवं दर्शन कर पुण्य के भागी बने।

अयोध्या के सुनबा जंगल में मौजूद मां कामाख्या मंदिर में हुआ कन्या पूजन
अयोध्या के सुनबा जंगल में मौजूद मां कामाख्या मंदिर में हुआ कन्या पूजन

कन्याओं को भोज आदि के बाद अंग वस्त्र व दक्षिणा देकर विदा किया गया

मेला परिसर में क्षेत्र के प्रसिद्ध समाज सेवी विनोद कुमार सिंह नवरात्र में भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नौ दिवसीय का आयोजन किया गया।जो पूरे नवरात्रि बड़े ही धूम धाम से चला और नवमी के दिन कन्या भोज के साथ भंडारे का समापन हुआ।प्रातः से सामूहिक रूप से 551 कन्याओ की विधिवत पूजन के साथ भोज आदि के बाद अंग वस्त्र भेटकर व उन्हें दक्षिणा देकर अंतिम दिन के भंडारे का शुभारंभ किया।

दस हजार हजार श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया

पूरे दिन चले भव्य भंडारे में क्षेत्र व आस पास जिले से आये दस हजार हजार श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।इस मौके पर जगदीश सिंह विजय बहादुर सिंह तेज बहादुर सिंह,जितेंन्द्र यादव,सालिक राम यादव , असलम खां मो0 सुफियान मेराज अहमद नफीस खां रविन्द्र सिंह हिमांशु शुक्ल एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी बलवंत सिंह नान्ह महाराज,हनुमान दत्त पाठक मेला कमेटी अध्यक्ष शेर बहादुर सिंह प्रधान,सहित हजारो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

मवई के कामाख्या भवानी मंदिर पर नवरात्रि की नवमी पर भक्तो तांता हजारों की संख्या में लगा रहा।क्षेत्राधिकारी रितेश सिंह की अगुवाई में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किये गए थे।मुख्य द्वार पर सैदपुर चौकी प्रभारी प्रदीप यादव दलबल के साथ मौजूद रहे।चप्पे चप्पे पर मौजूद पुलिस के जवानों ने लोगों को सुरक्षा का एहसास दिलाया।

चार जिलों की सीमा पर स्थित मां कामाख्या भवानी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र

चार जिलों की सीमा पर स्थित मां कामाख्या भवानी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र है। रुदौली तहसील मुख्यालय से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मवई ब्लॉक के सुनवा के घने जंगलों में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ कामाख्या भवानी के कपाट दिन में कभी बंद नहीं किये जाते। नवरात्र के दिनों में यहां मेले जैसा नज़ारा रहता है। वासंतिक व शारदीय नवरात्र में सूबे के कई जिलों से यहां भक्त पूजन-अर्चन को आते हैं।

यहां पिंडी के रूप में मौजूद हैं मां कामाख्या
यहां पिंडी के रूप में मौजूद हैं मां कामाख्या

राजा सुरथ व समाधि वैश्य की तपस्या का स्थल

दुर्गा सप्तशती के प्रथम अध्याय में मां कामाख्या भवानी का जिक्र मिलता है। राजा सुरथ व समाधि वैश्य की तपस्या का स्थल यही बताया जाता है। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें इसी स्थान पर दर्शन दिया था। माना जाता है कि तभी से यहां मां महाकाली, महासरस्वती व महालक्ष्मी पिंडी रूप में विराजमान हैं। कामाख्या मंदिर परिसर में राजा सुरथ व समाधि वैश्य की मूर्ति अक्षयवट के नाम से वर्तमान समय में भी स्थित है।

राजा दर्शन सिह की कामना भी पूर्ण हुई और उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया

मंदिर का जीर्णोद्धार राजा दर्शन सिह ने कराया था। माना जाता है कि राजा दर्शन सिह अपने सैनिकों के साथ यहां से गुजर रहे थे। इसी दौरान किसी ने उन्हें यहां मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी की जानकारी दी। राजा दर्शन सिह की कामना भी पूर्ण हुई। इसके बाद उन्होंने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। नवरात्र में मंदिर में माता का दर्शन करने के लिए फैजाबाद के साथ ही बाराबंकी, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, अंबेडकर नगर समेत अन्य जिलों के श्रद्धालुओं का आना होता है। वर्ष भर यहां पर विभिन्न प्रकार के धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।अर्चक बृज किशोर मिश्र के अनुसार माता सदियों से अपने भक्तों की मुरादें पूरी करती आ रही हैं रात में आठ बजे आरती के बाद मंदिर में प्रवेश नहीं किया जाता। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुल जाते हैं। पूरे दिन मंदिर के कपाट खुले रहते हैं।

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