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पर्यटन के लिए संवर रही अयोध्या:चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के 24 स्थानों पर बनेगा विश्राम स्थल, लगेंगे रामायण कालीन पेड़, सरयू में दो पुल बनेंगे

अयोध्या6 महीने पहले
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275 किलोमीटर का चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग अयोध्या, गोण्डा, बस्ती, अम्बेडकरनगर व बाराबंकी जनपद से होकर गुजरता है। - Dainik Bhaskar
275 किलोमीटर का चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग अयोध्या, गोण्डा, बस्ती, अम्बेडकरनगर व बाराबंकी जनपद से होकर गुजरता है।

अयोध्या के चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग पर 24 स्थानों पर विश्राम स्थल बनेगा। पूरे मार्ग पर रामायण कालीन आम पीपल बरगद महुआ आदि के पेड़ लगाये जायेंगे। सरयू नदी पर मूर्तियन घाट व शेरवा घाट पर पुल का निर्माण भी होगा।

पौराणिक व धामिक तीर्थ स्थल पयर्टन का केन्द्र बन जायेंगे
इसके साथ ही परिक्रमा मार्ग पर स्थित पौराणिक व धामिक तीर्थ स्थल पयर्टन का केन्द्र बन जायेंगे। जिससे न सिर्फ इससे जुड़े क्षेत्रों का विकास होगा बल्कि यहां रोजगार सृजन भी होगा।
उन्होने बताया कि 275 किलोमीटर का चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग अयोध्या, गोण्डा, बस्ती, अम्बेडकरनगर व बाराबंकी जनपद से होकर गुजरता है। इस मार्ग का निर्माण होने से सभी जनपदों में पयर्टन की सम्भावनाएं विकसित होगी।

भारत की सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है
बताते चले कि 84 कोसी परिक्रमा ही अयोध्या का सांस्कृतिक सीमा है। केन्द्रीय सड़क एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इसके महत्व को समझा, इसीलिए 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को राजमार्ग घोषित किया। इस परिक्रमा मार्ग पर और इसके आस-पास ऐसे कई पौराणिक स्थल हैं, जिनसे भारत की सांस्कृतिक पहचान जुड़ी हुई है।

भगवान राम से जुड़े हुए हैं कई स्थान
मखौड़ा धाम, श्रृंगी, आस्तीक, गौतम, सुमेधा, यमदग्नि, च्यवन, रमणक, वामदेव, अष्टावक्र तथा पाराशर, संत तुलसीदास जैसे ऋषियों की तपस्थलियों के साथ-साथ इस परिधि में भगवान वराह का स्थान मौजूद है। इसके साथ में भगवान राम से जुड़े हुए कई स्थान हैं। 84 कोस में मौजूद धरोहर स्थलों की सूची बहुत लंबी है। इन स्थलों के जरिए भारत के पौराणिक अतीत के साथ-साथ इतिहास की भी एक ऐसी झांकी दिखाई देती है, जिसका कहीं और दर्शन होना कठिन है।

सांसद लल्लू सिंह ने अयोध्या के विकास के लिए किया था प्रयास
रामनगरी अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कराने के लिए सांसद लल्लू सिंह 2015 से लगातार इसके लिए प्रयासरत थे। उनके संयोजन में दिल्ली में आयोजित अयोध्या पर्व का मुख्य विषय 84 कोसी परिक्रमा मार्ग व इसमें आने वाले 151 धार्मिक व पौराणिक तीर्थ स्थलों को विश्व स्तर पर लाना था।

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