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जानें अयोध्या के राममंदिर पर ट्रस्ट की राय:ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल बोले- कुछ लोग चाहते हैं राममंदिर समय पर न बन सके, मंदिर तो हर हाल में बनकर ही रहेगा

अयोध्या9 दिन पहले
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रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने कहा कि राक्षस संस्कृति हमेशा कालनेमि की तरह अच्छे काम को रोकती है। - Dainik Bhaskar
रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने कहा कि राक्षस संस्कृति हमेशा कालनेमि की तरह अच्छे काम को रोकती है।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में जमीन खरीद को लेकर विपक्ष के लोग शुरू से आरोप लगाते रहे हैं। कई बार कीमत को लेकर तो कई बार अवैध जमीन की खरीद को लेकर। आखिर इस तरह मुद्दों से क्या राम मंदिर का निर्माण प्रभावित हो सकता है? सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की बनाई कमेटी क्या मनमानी कर रही है? जमीन खरीद की जरूरत किस तरह से है? इस तरह के तमाम अनसुलझे सवालों पर पहली बार अयोध्या रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने खुलकर बात की। पढ़िए भास्कर के सवाल और कामेश्वर चौपाल के जवाब।

सवाल- मंदिर निर्माण में जमीन खरीद को लेकर तमाम तरह के आरोप लग रहे हैं, ऐसा क्यों?

जबाब - राक्षस संस्कृति हमेशा कालनेमि की तरह अच्छे काम को रोकती है। उस युग में राम का अभिषेक भी रुका था। कुछ लोग हैं जो चाहते हैं कि राममंदिर समय पर तैयार न हो। लेकिन मंदिर समय पर बनेगा और उस पर किसी भी रुकावट को कोई असर नहीं होगा। हम भोजन की मक्खियों की तरह ऐसी बाधाओं को हटा देंगे।

सवाल-18 करोड़ में जिस जमीन खरीद की बात हो रही है उसकी जरूरत क्यों थी
जबाब -
राममंदिर के निर्माण में वास्तुशास्त्र का विशेष ख्याल रखा जाता है। हमने जो मंदिर की ड्राइंग बनाई उसमें मंदिर का नक्शा चौकोर नहीं हो पा रहा था। उसे चौकोर करने के लिए जिस जमीन की जरूरत थी, वो ट्रस्ट ने खरीदी। वो हमने सरकारी रेट से कम पर खरीदी है। सरकारी रेट 25 करोड़ था और हमने 18 करोड़ में खरीदी। चूंकि लोग कहते हैं कि पहले दाम कम थे तो मंदिर का केस जीतने के बाद अयोध्या की जमीन के दाम हजारों गुना बढ़ गए हैं। हम किसी का दिल दुखाकर या जबरन जमीन नहीं लेना चाहते, इसलिए हमने उसकी उचित कीमत दी। हमने न तो जमीन हड़पी और न ही जमीन मालिक पर कोई दबाब डाला। ये हमारी संस्कृति नहीं है वरना आरोप लगाने वाले लोग तो वो जमीन फ्री में ही हथिया लेते।

सवाल-ट्रस्ट पर स्टाम्प ड्यूटी बचाने का आरोप है?
जबाब -
ट्रस्ट किसने बनाया, सरकार ने। पैसा किसका है, जनता का। इसमें कोई व्यापार थोड़े ही हो रहा है। जनता और सरकार के ट्रस्ट ने स्टाम्प ड्यूटी कम या ज्यादा दी तो कहां गलत है? ये पैसा किसी की जेब में नहीं जाना। ये तो सरकारी और मंदिर को पैसा है। अगर किसी व्यापारी का पैसा होता तो सरकारी ड्यूटी की बात होती।

सवाल- ट्रस्ट किसी भी जमीन को खरीदता है तो उसका प्रक्रिया क्या है, क्या एक व्यक्ति ही सब देखता है?
जबाब -
सवाल बहुत अच्छा और पारदर्शिता साबित करने के लिए आवश्यक है। जिस दिन से ट्रस्ट बना है उसी दिन से सीए, कोषाध्यक्ष और लीगल एक्सपर्ट को नियुक्त किया गया है। इनके सर्च और अनुमति के बिना एक पैसे का भी कार्य नहीं हो सकता है। ये पूरा सर्च करते हैं। इसके साथ ही सभी 15 ट्रस्टी की अनुमति के बिना कोई भी निर्णय नहीं होता। हमारी बैठक में विचार-विमर्श के बाद निर्णय होता है। इसके बाद ही कदम उठाया जाता है। रजिस्ट्री से पहले रजिस्ट्रार को जमीन की जानकारी दी जाती है। वहां से सर्च की एनओसी ली जाती है, तब खरीदी की जाती है।

सवाल-कहीं ये मुहुर्त के कारण आने वाली बाधाएं तो नहीं हैं? शंकराचार्य ने तो आगाह भी किया था?
जबाब -
न तो हमने ढांचे को मुहुर्त देखकर ताेड़ा था और न ही सुप्रीम कोर्ट से मुहुर्त देखकर जीत मिली। काशी के 800 संतों की विश्वस्त परिषद ने राम मंदिर मुहुर्त पर मुहर लगाई थी। सम्मानीय स्वरूपानंद शंकराचार्य जी तो शुरू से विरोध कर रहे हैं।

सवाल-नई अयोध्या कैसी होगी?
उत्तर-
प्राचीन अयोध्या में 9 दरवाजे थे, नई अयोध्या में 6 दरवाजे होंगे। हर दरवाजे पर 10 हजार वाहनों की पार्किंग और ठहरने की व्यवस्था होगी। इसके बाद 3 और दरवाजे कुछ समय बाद बनाए जाएंगें। हमारा उद्देश्य होगा कि भारत को ताजमहल नहीं, अयोध्या के नाम से पूरे विश्व में जानें।

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