अयोध्या के 5 प्रमुख मंदिरों की दिवाली:3 लाख दीये से रोशन होंगे मंदिर, हनुमान गढ़ी में जन्मेंगे हनुमान लला

अयोध्या7 महीने पहले

प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कल यानी बुधवार को दीपोत्सव में 9 लाख दीप से सरयू का श्रृंगार होना है। साथ ही, अयोध्या में 3 लाख से ज्यादा दीप प्राचीन मठ मंदिर और कुंड पर जलाए जाएंगे। मंदिरों में दीपोत्सव की शुरुआत मंगलवार को धनतेरस से होगी। यम द्वितीया तक आयोजन होंगे। छोटी दिवाली को इन मंदिरों का नजारा अद्भुत होगा। ऐसे में राममयी अयोध्या के 5 बड़े मंदिरों में होने वाली दिवाली से दैनिक भास्कर आपको रुबरू कर रहा है।

इस बार खास होगी रामलला की दीपावली
इस बार खास होगी रामलला की दीपावली

रामलला के दरबार पर रंगोली सजने लगी, 30 हजार दीप होंगे रोशन
गेंदा, गुलाब, मोगरा से रामलला का दरबार सजाया जा रहा है। रामलला के दरबार के सामने रंगोली सजने लगी है। 3 नवंबर को यहां 30 हजार दीप रोशन होंगे। रामलला के सामने देसी घी के 51 दीप जलाए जाएंगे। रामलला के मुख्य आचार्य सत्येंद्रदास ने बताया कि रामलला समेत चारों भाई और प्रभु हनुमान को नवीन वस्त्र और आभूषण से सजाया जाएगा। 4 नवंबर को अन्नकूट पर 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगेगा।

प्राचीन हनुमानगढ़ी में हनुमान जयंती का दोहरा उल्लास होता है।
प्राचीन हनुमानगढ़ी में हनुमान जयंती का दोहरा उल्लास होता है।

हनुमान जयंती व दीपोत्सव का दोहरा उल्लास
प्राचीन हनुमानगढ़ी में हनुमान जयंती का दोहरा उल्लास होता है। अयोध्या में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जयंती मनाने की प्राचीन परंपरा है। जोकि 3 नवंबर को ही है। इस तिथि की आधी रात को हनुमान लला प्रकट होते हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान को सोने, चांदी और हीरे के मुकुट पहनाए जाते हैं। देर रात तक भक्त दर्शन-पूजन के लिए मंदिर में मौजूद रहते हैं। मंदिर के महंत ज्ञानदास ने बताया कि मंदिर में अखंड रामायण का पाठ चल रहा है। 3 नवंबर को रामकथा प्रसंग का प्रवचन होगा। 4 नवंबर को अन्नकूट होगा।

दीपावली के पर्व पर भगवान श्रीराम व जानकी का विशेष तौर पर अभिषेक किया जाता है।
दीपावली के पर्व पर भगवान श्रीराम व जानकी का विशेष तौर पर अभिषेक किया जाता है।

छोटी दिवाली पर होती है लक्ष्मी पूजा
कनक भवन मंदिर के पुजारी दिनेश कुमार ने बताया कि 3 नवंबर को लक्ष्मी पूजा होगी। 4 नवंबर को दीपावली के पर्व पर भगवान श्रीराम व जानकी का विशेष तौर पर अभिषेक किया जाता है। उन्हें दिव्य वस्त्र और आभूषण धारण कराए जाते हैं। अयोध्या आगमन की खुशी में 56 प्रकार के व्यंजन से भगवान का भोग लगाया जाता है। उनकी महाआरती होती है।

माता छोटी देवकाली जिनके अशीर्वाद से सीताजी को मिले श्रीराम
माता छोटी देवकाली जिनके अशीर्वाद से सीताजी को मिले श्रीराम

जानकी लौटने की खुशी में छोटी देवकाली का होता है श्रृंगार
पुजारी अजय द्विवेदी ने बताया कि माता छोटी देवकाली यहां की ग्राम देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि सीता मंदिर में पूजन के लिए आज भी आती हैं। दिवाली पर देवकाली माता का श्रृंगार और भव्य आरती जानकी के वनवास से अयोध्या लौटने की खुशी में होता है। यहां पूरी रात भक्त साधना करते हैं।

भगवान नागेश्वरनाथ की स्थापना श्रीराम के पुत्र कुश ने की।
भगवान नागेश्वरनाथ की स्थापना श्रीराम के पुत्र कुश ने की।

नागेश्वरनाथ का होता पंचमुखी श्रृंगार
पुजारी विजय उपाध्याय ने बताया कि दिवाली पर 12 प्रकार की पत्तियों से भगवान का पूजन किया जाता है। भगवान नागेश्वरनाथ का पंचमुखी श्रृंगार किया जाता है। उनका विविध व्यंजन से भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के बेटे कुश ने नागेश्वर नाथ भगवान की स्थापना की थी। देर रात तक यहां भक्तों की मौजूदगी में नागेश्वरनाथ का पूजन होता है।

कुल 30 स्थानों पर जलेंगे 3 लाख दीये