आजमगढ़ का 200 वर्ष पुराना दखिणमुखी मंदिर:कलकत्ता के बाद आजमगढ़ में है यह मंदिर, भक्तों की मुराद पूरी करती हैं मां, नवरात्र में उमड़ती है भक्तों की भीड़

आजमगढ़20 दिन पहले
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आजमगढ़ जिले का 200 वर्ष पुराने दक्षिणमुखी मंदिर जहां नवरात्र में बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शनों को आते हैं। - Dainik Bhaskar
आजमगढ़ जिले का 200 वर्ष पुराने दक्षिणमुखी मंदिर जहां नवरात्र में बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शनों को आते हैं।

आजमगढ़ जिले के चौक स्थित मां काली के दक्षिण मुखी मंदिर की स्थापना लगभग 200 वर्ष पहले हुई थ। पूरे भारत में दक्षिण मुखी मंदिर एक कोलकाता में है और दूसरा आजमगढ़ में हैं। यहां बड़ी संख्या में दूर-दूर से मां का आशीर्वाद लेकर भक्त आनंदित होते है। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तों का भारी मेला उमड़ता है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि, जो भी भक्त यहां मन से मुराद मांगते हैं। मां अपने भक्तों की मुराद जरूर पूरी करती हैं। यही कारण है कि आज भी इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त मां दुर्गा के दर्शनों के लिए आते हैं।

आजमगढ़ जिले के दखिणमुखी मंदिर में मां की पूजा आराधना करते भक्त।
आजमगढ़ जिले के दखिणमुखी मंदिर में मां की पूजा आराधना करते भक्त।

200 साल पहले हुई थी दक्षिण मुखी मंदिर की स्थापना
मां का दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का कहना है कि दक्षिणमुखी मंदिर में भक्त जो भी मुराद मां दुर्गा से मांगते हैं। उनकी मुराद मां दुर्गा जरूर पूरा करती हैं। और इसी कारण दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन को आते हैं। श्रद्धालु सुनीता पाण्डेय का कहना है कि, इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि, यहां की माता बहुत दया करती हैं और जो भी मुराद मांगी जाती है वह पूरी होती है।

तांत्रिक मंदिर माना जाता है दखिणमुखी मंदिर
मंदिर के पुजारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि दक्षिण मुखी मंदिर तांत्रिक मंदिर माना जाता है। इसलिए इस मंदिर में आस्था भक्तों की बहुत अधिक रहती है। इस मंदिर में जो भी मनोकामना भक्त मांगते हैं, उनकी मनोकामना मां जरूर पूरा करती हैं। पुजारी ने बताया कि यही कारण है कि आजमगढ़ जनपद में रहे बड़ी संख्या में अधिकारी जिनका तबादला हो गया, आज भी यहां दर्शन करने आते हैं। और इसके अतिरिक्त प्रदेश के कई जनपदों से भक्त यहां दर्शन करने के लिए आते हैं।

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