बसपा विधानमंडल दल के नेता शाह आलम ने छोड़ी पार्टी:बोले- पार्टी पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहता; मायावती के थे करीबी

आजमगढ़12 दिन पहले
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आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा से बसपा विधायक और बसपा विधानमंडल दल के नेता शाह आलम उर्फ गुड्‌डू जमाली ने गुरुवार को पद और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा बसपा सुप्रीमो मायावती को भेज दिया है। उन्होंने लिखा है कि वह पार्टी पर या उन पर बोझ बनकर नहीं रहना चाहता। हाल ही में लालजी वर्मा व राम अचल राजभर को पार्टी से निकालने के बाद मायावती ने शाह आलम को विधानमंडल दल का नेता बनाया था।

सपा और भाजपा की लहर में भी मुबारकपुर से जीते थे यूपी में 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की थी। इसके बावजूद मुबारकपुर में उसको हार का सामना करना पड़ा था। यहां से शाह आलम ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा 2017 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की, जबकि तब हर तरफ भाजपा ही छाई हुई थी। 2014 में शाह आलम ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आजमगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, इसमें वह ढाई लाख वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।

आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा से बसपा विधायक शाह आलम उर्फ गुड्‌डू जमाली ने बसपा सुप्रीमो मायावती को भेजा इस्तीफा।
आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा से बसपा विधायक शाह आलम उर्फ गुड्‌डू जमाली ने बसपा सुप्रीमो मायावती को भेजा इस्तीफा।

लिखा- पूरी ईमानदारी के बाद भी आप संतुष्ट नहीं
बसपा सुप्रीमो मायावती को भेजे पत्र में शाह आलम ने मायावती के साथ 21 नवंबर की मीटिंग का जिक्र किया। उनका कहना है, 'पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी के बाद भी आप संतुष्ट नहीं हैं। मीटिंग के दौरान हमारे बीच हुई कई बातों पर मैंने विचार किया। अब मैं यही उचित समझता हूं कि मेरी नेता मुझसे या मेरे कार्यों से संतुष्ट नहीं हैं। मैं आप पर या पार्टी पर बोझ बन गया हूं। मैं बोझ बनकर नहीं रहना चाहता। इसलिए पार्टी के विधानमंडल दल के नेता और विधायक पद से इस्तीफा दे रहा हूं'।

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24 नवंबर को भी बसपा को लगा था झटका
आजमगढ़ की सगड़ी विधानसभा से बसपा विधायक वंदना सिंह 24 नवंबर को ही बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुई थीं। ऐसे में आजमगढ़ में बसपा को यह दूसरा बड़ा झटका लगा है। इससे पहले विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर और पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव करेली भी बसपा को छोड़ चुके हैं।

वहीं, अक्टूबर में एक साथ 6 विधायकों ने मायावती का साथ छोड़ दिया था। इनमें हरगोविंद भार्गव, हाजी मुजतबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद असलम राइनी, सुषमा पटेल और असलम अली शामिल थे। इससे एक बात पूरी तरह से साफ है कि बसपा के बड़े नेता धीरे-धीरे मायावती से किनारा करते जा रहे हैं। इसका आने वाले चुनाव में असर पड़ना तय है।

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