आजमगढ़ लोकसभा उप-चुनाव में कांटे का हुआ मुकाबला:26 को आएगा फैसला, सपा-भाजपा में दिख रही आमने-सामने की लड़ाई

आजमगढ़5 महीने पहले
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आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में मतदान के बाद सपा और भाजपा के बीच मुकाबला दिख रहा है। बसपा ने जिले में यह मुकाबला त्रिकोणात्मक बनाने की कोशिश की थी, लेकिन यह हो नहीं पाया। बसपा के स्थानीय प्रत्याशी शाह आलम उर्फ गुड्‌डू जमाली को अपने स्थानीय होने के साथ ही कोविड काल में लोगों की मदद को लेकर पूरा भरोसा था।

मगर, मतदान के दिन यह लड़ाई सपा के धर्मेंद्र यादव और भाजपा के दिनेश लाल यादव निरहुआ के बीच होती दिख रही है। भाजपा प्रत्याशी को अपनों से नुकसान होने की गुंजाइश ज्यादा दिख रही है। सपा प्रत्याशी ने जिस तरह से कम समय में एक रणनीति के तहत चुनाव लड़ा, वह रणनीति भारी पड़ रही है।

आजमगढ़ में धर्मेंद्र यादव ने वोटिंग के बीच में मतदाताओं के बीच जाकर उन्हें प्रेरित किया।
आजमगढ़ में धर्मेंद्र यादव ने वोटिंग के बीच में मतदाताओं के बीच जाकर उन्हें प्रेरित किया।

अपनों ने ही पहुंचाया भाजपा को नुकसान
भाजपा को यदि लोकसभा उप-चुनाव में नुकसान होता है, तो उसकी जिम्मेदारी अपनों की ही होगी। जिले में भले ही भाजपा का संगठन पहले से ही खड़ा है, लेकिन आपसी गुटबाजी का शिकार है। जिले के नेताओं में बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ लगी रहती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह नेता संगठन को मजबूती नहीं दे पा रहे हैं।

निर्णायक हैं राजभर मतदाता
जिले की पांचों विधानसभा सीटों पर लगभग 10 हजार राजभर मतदाता हैं। विधानसभा चुनाव के समय यह मतदाता सपा के साथ थे। इस लोकसभा के उप-चुनाव में यह मतदाता निर्णायक साबित होंगे। हालांकि, जिले में प्रचार करने आए सुभाषपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर को भी विरोध का सामना करना पड़ा।

ऐसे में यदि इन राजभर समाज के लोगों का वोट सपा से खिसकता है, तो इसका फायदा भाजपा को मिलेगा। एक तरफ जहां सपा के पास मुस्लिम यादव और अन्य पिछड़ी जातियां हैं, बसपा की तरफ केवल दलित और मुलसमान प्रत्याशी होने के कारण कुछ मुसलमान जुड़े हैं। भाजपा के परम्परागत वोट, पिछड़ी जातियां और सवर्ण हैं।

कम मतदान, भाजपा को नुकसान
जिले में हुए लोकसभा उप-चुनाव में जिस तरह से 48.58 प्रतिशत मतदान हुआ, वह भाजपा के लिए नुकसानदायक है। साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में उप-चुनाव में 10 प्रतिशत कम मतदान हुआ है। 2019 के लोकसभा चुनाव में 58 प्रतिशत, 2014 के लोकसभा चुनाव में 56 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। ऐसे में जिले में सपा का पलड़ा भारी पड़ता दिख रहा है।

राजनीतिक विश्लेषक बोले सपा-भाजपा में कड़ी टक्कर

राजनीतिक विश्लेषक राम अवध यादव का कहना है कि बसपा प्रत्याशी शाह आलम के एआईएमआईएम में जाने का नुकसान हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक राम अवध यादव का कहना है कि बसपा प्रत्याशी शाह आलम के एआईएमआईएम में जाने का नुकसान हुआ।

दैनिक भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि राजनीतिक विश्लेषक राम अवध यादव का कहना है कि जिले में उपचुनाव में लड़ाई सपा और भाजपा के बीच दिख रही है। जिले में सपा का बेस वोट प्लस धर्मेंद्र का चेहरा सपा के लिए प्लस रहा। इसके साथ ही धर्मेंद्र यादव की बातों ने प्रभावित किया। हालांकि, सपा की कमजोरी यह थी की जिले के बड़े नेता गांव स्तर पर नहीं गए।

दूसरी ओर भाजपा के लिए प्लस यह रहा है कि चुनाव में भाजपा का कैडर चुनाव लड़ा है। भाजपा की भी कमजोरी यह रही कि पार्टी के नेता भी गांव नहीं गए और बड़े नेताओं के साथ सेल्फी लेते नजर आए। इसका खामियाजा इन दोनों दलों में से किसी एक को भुगतना पड़ सकता है।

मतदान के दिन भाजपा तीसरे नंबर पर चली गई

आजमगढ़ उपचुनाव पर वरिष्ठ पत्रकार विजय यादव ने कहा कि राजभर समाज के सपा में आने से सपा मजबूत हुई है।
आजमगढ़ उपचुनाव पर वरिष्ठ पत्रकार विजय यादव ने कहा कि राजभर समाज के सपा में आने से सपा मजबूत हुई है।

जिले के वरिष्ठ पत्रकार विजय यादव का कहना है कि वैसे तो लड़ाई तीनों दलों में थी पर वोटिंग के दिन यह लड़ाई सपा और बसपा के बीच हो गई। पत्रकार विजय यादव का कहना है कि चुनाव के दिन भाजपा तीसरे नंबर पर चली गई है।

चौंकाने वाला हो सकता है फैसला

आजमगढ़ उपचुनाव पर बोले वरिष्ठ पत्रकार दीपक सिंह ने कहा कि जीत हार का अंतर काफी कम होगा।
आजमगढ़ उपचुनाव पर बोले वरिष्ठ पत्रकार दीपक सिंह ने कहा कि जीत हार का अंतर काफी कम होगा।

आजमगढ़ जिले के चुनाव परिणाम पर वरिष्ठ पत्रकार दीपक सिंह का कहना है कि इस बार का लोकसभा उप-चुनाव के नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं। जो लोग बसपा को कम आंक रहे हैं, ऐसा नहीं है। बसपा को मिले वोट सपा को नुकसान करेंगे। दीपक सिंह का कहना है कि इस उपचुनाव में न तो मुस्लिम वोटर घरों से उस हिसाब से निकले और न ही हिंदू वोटर।

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