बदायूं…3 महीने बाद भी 2 हत्याकांडों का नहीं खुलासा:हिस्ट्रीशीटर और पूर्व BDC की गोली मारकर हुई थी हत्या, कहीं सीओ उलझे तो कहीं थानेदार

बदायूं6 महीने पहले
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बदायूं जिले में हत्या के दो मामले ऐसे हैं, जिनमें नामजदगियां हुई हैं, लेकिन पुलिस ने न तो नामजद पकड़े और न ही असली कातिलों को बेनकाब कर सकी। जहां हिस्ट्रीशीटर की हत्या में थानेदार की जांच को दिशा नहीं मिल रही तो वहीं दलित व पूर्व बीडीसी मेंबर हत्याकांड में सीओ भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पा रहे। कुल मिलाकर हत्या के मामलों में पुलिस की जांच बेनतीजा है।

सितंबर में हुए थे घटनाक्रम

हत्या के दोनों मामले 3 महीने पहले सितंबर में हुए थे। जहां जिले के उघैती थाना क्षेत्र में 14 सितंबर की रात भवानीपुर गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर मनोज की देर रात घर से चंद कदम दूरी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वहीं इसके अगले दिन उजानी कोतवाली क्षेत्र में पूर्व बीडीसी मेंबर रामदयाल निवासी गांव बसों में उस वक्त हत्या हुई, जब वह सुबह के वक्त घर से टहलने निकले थे।

यहां झेलना पड़ा विरोध

उघैती में हुए हिस्ट्रीशीटर हत्याकांड में परिजनों ने भारतीय किसान यूनियन के मंडल उपाध्यक्ष चौधरी सौदान सिंह समेत परिवार के 7 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद भाकियू लामबंद हो गई। पुलिस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए गए। हालांकि अफसरों ने आश्वासन दिया कि निष्पक्ष जांच के बाद कार्रवाई होगी तो किसान शांत हो गए।

जबकि पूर्व बीडीसी हत्याकांड में पुलिसिंग पर यह सवाल उठा कि जिन लोगों को परिजनों ने हत्याकांड में नामजद किया, उनके खिलाफ पहले भी एससीएसटी एक्ट के तहत मुकदमा लिखाया गया था, लेकिन कार्रवाई नहीं हो सकी। कुल मिलाकर दोनों मामलों में पुलिस आरोपों में घिरी दिखी।

अब भी जांच का दे रहे आश्वासन

तीन महीने बाद भी पुलिस इन मामलों में जांच का आश्वासन दे रही है। पूर्व बीडीसी सदस्य हत्याकांड की जांच कर रहे सीओ उझानी गजेंद्र स्रोतीय का कहना है कि मामले की जांच जारी है तो हिस्ट्रीशीटर हत्याकांड के विवेचक एसओ उघैती वीरेंद्र राणा के मुताबिक, तीन महीने बाद भी केस से जुड़े तथ्य जुटाए जा रहे हैं।

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