बदायूं की सहसवान सीट, यहां कभी नहीं खिला कमल:प्रदेश की 16 अन्य सीटों का भी यही हाल, नहीं मिला भाजपा को विधायक

बदायूं7 दिन पहले
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विधानसभा चुनाव से चंद दिन पहले भाजपा में दिग्गजों की आमद और रवानगी की भगदड़ में उलझे संगठन के नेताओं का फोकस अभी भी बदायूं की सहसवान समेत प्रदेश की उन 17 सीटों पर है, जहां भाजपा के अस्तित्व में आने के बाद से आज तक कमल ने खिलने का नाम नहीं लिया। कहने को पिछले एक साल से इन सीटों पर लगातार भाजपा होमवर्क कर रही है, लेकिन होमवर्क के महा अभियान को भगदड़ ने पलीता लगाकर रख दिया है।

साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने सपा चित हो गई थी, लेकिन एक इतिहास यहां कायम रहा कि सहसवान सीट पर भाजपा का विधायक यहां की जनता ने नहीं चुना। मुस्लिम-यादव फैक्टर वाली इस सीट पर यह इतिहास कायम रहना सपा के लिए बड़ी बात थी। वह भी उन हालात में जब आंधी मोदी की थी। शुरुआत में तो दावे और वादों को पूरा करने में वक्त सरकार ने गंवा दिया, लेकिन पिछले एक साल से भाजपा ने जो होमवर्क शुरू किया, उसका लक्ष्य ही था कि किस तरह सहसवान में कमल खिलाया जाए। केवल सहसवान ही नहीं प्रदेश में अन्य 16 सीटें भी ऐसी हैं, जहां भाजपा अपनी विधायकी का खाता खोलने को शुरुआत से ही मोहताज दिखी है।

मुलायम ने दी थी मजबूती

सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने सहसवान विधानसभा से साल 1996 में चुनाव लड़कर इसे सपा का अवैध किला बनाकर रख दिया। हालांकि इससे पहले भी भाजपा के सियासतदार इस तिलिस्म को नहीं तोड़ सके थे। मुलायम ने तो केवल यहां से दावेदारी करके इस किले को मजबूती दी थी।

यहां भी है पूरा फोकस

मौजूदा वक्त में भाजपा का पूरा ध्यान अंबेडकरनगर की अकबरपुर सीट, आजमगढ़ की निजामाबाद सीट, सीतापुर की सिधौली सीट, रायबरेली की हरचंदपुर सीट और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट पर है। इनके अलावा रायबरेली की सदर सीट, कानपुर की सीसामऊ सीट, आजमगढ़ की सदर सीट, प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट, इटावा की जसवंतनगर सीट, रायबरेली की ऊंचाहार सीट, जौनपुर की मल्हनी सीट, आजमगढ़ की अतरौलिया सीट, आजमगढ़ की ही मुबारकपुर और गोपालपुर सीट शामिल हैं। जौनपुर की मल्हनी सीट जो पहले रारी विधानसभा थी, वहां भी बीजेपी आज तक कभी नहीं जीती है।

ये हैं इस सीटों पर विधायक

अंबेडकरनगर की अकबरपुर सीट से बसपा के रामअचल राजभर विधायक हैं। जबकि आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से समाजवादी के आलम बदी विधायक की सीट पर आसीन हैं। इसी तरह सीतापुर के सिधौली सीट से डॉ. गोविंद भार्गव विधायक हैं, जो बसपा में थे और पिछले दिनों ही सपा में शामिल हुए हैं। रायबरेली की हरचंदपुर सीट से कांग्रेस से राकेश सिंह को जनता ने चुना था, हालांकि अब वह भाजपा का दामन थाम चुके हैं। लखनऊ की मोहनलालगंज सीट सपा के खाते में और अमृत सिंह यहां से विधायक हैं। जबकि रायबरेली की सीट पर कांग्रेस से चुनाव जीती आदित्य सिंह विधायक हैं और अब भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर चुकी हैं।

जिक्र कानपुर की सीसामऊ सीट का करें तो समाजवादी पार्टी के हाजी इरफान सोलंकी को यहां की जनता ने विधानसभा भेजा है। आजमगढ़ सदर पर दुर्गा यादव, प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट पर कांग्रेस की आराधना मिश्रा, इटावा की जसवंत नगर पर सपा मुखिया के चाचा शिवपाल यादव, रायबरेली की ऊंचाहर सीट पर मनोज पांडेय समाजवादी पार्टी, जौनपुर की मल्हनी सीट पर समाजवादी पार्टी के ही लकी यादव, आजमगढ़ की अतरौलिया सीट पर सपा के संग्राम यादव तो मुबारकपुर सीट पर बसपा के शाह आलम विधायक हैं।

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