चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में लिविंग लिजेंड्स ऑफ बलिया की कार्यशाला:प्रो. जगदीश बोले- संस्था समाज को बदलने में सहायक, बंद इंडस्ट्रीज के बारे में सोचना होगा

बलिया13 दिन पहले
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'लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया' फोरम के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ' रोल ऑफ लिविंग लिजेंड्स इन द होलिस्टि डेवेलपमेंट' का आयोजन बुधवार को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय सभागार में हुआ। इसमें 'लिजेंड्स ऑफ बलिया' के सम्मानित सदस्यों में एक राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह व प्रसिद्ध मौसम वैज्ञानिक प्रो. जगदीश शुक्ल को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन दोनों लिजेंड्स की उपलब्धियों की जानकारी दी गयी।

प्रो. जगदीश शुक्ल ने कहा कि कोई भी संस्था समाज को बदलने में सहायक होती है। इस दिशा में बेहतर कार्य करने के लिए आपने विवि परिवार को धन्यवाद दिया। बताया कि मैं आइंस्टीन व गांधी का फैन हूँ। उन्होंने कहा कि बलिया में पहले इंडस्ट्रीज थीं, पर आज बंद हैं। इस दिशा में हम सबको सोचना होगा। यहां कृषि के क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। सुरहा ताल यहां के लिए एक बड़ा संसाधन है। प्रो.शुक्ल ने सुझाव दिया कि बड़े विश्वविद्यालय अपने यहां फाउंडेशन भी स्थापित करते हैं, उसी प्रकार यहां भी सोसाइटी विकसित कर काम हो तो यह एक बेहतर पहल होगी। यहां के नागरिकों की एक स्थायी कमेटी हो। जिसमें कृषि, विज्ञान, पर्यावरण समेत हर क्षेत्र से जुड़े लोग हों।

लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया की कार्यशाला।
लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया की कार्यशाला।

चहुंमुखी विकास में विवि दर्ज कराए सकारात्मक भूमिका
उपसभापति हरिवंश अपने जीवन के तमाम अनुभवों व संघर्ष के दिनों के अलावा पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर व बसन्तपुर गांव से जुड़े अपने रिश्तों को भी साझा किया। कहा कि बलिया की भूमि ऋषियों, विद्वानों व बागियों की धरती है। यहां एक अलग तरह की ऊर्जा है। चंद्रशेखर जैसी ज्वाला फिर यहाँ से निकले, ऐसा विश्वविद्यालय के माध्यम से कैसे हो, इस पर विचार करने की आवश्यकता है।

नए भारत की रूपरेखा बनाने में उच्च शिक्षा का सबसे बेहतर योगदान हो सकता है। उन्होंने विशेष जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण में, नवीन कृषि के क्षेत्र में, गाँवों को बेहतर बनाने में, ग्रामीण पर्यटन विकसित करने में, बलिया में पंजाब जैसी कृषि का विकास करने में विश्वविद्यालय अपनी भूमिका दर्ज कराए तो देश व पर्यावरण हित में बेहतर पहल होगी।

उपसभापति हरिवंश नारायण ने युवा साहित्यकार अतुल राय की किताब 'चाँदपुर की चंदा' जिक्र करते हुए कहा कि आप यह किताब जरूर पढ़ें। गांव की मनः स्थिति को जानने समझने के लिए ऐसी किताबें पढ़नी चाहिए। आपने नुक्कड़-नाटक के जरिए लोगों में बेहतर सोच के प्रति जागरूक करने वाले आशीष त्रिवेदी की भी खुली सराहना मंच से की।

लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया की कार्यशाला।
लिविंग लीजेंड्स ऑफ बलिया की कार्यशाला।

बलिया में जलजमाव की समस्या से अवगत कराया
कुलपति प्रो.कल्पलता पाण्डेय ने विश्वविद्यालय की ओर से कृषि, पर्यटन, पौराणिक व अन्य क्षेत्र में की जा रही पहल को विस्तार से बताया। कहा कि यहां के बागीपन की ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लग जाए तो बलिया का कोई सानी नहीं है। उन्होंने बलिया में जलजमाव व अन्य मूलभूत समस्याओं से भी अवगत कराया और समाधान की पहल पर बल दिया।

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