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मायावती ने किया था गंगा एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास:आखिरी छोर पर आज भी लगा हुआ है शिलापट्ट, बलिया से नोएडा तक सड़क निर्माण की थी योजना

बलिया4 महीने पहले
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मायावती ने लखनऊ से ही 15 जनवरी 2008 को एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कर दिया। - Dainik Bhaskar
मायावती ने लखनऊ से ही 15 जनवरी 2008 को एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कर दिया।

तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने ग्रेटर नोएडा से बलिया तक 1047 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे की योजना बनायी थी। नाम से ही तय था, एक्सप्रेस-वे गंगा के किनारे से गुजरने वाला था। घोषणा होते ही जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध की आवाजें उठने लगीं। तब के विरोधी दल नेताओं ने किसानों की बेसकीमती जमीन का हवाला देकर सियासत गरमा दी।

विरोध इस हद तक शुरू हुआ कि नतीजन मायावती ने पूर्व में हुई घोषणा व शिलान्यास समारोह की तैयारी तेज होने के बावजूद बलिया आने का कार्यक्रम निरस्त करते हुए लखनऊ से ही 15 जनवरी 2008 को एक्सप्रेस-वे का शिलान्यास कर दिया। शहर से सटे माल्देपुर में लगा शिलापट्ट इस बात की गवाही देने को आज भी खड़ा है। उस दिन बसपा सुप्रीमो का 52वां जन्मदिन भी था।

हालांकि उस समय कई कारणों से एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू ही नहीं हो सका। बताया जाता है कि वाराणसी व मिर्जापुर की कुछ संस्थाओं ने गंगा नदी के स्वरूप व पर्यावरण का हवाला देते हुए याचिका दाखिल कर दी थी। बताया जाता है कि बाद में सरकार ने सभी आपत्तियों का निस्तारण करा लिया था। पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल से बनने वाले इस एक्सप्रेस-वे के का काम जेपी ग्रुप को मिला था। सब कुछ के बाद भी एक्सप्रेस-वे का काम अधर में लटक गया। एक्सप्रेस-वे बलिया तक आते-आते भले ही रह गया लेकिन उसके नाम पर सियासत लगातार होती रही। बहरहाल, बीते 17 दिन पहले पीएम मोदी ने शाहजहांपुर से गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास कर दिया है।

यह था गंगा एक्सप्रेस-वे में खास

ग्रेटर नोएडा से बलिया तक 1047 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस में गंगा की सहायक नदियों पर कुल 7 बड़े पुल, 199 छोटे पुल, 23 फ्लाईओवर, 187 अंडरपास बनाने थे। इसके अलावा कुछ स्थानों पर सर्विस लेन भी बननी थी। करीब 300 अरब में बनने वाले गंगा एक्सप्रेस वे के लिए कुल 26 हजार 374 हेक्टेयर भूमि की जरूरत थी। तब प्रदेश सरकार का तर्क था कि इसके निर्माण से गंगा किनारे के जिलों को बाढ़ से भी हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। चार चरण में बनने वाले गंगा एक्सप्रेस वे गौतमबुद्धनगर से फतेहगढ़, डालमऊ (रायबरेली), औराई (भदोही) होते हुए बलिया तक आना था। बीच में फर्रुखाबाद, उन्नाव, मिर्जापुर, वाराणसी व गाजीपुर भी इससे लिंक थे।

पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे में फंसा था तकनीकी पेंच

बसपा शासन में शिलान्यास के बावजूद गंगा एक्सप्रेस-वे पर कोई काम नहीं हुआ। सपा ने लखनऊ से आगरा तक एक्सप्रेस-वे बनाया। इसके बाद समाजवादी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे को लखनऊ से बलिया तक बनाने का प्रस्ताव हुआ। बताया जाता है कि पहले पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का नक्शा बलिया के भरौली तक था। इसके लिए यहां जमीन अधिग्रहण की नोटिस भी जारी हो गयी थी। काश्तकारों के भुगतान के लिए पैसा भी आ चुका था। सूत्रों की मानें तो एक्सप्रेस-वे के बलिया तक बनने में उस समय तकनीकी पेंच फंस गया था। चूंकि बलिया में भरौली तक एक्सप्रेस-वे आना तय हुआ था।

सूत्र बताते हैं कि अंतरराज्यीय सीमा में दस किमी अंदर तक एक्सप्रेस-वे बनाने पर केन्द्र सरकार की अनुमति जरूरी थी। चूंकि भरौली (यूपी) से बिहार की सीमा दो से तीन किमी की ही दूरी पर है, लिहाजा एक्सप्रेस-वे के नक्शे में बदलाव करना पड़ा। किसानों की जमीन अधिग्रहित करने के लिए आया पैसा भी जिले से वापस हो गया। तब सपा के यहां के जनप्रतिनिधियों ने एक्सप्रेस को बलिया तक लाने की पूरजोर मांग की। नक्शा बदलने की स्थिति में इसे रसड़ा में किसी जगह तक लाने की बात हुई। इससे अंतरराज्यीय सीमा की बाध्यता भी खत्म हो जाती। हालांकि इसकी प्रक्रिया काफी लम्बी होने वाली थी, लिहाजा सरकार ने गाजीपुर के अखनपुरा तक एक्सप्रेस-वे को मोड़ दिया।