बलिया में ढाई दशक बाद भी बंद नहीं हुई क्रासिंग:1997 में ओवरब्रिज का हुआ निर्माण, लोग अब भी क्रासिंग से आ-जा रहे; रेलवे ने निर्माण में लगा पैसा वापस मांगा

बलिया4 महीने पहले
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बलिया शहर के सबसे व्यस्त चित्तु पांडे चौराहा पर दिन में कई बार जाम लगता है। यह हालत तब है जब करोड़ों रुपए खर्च आरओबी का निर्माण करीब ढाई दशक पहले हो चुका है। हालांकि इसकी सार्थकता आज तक साबित नहीं हो सकी।

बलिया रेलवे स्टेशन से सटे पश्चिम बलिया-फेफना रेलखंड पर स्थित चित्तु पांडे चौराहा पर रेलवे क्रासिंग है। शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्स और मुख्य बाजार को जोड़ने वाले कचहरी मार्ग पर लगने वाले जाम से निजात के लिए साल 1995 में ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ। करीब दो साल बाद करीब 848 लाख रुपए की लागत 890 मीटर लंबा ओवरब्रिज बनकर तैयार हो गया। 21 मार्च 1997 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की उपस्थिति में ओवर ब्रिज का उद्घाटन किया। हालांकि इसके बाद भी नीचे से गुजर रहा रेलवे क्रासिंग बंद नहीं हो सका।

रेल मंत्री लिख चुके हैं पत्र

जिस उद्देश्य से ओवरब्रिज का निर्माण किया था, उसे अब तक मंजिल नहीं मिल सकी। यही कारण है कि रेल प्रशासन को अब भी रेलवे क्रासिंग पर तीन केबिन मैनों की तैनाती करनी पड़ रही है। ओवरब्रिज निर्माण के बाद नीचे स्थित रेलवे क्रासिंग को बंद करने के लिए तत्कालीन रेल मंत्री रामविलास पासवान, नितीश कुमार, ममता बनर्जी और लालू प्रसाद यादव अपने-अपने कार्यकाल में यूपी सरकार को पत्र लिखकर क्रासिंग बंद करने में सहयोग करने की अपील कर चुके हैं। हालांकि उनकी अपील और आग्रह का प्रदेश सरकार पर आज तक असर नहीं हो सका है।

रेलवे मांग चुका है अपना पैसा

रेल और सड़क मार्ग पर आवागमन सुचारू रूप से होता रहे, इसके लिए लाखों रुपए खर्च कर जिले के एकलौते ओवरब्रिज का निर्माण कराया गया। हालांकि जब दो दशक बाद भी प्रशासन क्रासिंग बंद नहीं करा सका तो रेलवे ने आरओबी में लगा पैसा वापस लौटाने के लिए पत्र भेज दिया है।