अफसरों संग नेताओं ने मनाया कन्या जन्मोत्सव::नवदुर्गा के दिन जन्मी सभी 10 बच्चियों का नाम शैलजा रखा गया

2 महीने पहले
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अफसरों संग नेताओं ने मनाया कन्या जन्मोत्सव - Dainik Bhaskar
अफसरों संग नेताओं ने मनाया कन्या जन्मोत्सव

बांदा मिशन शक्ति के तहत जिलाधिकारी अनुराग पटेल की अनूठी पहल नवेली बुंदेली कन्या जन्मोत्सव नित नए आयाम स्थापित कर रही है। नवदुर्गा के पहले दिन जिला अस्पताल में डीएम की अगुवाई मंे मंडलायुक्त आरपी सिंह, डीआईजी विपिन मिश्रा, एसपी अभिनंदन भाजपा जिलाध्यक्ष संजय सिंह, महिला मोर्चा अध्यक्ष वंदना गुप्ता, एसडीएम सदर सुरभि शर्मा आदि ने जिला महिला अस्पताल में जन्मी दस कन्याओं का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया। सभी बच्चियों के जन्मोत्सव पर अफसरों व नेताओं ने केक काटा, महिलाओं ने साेहर गीत गाकर खुशी मनाई। इतना ही नहीं मंडलायुक्त आरपी सिंह ने नवदुर्गा के पहले दिन जन्म लेने वाली सभी बेटियों का नामकरण शैलजा के रूप मंे किया।

नवदुर्गा के पहले दिन डीएम के अनूठे अभियान अभियान

नवदुर्गा के पहले दिन डीएम के अनूठे अभियान अभियान की सराहना करते मंडलायुक्त आरपी सिंह ने कहा कि इस अभियान से बेटा-बेटी में भेद करने वाले अभिभावकों को प्रेरणा मिलेगी और बेटी को बोझ समझने वाले परिवारीजन सबक ले सकेंगे। कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार के माध्यम से बच्चियों के कल्याण के लिए कन्या सुमंगला योजना, मातृत्व शिशु एवं बालिका प्रोत्साहन योजना, मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, मातृत्व शिशु हित लाभ एवं बालिका मदद योजना आदि विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिनके माध्यम से बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद की जा रही है।

अब समाज की सोच बदल रही है

आयुक्त ने कहा कि अब समाज की सोच बदल रही है और कन्या के जन्म पर भी घरों में खुशियां मनाई जाती है। उन्होंने मातृ शक्ति से अपने आसपास के लोगों को जागरूक करने और बच्चियों को अच्छी शिक्षा-दीक्षा देकर स्वावलंबी बनाने का आह्वान किया। डीआईजी विपिन मिश्रा ने बेटियों के जन्म को परम सौभाग्य बताया। कहा कि समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने की जरूरत है। पुलिस सेवा के 33 वर्ष के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि महिला ही महिला की सबसे बड़ी शत्रु है, अक्सर दहेज उत्पीड़न के मामलों में सास, ननद और जेठानी के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, जबकि वह भी महिलाएं ही हैं। उन्हाेंने बेटियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने और बेटियों को भार न समझने का आह्वान किया। डीएम अनुराग पटेल ने अभियान का उद्देश्य लैंगिक असमानता को दूर करने और बेटा-बेटी मंे भेदभाव को मिटाना है। कहा कि वास्तविकता यह है कि माता-पिता की देखरेख मंे बेटियां बेटों से कहीं आगे हैं, बस उन्हें समझने की जरूरत है। उन्होंने बालिकाओं के प्रति सम्मान बढ़ाने, कन्या भ्रूण हत्या पर नियंत्रण करने, लैंगिक अनुपात को सुधारने और आम जनता में जागरूकता लाने का आह्वान किया।

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