बांदा की रजनी डेयरी खोलकर आत्मनिर्भर बनीं:बोलीं-पहले 50 रुपए भी नहीं होते थे, आज 5 हजार रुपए रोज कमाती हूं

बांदा2 महीने पहले
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बांदा दुग्ध डेयरी को आधार बनाकर महिलाएं खुशहाली की ओर कदम बढ़ा रही हैं। पल्हरी गांव की रजनी ने भी परिवार को गरीबी से उबारने के लिए डेयरी चलाने लगीं। महिला समूह से जुड़कर 30 हजार रुपए फंड इकट्‌ठा की। इतनी ही रकम खुद से जुटाकर दुग्ध डेयरी शुरू की।

4 सालों में उसने रोजगार को बढ़ाया और अच्छा मुनाफा मिलने लगा। गांव में आसपास की महिलाओं को प्रेरित की। रोजगार से जोड़ा। गरीब परिवार से जुड़ी रजनी ने 4 वर्ष पहले परिवार को गरीबी से उबारने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया, "हमने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का सहारा लिया। गांव की महिलाओं को जोड़कर समूह बनाया। एनआरएलएम से उसे भैंस पालने के लिए 30 हजार रुपए फंड मिला। इतनी ही रकम घर-घर से लगा दी। शुरु में 2 भैंस खरीदा। 10 लीटर दूध रोज बंचती थी। इससे जो मुनाफा मिला, उससे फंड का रुपया लौट दी। उसके बाद पैसे इकट्ठा करती गई। आज हमारे पास 10 भैंस हैं। इसी तरह से 20 महिलाएं काम करती हैं। सभी के पास 10-10 भैंस हैं।

"शहर में 50 से 60 रुपए प्रति लीटर दूध बेचती हूं"
मैं 4 सालों से रोज 100 लीटर दूध बेचती हूं। हमारा गांव शहर से नजदीक है। जिसकी वजह से दूध बेचने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है। पति दिनेश कुमार शहर में दूध को 50 से 60 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचते हैं। करीब 5 हजार रुपए हर रोज मिलते हैं।
3 सौ महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
रजनी ने अपना कारोबार संभला इसके साथ अन्य गरीब महिलाओं को भी कारोबार के लिए प्रेरित किया। पल्हरी गांव और आसपास के करीब 4 गांवों की 300 महिलाओं को पशुपालन और बकरी पालन की ट्रेनिंग दी। रोजगार शुरू कराया। इसमें रजनी ने आर्थिक मदद भी की। अब राजकुमार, सीता देवी, चंपा और संध्या आदि महिलाएं रजनी की शुक्रगुजार हैं।

प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी
रजनी कहती हैं, "मैं गांव में प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की तैयारी कर रही हूं। यहां दही, मट्‌ठा, पनीर और खोया तैयार कर पैकिंग करूंगी। इससे आय भी बढ़ेगी। कई लोगों को रोजगार भी मिलेगा। दूध के व्यवसाय एनआरएलएम के सहयोग से शुरू किया था। अगर रजनी जैसा हौसला और हुनर हो, तो कोई भी महिला तरक्की कर सकती है। इस कारोबार में रजनी को अच्छा मुनाफा हो रहा है।"

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