बांदा में 50 परिवारों ने छोड़ा गांव:यादव समाज ने बंद किया रास्ता, एक साल से जंगलों में रह रहे निषाद समाज के 300 लोग; DM से लगाई मदद की गुहार

बांदा2 महीने पहले
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बांदा में 50 परिवारों ने छोड़ा गांव। - Dainik Bhaskar
बांदा में 50 परिवारों ने छोड़ा गांव।

बांदा जिले के कमासिन थाना क्षेत्र के घोसड़ गांव में यादव समाज के लोग निषाद समाज के लोगों को रास्ते से निकलने नहीं देते हैं, जिससे निषाद समाज के 50 परिवारों ने गांव छोड़ दिया है। इन परिवारों के करीब 300 लोग यादव समाज की दबंगई से गांव छोड़कर जंगल में छप्पर डालकर रह रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चों के साथ जंगल में रह रहे ग्रामीणों का भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए पुलिस-प्रशासन के खूब चक्कर लगाए, लेकिन एक साल बाद भी हालात जस के तस हैं। राज्य पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष हीरा ठाकुर के पत्र पर डीएम अनुराग पटेल ने जल्द समस्या का समाधान कराने की बात कही है। साथ ही मामले की जांच बबेरू एसडीएम को सौंपी है।

जंगलों में छप्पर डालकर रहने को मजबूर निषाद समाज के लोग।
जंगलों में छप्पर डालकर रहने को मजबूर निषाद समाज के लोग।

कई बार कर चुके शिकायत, नहीं हुई सुनवाई

कमासिन थाना क्षेत्र के घोसड़ गांव के रहने वाले निषाद समाज के करीब 50 लोग जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने गांव में रहने वाले यादव समाज के लोगों पर रास्ते से न निकलने देने और रास्ते को बंद करने का आरोप लगाया। इस संबंध में उन्होंने जिलाधिकारी अनुराग पटेल को एक शिकायती पत्र दिया। निषाद समाज के लोगों ने बताया कि रास्ते से न निकलने देने की वजह वह लोग गांव छोड़कर जंगल में रहने को मजबूर हैं। वह अपनी समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों की चौखट के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

बांदा में निषाद परिवार के 50 परिवारों ने छोड़ा गांव।
बांदा में निषाद परिवार के 50 परिवारों ने छोड़ा गांव।

16 सितंबर को ठंड से एक बच्चे की हुई मौत

निषाद समाज के लोगों ने बताया कि यादव समाज के अखिलेश, नत्थू, पप्पू और भूरा समेत कई लोग उनसे मारपीट और गाली-गलौज करते हैं. इनकी दबंगई से परेशान होकर वह लोग 12 सितंबर 2020 से छप्पर डालकर जंगलों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 50 परिवार 300 लोग हैं, जो एक साल से दिन-रात जंगलों में ही काट रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें जंगलों में कई तरीके की समस्याएं हो रही हैं।

खाने-पीने के लिए भी उन्हें पेरशान होना पड़ रहा है। रात में ठंड के चलते हमारे बच्चों की मौत हो रही है। अभी हाल ही में 16 सितंबर को एक बच्चे ने ठंड लग जाने के चलते दम तोड़ दिया। वहीं इसके पहले भी दो बच्चों की ठंड से मौत हो चुकी है।

राज्य पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष ने डीएम को बताया मामला

जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने बताया कि उनके पास राज्य पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष हीरा ठाकुर का फोन आया था। उन्होंने बताया कि था कि कमासिन थाना क्षेत्र में निषाद समाज के लोगों की समस्या का निस्तारण किया जाए। डीएम ने बताया कि उनके पास थाना क्षेत्र के घोसड़ गांव के रहने वाले निषाद समाज के लोग आए हैं। उन्होंने प्रार्थना पत्र देकर रास्ते से न निकलने देने की समस्या के बारे में अवगत कराया है।

निषाद समाज के लोगों ने बताया कि वह पहले जिस रास्ते से निकल रहे थे, उस रास्ते से गांव के ही यादव समाज के लोगों के द्वारा नहीं निकलने दिया जा रहा है। रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।

निषाद समाज के लोगों ने जिलाधिकारी अनुराग पटेल से की मुलाकात।
निषाद समाज के लोगों ने जिलाधिकारी अनुराग पटेल से की मुलाकात।

बबेरू एसडीएम को सौंपी गई मामले की जांच

डीएम अनुराग पटेल ने बताया कि उन्होंने इस मामले की जानकारी ली है। पता चला है कि वहां पर कुछ लोगों की भूमधरी जमीन है. इस बारे में उन्होंने बबेरू एसडीएम को पत्र लिखा है। लेखपाल और कानूनगो की टीम बनाकर मौके पर जाकर समस्या देखने को कहा गया है।

अगर राजस्व अभिलेखों में रास्ता दर्ज है तो लोगों को रास्ता दिलाया जाएगा। अगर उक्त रास्ता किसी की भूमिधरी जमीन में आता है तो दोनों पक्षों को बैठाकर समस्या का निस्तारण कराया जाएगा। पूरे मामले की जांच बबेरू एसडीएम को सौंपी गई है।

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