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  • Adarsh ​​​​of Barabanki Became IPS In 22 Years: After Studying For 7 8 Hours At Home, Achieved 149th Rank In UPSC's First Attempt, Success Was Able To Follow The Strategy Of Students Who Cleared The Exam

बाराबंकी के आदर्श 22 साल में बने IPS:घर पर ही 7 से 8 घंटे पढ़ाई कर पहले प्रयास में हासिल की सफलता, यूट्यूब का भी लिया सहारा

बाराबंकी4 महीने पहले
आदर्श कहते हैं कि ईमानदारी और मेहनत से पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं है।

बाराबंकी के आदर्श 22 साल की उम्र में आईपीएस बन गए हैं। उन्होंने यूपीएससी-2020 के फर्स्ट अटेंप्ट में 149वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि इसके लिए उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की, बल्कि घर पर ही 7-8 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने जनवरी 2018 में तैयारी शुरू की थी। रेग्युलर टेस्ट सीरीज ज्वॉइन कर उन्होंने खुद को परखा और कमियों को दूर किया। साथ ही यू-ट्यूब पर एग्जाम क्लीयर करने वाले स्टूडेंट्स की स्ट्रैटेजी को फॉलो किया। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि से न केवल अपने माता-पिता बल्कि जिले का भी नाम रोशन किया है।

आदर्श कहते हैं कि ईमानदारी और मेहनत से पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं है। वैकल्पिक विषय के रूप में समाजशास्त्र को रखा था। उनकी पहली पसंद आइएएस, दूसरी आइपीएस और तीसरी आइआरएस थी। आदर्श बताते हैं कि उनका चयन आइपीएस के लिए हुआ है। सिविल सर्विसेज के प्रतियोगियों के लिए उनका कहना है कि सकारात्मक सोच, दृढ़ संकल्प और ईमानदारी से मेहनत करने से सफलता मिलना तय है।

आदर्श ने रेग्युलर टेस्ट सिरीज ज्वॉइन कर खुद को परखा और कमियों को दूर किया।
आदर्श ने रेग्युलर टेस्ट सिरीज ज्वॉइन कर खुद को परखा और कमियों को दूर किया।
आदर्श कहते हैं कि ईमानदारी और मेहनत से पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं है।
आदर्श कहते हैं कि ईमानदारी और मेहनत से पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं है।

बीएससी में हासिल किया था गोल्ड मेडल

आदर्श कांत शुक्ला ने बताया कि उन्होंने सांई इंटर कालेज लखपेड़ाबाग से हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की थी। इसके बाद नेशनल पीजी कॉलेज लखनऊ से बीएससी में गोल्ड मेडल हासिल किया था। फिर यूपीएससी की तैयारी कर पिछले साल उन्होंने परीक्षा दी थी। यूपीएससी एग्जाम के समय इनकी उम्र 21 साल ही थी। आदर्श कांत शुक्ला की बहन स्नेहा शुक्ला एलएलएम करने के बाद पीसीएस जे की तैयारी कर रही हैं। आदर्श कांत शुक्ला का कहना है कि उनकी उपलब्धि में उनके माता-पिता का अहम योगदान है।

राधाकांत शुक्ल की पत्नी गीता शुक्ला एक गृहिणी हैं। उनके पुत्र आदर्श और पुत्री स्नेहा शुक्ला हैं।
राधाकांत शुक्ल की पत्नी गीता शुक्ला एक गृहिणी हैं। उनके पुत्र आदर्श और पुत्री स्नेहा शुक्ला हैं।

परिस्थितियां बेहतर न होने के कारण पिता नहीं कर पाए थे तैयारी

आदर्श कांत शुक्ला रामनगर तहसील के ग्राम मड़ना के मूल निवासी हैं। आदर्श के पिता राधाकांत शुक्ला निजी फर्मों में एकाउंटेंट हैं। करीब 20 साल पहले वह गांव से बाराबंकी में आकर बस गए थे। वह पहले किराए के मकान में रहते थे। उसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपना मकान बाराबंकी के ओबरी स्थित मयूर बिहार कालोनी में बनवा लिया। राधाकांत शुक्ल की पत्नी गीता शुक्ला एक गृहिणी हैं। उनके पुत्र आदर्श और पुत्री स्नेहा शुक्ला हैं।

राधाकांत बताते हैं कि सिविल सर्विसेज उनका सपना था। परिस्थितियां बेहतर न होने के कारण तैयारी करने के बाद परीक्षा नहीं दे सके थे। अब बेटे ने मेरे सपने को पूरा कर दिया।

इंटरव्यू में पूछे गए कुछ ऐसे सवाल

सवाल: खेल में कमर्शियल कंपनीज भी अब दखल रखती हैं तो क्या उससे खेल की स्पिरिट इफेक्ट होती है?

बिलकुल, कई बार मैच फिक्सिंग और डोप स्कैंडल सामने आते हैं। जब खेल को कमर्शियल करते हैं तो ऐसी दिक्कतें आती हैं।

सवाल: आप खेल में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता देने के फेवर में हैं या नहीं ?

गेम ऑफ चांस के समय सट्टेबाजी सही नहीं है। उस समय मैं सट्टेबाजी के फेवर में नहीं हूं। जबकि गेम ऑफ स्किल को देखते हुए जैसे फुटबाल और क्रिकेट में सट्टेबाजी को कानूनी मान्यता दे सकते हैं। इसके लिए लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है।

सवाल: आप उत्तर प्रदेश से हैं तो यूपी में विकास कैसे ला सकते हैं ?

मैंने उन्हें बताया कि कृषि में ऑर्गेनिक फार्मिंग और टूरिज्म में कॉर्पोरेट स्पांसरशिप लाने का सुझाव दिया। उन्होंने आगे पूछा कि टूरिज्म में पीपीपी मॉडल कैसे लागू किया जा सकता है तो इस सवाल पर मैंने उन्हें सरकार के रोल के बारे में बताया।

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