निरीक्षण करते रहे ACMO, एक और मरीज ने दम तोड़ा:बाराबंकी के अस्पताल में जांच करने पहुंचे थे, परिजन बोले- मरीज को देखा नहीं, आवभगत में जुटे रहे डॉक्टर

बाराबंकी ( सिरौली गौसपुर)10 दिन पहले
हंगामा बढ़ने पर मरीज को खुद देखने पहुंचे एसीएमओ केएनएम त्रिपाठी।

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए डिप्टी सीएम बृजेश पाठक लगातार सरकारी अस्पतालों का दौरा कर हैं। बावजूद इसके, बाराबंकी जिले में सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। यह हालत तब है जब डिप्टी सीएम बृजेश पाठक बीते 4 दिन में दो बार सरकारी अस्पतालों का दौरा करके निर्देश दे चुके हैं।

टिकैतनगर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार को रामसेवक को भर्ती कराया गया था।
टिकैतनगर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शनिवार को रामसेवक को भर्ती कराया गया था।

आधे घंटे तक जमीन पर पड़ा रहा मरीज
मामला बाराबंकी जिले के टिकैतनगर समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। यहां पर शुक्रवार को एक डॉक्टरों की लापरवाही के कारण एक मरीज की मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप था कि समय रहते ऑक्सीजन न लगाने से मरीज ने दम तोड़ दिया था। परिजनों ने इसकी शिकायत टिकैतनगर कोतवाली में की थी। इस मामले में शनिवार को एसीएमओ अस्पताल में जांच के लिए पहुंचे थे, लेकिन हालत फिर भी नहीं सुधरी। आरोप है कि सीएचसी का स्टॉफ एसीएमओ की आवभगत में जुटा रहा। वहीं, एक मरीज ने दम तोड़ दिया। वह करीब आधे घंटे तक बिस्तर से जमीन पर गिरा रहा। तब भी किसी स्वास्थ्यकर्मी ने देखरेख नहीं की।

इलाज न मिलने के कारण रामसेवक बेड से नीचे गिर पड़ा, काफी देर तक डॉक्टर नहीं पहुंचे तो उनकी मौत हो गई।
इलाज न मिलने के कारण रामसेवक बेड से नीचे गिर पड़ा, काफी देर तक डॉक्टर नहीं पहुंचे तो उनकी मौत हो गई।

एसीएमओ के सामने ही मरीज ने दम तोड़ा
बताते हैं कि शुक्रवार को डॉक्टरों की लापरवाही के कारण टिकैतनगर के प्रदीप गुप्ता की मौत हो गई थी। उनकी उम्र करीब 50 साल की थी। परिजनों ने इसकी शिकायत कोतवाली में की थी। तीमारदारों का आरोप है कि डॉक्टरों ने समय रहते ऑक्सीजन नहीं लगाई। इसलिए प्रदीप गुप्ता की मौत हो गई थी। इस मामले की जांच के लिए शनिवार को एडिशनल सीएमओ केएनएम त्रिपाठी पहुंचे थे। तभी एक और मरीज ने दम तोड़ दिया।

तीमारदार सत्यवती ने बताया, 'डॉक्टर ने अस्पताल के पर्चे पर बाहर से दवा मंगवाईं थीं'
तीमारदार सत्यवती ने बताया, 'डॉक्टर ने अस्पताल के पर्चे पर बाहर से दवा मंगवाईं थीं'

कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया
कोटवा धाम निवासी 48 साल के रामसेवक को शनिवार को भर्ती कराया गया था। तीमारदार सत्यवती ने बताया कि एक मई को लोहिया अस्पताल से डिस्चार्ज कराया था, लेकिन उनकी तबियत फिर खराब हो गई। सत्यवती ने बताया कि एसीएमओ के आने के आधे घंटे पहले ही भर्ती कराया था, लेकिन मरीज को देखने कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा।

बाहर से मंगवाईं गईं थी दवाएं
सत्यवती ने बताया कि डॉक्टर ने बाहर से दवाएं मंगवाई, उन्हें लेने भी वही गई थीं। बावजूद इसके, डॉक्टरों ने कोई देखरेख नहीं की। रामसेवक को खून की उल्टी आई और वे जमीन पर गिर पड़े, इससे उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल का स्टॉफ और डॉक्टर एडिशनल सीएमओ की खिदमत में जुटे रहे।

डॉक्टर अमित दुबे ने बताया कि रामसेवक को लीवर सिरोसिस की बीमारी थी।
डॉक्टर अमित दुबे ने बताया कि रामसेवक को लीवर सिरोसिस की बीमारी थी।

लीवर सिरोसिस की बीमारी से ग्रस्त था राम सेवक
इस मामले में जूनियर डॉक्टर अमित दुबे ने कहा कि रामसेवक लीवर सिरोसिस के पेशेंट थे। इनकी हालत नाजुक देखते हुए तुरंत रेफर किया है। इमरजेंसी के लिए विटामिन ए का इंजेक्शन ढूंढ रहे थे। मैने कहा था कि इनको बेड पर लिटा दिया जाए, लेकिन सब तीमारदार गायब हो गए थे। अस्पताल के स्टाफ को बेड पर लिटाने के लिए कहा गया था।

अस्पताल में मरीज की मौत पर जवाब देने से बचते रहे ACMO केएनएम त्रिपाठी।
अस्पताल में मरीज की मौत पर जवाब देने से बचते रहे ACMO केएनएम त्रिपाठी।

जवाब देने से बचते रहे एसीएमओ
इस मामले में जब तीमारदारों ने हंगामा किया तो एसीएमओ जवाब देने से बचते रहे। एसीएमओ केएनएम त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जो कमियां हैं उनको दूर करने का प्रयास किया जाएगा। मैं व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं हूं। उन्हें दूर कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज शाम से या कल से व्यवस्था सुधरेगी।