बरेली...अंतिम संस्कार समेत 8 लाख मुआवजे पर मौत का सौदा:परिजनों ने बीएल एग्रो कंपनी पर लगाया लापरवाही का आरोप; सुबह से शाम तक हंगामा

बरेली2 महीने पहले
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बरेली के बीएल एग्रो खाद्य तेल फैक्ट्री के अंदर 3 मजदूरों की मौत मामले में फैक्ट्री प्रबंधन ने मौत की सौदेबाजी के लिए सारी हदें पार कर दीं। - Dainik Bhaskar
बरेली के बीएल एग्रो खाद्य तेल फैक्ट्री के अंदर 3 मजदूरों की मौत मामले में फैक्ट्री प्रबंधन ने मौत की सौदेबाजी के लिए सारी हदें पार कर दीं।

बरेली के बीएल एग्रो खाद्य तेल फैक्ट्री के अंदर 3 मजदूरों की मौत मामले में फैक्ट्री प्रबंधन ने मौत की सौदेबाजी के लिए सारी हदें पार कर दीं। मुआवजे के लिए परिजन गेट पर 7 घंटे धरने पर थे। मजदूरों की लाश पोस्टमार्टम के लिए परिजनों के आने का इंतजार कर रही थी। इसके बावजूद फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों की मौत पर मुआवजे के नाम पर सौदेबाजी करते रहे।

करीब 7 घंटे बाद फैक्ट्री प्रबंधन ने मजदूरों की मौत पर सौदेबाजी करते हुए 7-8 लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही। साथ ही 50 हजार रुपए अंतिम संस्कार खर्च के साथ मृतक परिवार के एक सदस्य को नौकरी और पेंशन की बात देने की बात कही। जिसके बाद देर शाम मजदूरों का पोस्टमार्टम हो सका।

गेट पर मची रही चीख-पुकार फिर भी सौदेबाजी रही जारी

परिजन पोस्टमार्टम पर शव छोड़कर फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा करते रहे। वहीं परिजनों की चीख-पुकार से मौजूद हर शख्स व्याकुल था। आम आदमी भले ही भावुक रहा हो। लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन को इस पर फर्क नहीं पड़ रहा था। उसने अपनी सुरक्षा के लिए 3 थानों की फोर्स बुलाकर कर घेराबंदी करा दी। परिजन गेट पर ही चीखते-बिलखते रहे। उसके बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन हर मौत के लिए सौदेबाजी करता रहा। मामले की गंभीरता और शासन-प्रशासन के दखल के बाद कई घटे पंचायत करने के बाद फैक्ट्री प्रबंधन मुआवजा देने को तैयार हुआ।

फैक्ट्री प्रबंधन ने कई घंटे छुपाई रही मौत की बात।
फैक्ट्री प्रबंधन ने कई घंटे छुपाई रही मौत की बात।

मामला दबाने के लिए फैक्ट्री में कर रहे थे इलाज

मृतक विजय मौर्या के भाई राजकुमार के साथ अन्य मजदूरों के परिजनों ने बताया कि फैक्ट्री प्रबंधन ने हादसे के बाद मामला दबाए रखने के लिए सभी बेहोश मजदूरों का फैक्ट्री में इलाज शुरू किया। एक-एक कर जब 3 मजदूरों की मौत हो गई। तो साथी मजदूरों का धैर्य भी जवाब दे गया। जब उन्होंने विरोध शुरू किया, तो प्रबंधन ने प्राइवेट वाहनों से सभी को उपचार के लिए राममूर्ति मेडिकल कॉलेज भेजा। लेकिन वहां डॉक्टरों ने नीरज (25) पुत्र छोटे लाल निवासी नंदौसी सीबीगंज, यासीन (24) पुत्र मैदानशाह निवासी गौतारा फतेहगंज पश्चिमी तथा विजय मौर्या (32) पुत्र गेंदनलाल निवासी जौहरपुर सीबीगंज को मृत घोषित कर दिया। जबकि नितिन मिश्रा पुत्र उमाशंकर प्रवीण पुत्र ज्ञानचंद हेमराज पुत्र बिहारी, प्रभात पुत्र पृथ्वी की हालत चिंताजनक बनी है।

मौत पर संवेदना के साथ पार्टी का नाम बताते रहे नेता

चुनावी माहौल और इस पर भी राजनीति न हो ऐसा हो सकता है भला। 3 मजदूरों की मौत के बाद कुछ राजनेता इसका फायदा लेने पहुंचे गए। मुआवजे के नाम पर तो किसी ने मदद नहीं की। लेकिन मौके पर अश्वासन भी देते रहे। इस दौरान जो भी नेता मिलने आया, उसने अपनी पार्टी का नाम जरूर बताया। जिसके बाद मौजूद पुलिसकर्मी और अन्य लोग इन नेताओं को भी कोसते रहे।

हादसे के बाद फैक्ट्री गेट पर बिलखते रहे परिजन।
हादसे के बाद फैक्ट्री गेट पर बिलखते रहे परिजन।

पति की मौत की खबर सुन बेहोश हो गई गर्भवती

हादसे में मौत के शिकार बने नीरज यादव की 3 साल पहले शादी हुई थी। उसका एक डेढ़ साल का बेटा भी है। पत्नी दूसरे बच्चे को जन्म देने वाली है। घटना की जानकारी जब पत्नी और परिजनों को हुई, तो सब फैक्ट्री की तरफ भागे। जहां फैक्ट्री प्रबंधन ने मौत की बात कई घंटे दबाएं रखी। सभी का इलाज अस्पताल में होना बताया। लेकिन उसी दौरान परिजनों को पता चला की 3 लोगों की मौत हो गई है। जिसमें नीरज भी शामिल है। उसकी गर्भवती पत्नी फैक्ट्री गेट पर ही बेहोश होकर गिर पड़ी।

जिंदगी का लास्ट ओवरटाइम

यासीन के परिजनों ने बताया कि यासीन की ड्यूटी रात में थी। वह रात में ड्यूटी कर घर लौटा था। सुबह प्रबंधन की तरफ से नासिर को फिर बुलाया गया कि दूसरा मजदूरी छुट्‌टी पर है। इसलिए उसे ओवरटाइम करना पड़ेगा। जिसके बाद यासिर वहां मजदूरी करने गया था। बिलखते परिजनों ने कहा कि शायद वह ओवरटाइम के लिए उसे नहीं बुलाया जाता, तो आज वह जिंदा होता।

तीन बच्चों को छोड़ बेहोश हो गई पत्नी

घटना में मृतक विजय मौर्या की पत्नी 3 बच्चों को लेकर पति की हालत जानने के लिए परिवार के साथ फैक्ट्री गेट पर पहुंच गई। पति की मौत के बाद भी घंटों प्रबंधन ने बात छुपाए रखी। इस दौरान जब पता चला कि पति की मौत को कई घंटे पहले हो चुकी है। उसके बाद वह बच्चों को छोड़ सड़क पर बेसुध होकर गिर पड़ी।

जांच के लिए पहुंची फोरेंसिक टीम

घटना के बाद प्रशासन की तरफ से पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। इस दौरान विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम भी मौके पर पहुंची और वहां कुछ नमूने लिए। हालांकि कहीं न कहीं प्रबंधन की लापरवाही सामने आ रही है। बताया जाता है कि 3 दिन पहले भी मजदूर सफाई के लिए उतरने की कोशिश कर रहे थे। उस दौरान भी जहरीली गैस के चलते काम नहीं हुआ था।

सुपरवाइजर पर मढ़ा लापरवाही का आरोप

फैक्ट्री के मैनेजर प्रेम बाबू शर्मा ने सुबह ही सब तय कर दिया था। उन्होंने कहा कि इस मामले में सुपरवाइजर की लापरवाही कुछ हद तक है कि उसने बिना चेक किए मजदूरों को टैंक में सफाई के लिए उतारा। प्रबंधन अपने स्तर से जांच करा रहा है। अगर उसका दोष निकला तो कार्रवाई की जाएगी। जिससे यह साफ है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने खुद को क्लीन चिट देते हुए महज एक सुपरवाइजर पर दोष मढ़ दिया है।