पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

शाहजहांपुर में अब कोरोना से राहत:कोविड अस्पतालों ने जीती जंग, अस्पताल हुए कोरोना मुक्त,एक्टिव केस सिर्फ चार, दो माह पहले अस्पतालों में नहीं मिल रहे थे बेड

शाहजहांपुर23 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
आईसोलेशन वार्ड में 11 मई के बाद कुछ दिन तक 200 से ज्यादा मरीजों की संख्या रही है। - Dainik Bhaskar
आईसोलेशन वार्ड में 11 मई के बाद कुछ दिन तक 200 से ज्यादा मरीजों की संख्या रही है।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 11 मई के बाद कोरोना संक्रमण का ऐसा प्रकोप बढ़ा कि लोगों को घरों में कैद होकर रहना पड़ा। सैकड़ों की तादाद में प्रतिदिन मरीजों की संख्या बढ़ने लगी। संक्रमित मरीजों की संख्या हजारों में पहुंच गई। प्रतिदिन आठ से दस मरीजों की मौत हो रही थी, जिससे लोग दहशत में आ गए। मरीज अस्पताल जाते तो उनको बेड नहीं मिलते। आक्सीजन की मारामारी तक बात पहुंच गई थी। लेकिन राहत भरी खबर ये है कि बुधवार को जिले में सिर्फ चार कोरोना मरीज बचे हैं। चारों होम आईसोलेट हैं। कोविड अस्पतालों में एक भी मरीज भर्ती नहीं है।

छुट्टी होने वाली आखिरी मरीज 18 साल की युवती
मंगलवार को जिले में कोविड अस्पताल में एक भी कोरोना संक्रमित मरीज नहीं बचा। जिले में सिर्फ चार एक्टिव मरीज बचे हैं। चारों मरीज होम आईसोलेट हैं। मंगलवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने एलटू आईसोलेशन वार्ड में मंगलवार को आखीरी मरीज 18 वर्ष की युवती की छुट्टी हुई थी। वह कई दिन से भर्ती थी। मंगलवार की शाम रिपोर्ट निगेटिव आने पर उनको छुट्टी देकर राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने राहत की सांस ली। और उम्मीद जताई कि अब दहशत वाले दिन न देखना पड़े। इसी आईसोलेशन वार्ड में 11 मई के बाद कुछ दिन तक 200 से ज्यादा मरीजों की संख्या रही है। उस वक्त हालात इतने खराब हो गए थे कि तीमारदार अपने मरीजों को अस्पताल तक ले जाने से घबराने लगे थे। लेकिन मंगलवार को आखिरी मरीज अस्पताल से छुट्टी होने के बाद जिले के लोगों के लिए राहत भरी खबर है।

अस्पतालों में नहीं मिल रहे थे बेड
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने 11 मई के बाद चार कोविड अस्पताल बनाए थे, जिनमें राजकीय मेडिकल कॉलेज में बने एलटू आईसोलेशन वार्ड में करीब 200 बेड, प्राइवेट अस्पतालों में सत्यानंद अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाकर उसमे पचास बेड की व्यवस्था की। इसी तरह वरूण अर्जुन मेडिकल कॉलेज में कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए 300 बेड लगाये गये और ओसीएफ अस्पताल में 95 बेड की व्यवस्था की गई थी। बावजूद इसके मरीजों को अस्पतालों में बेड तक नहीं मिल पा रहा था। जमीनों में लेटकर इलाज किया गया। तमाम वीडियो और फोटो वायरल हुए थे। उसी दौरान अस्पतालों और प्लांट पर आक्सीजन गैस सिलेंडर का टोटा हो गया था। यहां तक कि बीस बीस हजार रुपये में आक्सीजन गैस सिलेंडर ब्लैक में बिके हैं। अस्पताल में आक्सीजन खत्म हो गई थी। तमाम लोगों ने अपने मरीज की मौत आक्सीजन न मिलने के कारण होना बताई थी। कई ऐसे थे जो डाक्टरों पर आरोप लगाते थे कि लापरवाही के कारण उसके मरीज की मौत हो गई। लेकिन ये ऐसा वक्त था जब लोग दहशत में थे। मरीजों को अस्पताल ले जाने से बचने लगे थे।

हजारों में पहुंच गई थी संक्रमित मरीजों की संख्या
जिले में अब तक 20335 मरीज मिल चुके हैं। जिनमें से 19930 मरीजों की स्वस्थ हो चुके हैं। इतना ही नहीं 401 मरीज अपनी जान भी गवां चुके हैं। अब ऐसा भी वक्त आ गया कि जिले में सिर्फ चार कोरोना संक्रमित सक्रिय मरीज बचे हैं। कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करते करते राजकीय मेडिकल कॉलेज से लेकर स्वास्थ विभाग के करीब 100 ज्यादा डाक्टर संक्रमित हुए और ठीकर होकर फिर इलाज में जुटे।

सीएमओ डॉक्टर एसपी गौतम ने बताया कि लोगों को अभी भी कोरोना गाइडलाइन का पालन करना होगा। क्योंकि तीसरी लहर से निपटने के लिए हम सबको वैक्सीनेशन कराना बहुत जरूरी है। वैक्सीनेशन कराने से ही आने तीसरी लहर कमजोर हो सकेगी। कड़े परिश्रम के बाद जिले में सिरठ चार कोरोना संक्रमित मरीज बचे हैं। अस्पताल में एक भी मरीज भर्ती नहीं है।

खबरें और भी हैं...