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  • Out Of 32 Teachers Who Died Due To Kovid During Panchayat Elections, Only 15 Were Eligible, The Relatives Of The Remaining 17 Could Not Show Evidence

कोविड से मौत भी और अनुदान भी नहीं:पंचायत चुनाव के दौरान कोविड से मृत हुए 32 शिक्षकों में केवल 15 ही पात्र, बाकी 17 के परिजन नहीं दिखा पाए साक्ष्य

बरेली21 दिन पहले
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पंचायत चुनाव के दौरान तमाम शिक्षकों समेत अन्य कर्मचारी कोरोना से संक्रमित मृत हुए थे। चुनाव ड्यूडी में मरने वाले शिक्षकों की मौत पर जमकर हंगामा भी हुआ था। इसके बाद शासन ने चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमित होकर मरने वाले कर्मचारियों के लिए 30 लाख रूपये की अनुदान राशि देने का ऐलान किया था। साथ ही कोविड से मौत के पर्याप्त साक्ष्य भी मांगे थे। बरेली से कुल 32 शिक्षकों ने इसके लिए आवेदन किया। मगर शासन की आरे से अनुदान राशि के लिए पात्र मृत शिक्षकों की सूची जारी की गई तो उसमें केवल 15 आवेदन ही पात्र पाए गए। बाकी के 17 आवेदनों को निरस्त कर दिया। बताया गया कि इन शिक्षकों के परिजन उनकी मौत को कोरोना से मौत के साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा पाए।

चुनाव के दौरान कुल 36 शिक्षकों की हुई मौत
बरेली में पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना पाजिटिव होकर 36 शिक्षकों, शिक्षामित्रों ने दम तोड़ा था। इनमें से 32 ने 30 लाख रुपये की अनुग्रह राशि के लिए आनलाइन आवेदन किया था। इनमें से चार लोगों की रिपोर्ट कोविड पोर्टल पर नहीं मिली थी। इनके आवेदन पहले ही निरस्त हो गए थे। इसके बाद कुल 32 शिक्षकों ने आवेदन किया। इसमें से भी चार और शिक्षकों की मौत स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर नहीं चढ़ी होने की वजह से पहले ही निरस्त कर दिए गए थे। इस तरह कुल 28 शिक्षकों के आवेदन ही शासन को भेजे गए थे।

यह शिक्षक शामिल है पात्र सूची में
शासन की ओर से जारी मृतक शिक्षकों की पात्र सूची में बेसिक के 13 शिक्षक और दो शिक्षामित्र शामिल हैं। जिसमें शिक्षक हरिओम सिंह यादव, भगवती देवी चौहान, शिक्षामित्र अनुज, नीतू सिंह, मोहित कुमार, कोमल अरोड़ा, मनीष कुमार ठाकुर, कंचन कनौजिया, जलीस अहमद, शिक्षामित्र हरीश कुमार सिंह, सोमपाल, विजय कुमार सिंह, शिखा सक्सेना, सत्यपाल, ऋतुराज गर्ग के परिजनों को अनुग्रह राशि का लाभ मिलेगा। बाकी के परिजन कोविड से मौत के साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा पाए।

हमने हर जगह फोन किया मगर कोई स्पष्ट जबाव नहीं
मृत शिक्षकों शिक्षामित्र प्रीता गोस्वामी भी शामिल है। उनके पति गिरीश का कहना है कि उन्होंने आवेदन के दौरान एंटीजन रिपोर्ट लगाई थी। उम्मीद थी कि कुछ आर्थिक मदद मिलेगी। वह खुद एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते है। इन दिनों कोरोना की वजह उनकी भी नौकरी छूटी हुई चल रही है। उन्होंने बताया कि हर जगह फोन कर लिया मगर कोई स्पष्ट जबाव नहीं देता। बीएसए कार्यलय में फोन किया तो उन्होंने कह दिया कि डीएम कार्यालय में फोन करके पता करो। हमें तो अब अपना भविष्य अंधकार में लगा रहा है।

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