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  • The Young Man Died During Treatment In A Private Hospital In Bareilly, The Family Was Unable To Pay The Bill, So The Hospital Administration Refused To Give The Body.

बिल नहीं दिया तो शव रोक लिया:बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई, परिजन बिल भरने में असमर्थ थे तो अस्पताल प्रशासन ने शव देने से इनकार कर दिया

बरेली2 महीने पहले
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उत्तर प्रदेश के बरेली में एक शव को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि उनके मरीज आजाम शाह की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजन अस्पताल का बिल भरने में असमर्थ थे तो अस्पताल ने आजाम के शव को बंधक बना लिया। बोले- जब तक पैसा जमा नहीं होगा तब तक शव नहीं दिया जाएगा। किसी तरह परिजनों ने चंदा एकत्र कर अस्पताल का कुछ रूपया चुकाया। तब जाकर उन्होंने शव दिया। मगर अस्पताल में परिजनों के नाम पर उधार चढ़ा लिया है।

परसाखेड़ा की फैक्ट्री में करते थे मजदूरी
दरअसल, मृतक आजम शाह सीबीगंज के मथुरापुर के रहने वाले थे। वह परसाखेड़ा की एक फैक्टरी में मजदूरी करते हैं। रविवार की शाम करीब आठ बजे वह पैदल ही घर की ओर आ रहे थे। इसी बीच झुमका चौराहे के पास उन्हें रामपुर की तरफ से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। पुलिस ने आनन फानन में उन्हें बाईपास रोड स्थिति एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

पैर में फ्रेक्चर और सिर में भी गंभीर चोटें
आजम के दाहिनी पैर के घुटने के नीचे का हिस्सा फ्रैक्चर हो गया और सिर में गंभीर चोटे आईं। इलाज के दौरान आजम की रात करीब चार बजे मौत हो गई। मगर परिजनों का इस बात कोई सूचना नहीं थी। सुबह करीब आठ बजे अस्पताल प्रशासन ने परिजनों को सूचना दी। तो सबके होश उड़ गए। आनन फानन में मृतक की पत्नी आसमा समेत अन्य लोग अस्पताल पहुंचे।

अस्पताल प्रशासन का कहना 33 हजार भरो शव ले जाओ
मृतक के परिजनों का आरोप है कि जब वह अस्पताल पहुंचे। तो अस्पताल प्रशासन का कहना था कि आजम के इलाज में 33 हजार रुपये का खर्चा हुआ है। वो बिल भर दो और शव को ले जाओ। इस पर परिजनों ने बिल जमा करने में असमर्थता जताई। आरोप है कि इस पर अस्पताल प्रबंधन ने पूरा पैसा जमाकर ही शव देने की बात कही।

17 हजार में दिया शव
परिजनों की माने तो सुबह से लेकर दोपहर तक परिजन अस्पताल प्रशासन से गिड़गिड़ाते रहे। मगर अस्पताल ने शव को देने से साफ इनकार कर दिया। किसी तरह से 17 हजार रूपये में बात तय हुई। कहा कि बाकी का पैसा बाद में जमा करना होगा। परिजनों ने रिश्तेदारों से चंदा एकत्र कर अस्पताल को 17 हजार दिए। तो उन्होंने शव दिया।

इलाज के दौरान ही अपने घर का बताया था पता

बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान जब आजम थोड़ा होश में आए तो उन्होंने अपने घर का पता बताया। जिससे उनके घर वालों को संपर्क किया जा सके। उनके बताए गए मोबाइल नंबर पर ही अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से संपर्क किया था।