बस्ती...उम्मीदों की दिवाली:कुम्हार बोले- रोज बना रहे 1500 दीपक, डिजायनर दीये बढ़ाएंगे घरों की रौनक

बस्ती9 महीने पहले
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कुम्हाराें को दिवाली पर दीपक की मांग बढ़ने की उम्मीद है। - Dainik Bhaskar
कुम्हाराें को दिवाली पर दीपक की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

बस्ती में दीपावली पर्व को देखते हुए कुम्हार मिट्टी के दीये, खिलौने बनाने में जुट गए हैं। कुम्हारों के हाथ चाक पर चल रहे हैं और वे मिट्टी के दीये, खिलौनों, गुल्लक, गुड्डा-गुड़िया, दादा-दादी, गुल्लक, हाथी-घोड़े, पालकी को गढ़ने में जुट गए हैं। कोरोनाकाल में अपेक्षाकृत ठप पड़े मिट्टी के दीये और खिलौनों की इस बार बिक्री तेज होने की कुम्हारों को उम्मीद है।

मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार राम गरीब ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि यह हमारा पुश्तैनी धंधा है, इसी से जीविका चलती है। लेकिन अब बाजार में रंगीन लाइटें आ गईं, जिससे लोग दीयों का उपयोग कम कर दिए है, फिर भी उम्मीद है कि इस दिवाली पर उनके दीयों की बिक्री अधिक होगी।

दीयों के बढ़े खरीदार

कुम्हार राम सेवक ने बताया कि दिन में करीब 1500 दीपक बना रहे हैं। इस काम में मेहनत बहुत लगती है लेकिन घर खर्च भी इसी के सहारे चलता है। राम जगत प्रजापति का कहना है कि अब मिट्टी के दीयों की तरफ लोग आकर्षित हो रहे हैं। पिंटू, राम शब्द, अवधेश, संतोष कुमार ने बताया कि पिछले कुछ सालों से दीयों के खरीददार बढ़े हैं। जामडीह शुक्ल गांव में चाक पर दीया और खिलौना बनाने में जुटे सजीवन,राम सवारें, भुलई ने बताया कि मिट्टी के सामानों की अब पहले जैसी मांग नहीं है, हां इधर कुल्हड़ों की मांग बढ़ी है।

डिजायनर दीपक भी बना रहे

जगदीशपुर में मिट्टी के दीये बना रहे प्रेम कुमार ने बताया कि वह पिछले 30 साल से यह कार्य कर रहे हैं। दीपावली से पहले बिक्री बहुत कम रहती है, लेकिन दीपावली पर होने वाली बिक्री का इंतजार रहता है। इस बार दीवाली पर दीयों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए उसे बनाया जा रहा है। कहा कि रंगीन लाइटों से घर सजाया जा सकता है लेकिन पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान के लिए दीयों का ही उपयोग किया जाता है। इसे देखते हुए दीया बनाने के काम में तेजी आई है। सामान्य दीया से लेकर रंग बिरंगे आकर्षक डिजाइन के दीपक भी तैयार किया जा रहा है।

बिक्री के लिए निकल रहे कुम्हार

दीपों का पर्व दीपावली नजदीक आते ही कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। मिट्टी के बने गुल्लक और खिलौने के प्रति बच्चों को आकर्षित करने के लिए सामान्य गुल्लक ही नहीं डिजाइनर गुल्लक तक बना रहे हैं। कुम्हारों के बनाए गुड्डा-गुड़िया, दादा-दादी, गुल्लक, हाथी-घोड़े, पालकी जैसे खिलौने बाजार में बिकने के लिए आने लगे है। शहर के गली, मोहल्लों में सामान्य दीया से लेकर डिजाइनर दीयों, गुल्लक और खिलौनों को बिक्री के लिए साइकिल पर टोकरी में रखकर बेचने के लिए कुम्हार निकल पड़े है।

ये है कीमत

मिट्टी का सामान्य दीया 45 से 50 रुपए, डिजाइनर दीया 100 से 120 रुपये सैकड़ा मिल जा रहा है, वहीं बाजार में सामान्य दीया की कीमत प्रति सैकड़ा 80 से 100 रूपए और डिजाइनर दीया 150 से 180 रूपए सैकड़ा में बिक रहा है। कोसा,भरुका,घंटी 5 से 10 रुपए, सिलेण्डर के आकार का गुल्लक 25 से 30 रुपए, साधारण गुल्लक 15 से 20 रुपए, जांता 5 से 10 रुपए, हाथी, गाय, तोता 15 से 25 रुपए पीस बिक रहा है।