भदोही में 9 बाल श्रमिकों को मिली आजादी:बच्चों से कालीन बनवाया जा रहा था, चाइल्ड लाइन भेजे गए बच्चे

भदोही10 महीने पहले
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पकड़े गए सभी को बाल श्रमिक मजदूरों को चाइल्ड लाइन को सौंप आगे की कार्रवाई में जुट गई है। - Dainik Bhaskar
पकड़े गए सभी को बाल श्रमिक मजदूरों को चाइल्ड लाइन को सौंप आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

विश्व विख्यात कालीन नगरी भदोही में 9 बाल श्रमिक मजदूरों को कालीन की बड़ी बड़ी कम्पनियों से आजाद कराया गया है। एएचटीयू पुलिस टीम और श्रम विभाग व स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर छापेमारी कर मासूम बच्चों को मौके से कालीन बनाते वक्त पकड़ा है।

छापेमारी की सूचना पर जनपद के अन्य कालीन कंपनियों में हड़कंप मच गया। वहीं कुछ कंपनियों ने अपनी अपनी कंपनी को बंद कर फरार हो गए। वहीं पकड़े गए सभी को बाल श्रमिक मजदूरों को चाइल्ड लाइन को सौंप आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

शारीरिक रूप से कमजाेर बच्चों का इलाज कराया

श्रम विभाग भदोही एवं एएचटीयू पुलिस टीम सहित भदोही कोतवाली और चौरी थाना पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा मुखबिर की सूचना पर गोपनीय रूप से जनपद के विभिन्न कालीन बुनाई सेंटरों में रेस्क्यू कर अलग अलग स्थानों से कुल 9 नाबालिक मासूम बच्चों को बरामद किया गया है जिसमें कुछ बच्चे शारीरिक रूप से कमजोर दिखाई पड़ रहे थे जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए भेज दिया गया तो वहीं अन्य बच्चों से भी जानकारी की गई है।

कोर्ट में पेश किए गए नाबालिग

बरामद सभी बाल श्रमिक को मा. न्यायालय बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। संबंधित मामले में कालीन कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने को श्रम विभाग को निर्देशित किया गया है। न्यायालय समिति की संगीता खन्ना ने बताया की सभी बाल श्रमिकों को चिकित्सीय परीक्षण के बाद प्रभारी 1098 चाइल्ड लाइन भदोही को बरामद बाल श्रमिकों को सुपुर्द कर दिया गया है जहां उनके खाने पीने और रहने की संपूर्ण व्यवस्था कर दी गई वहीं उनके अभिभावकों का पता लगाने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

आज तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई

हालांकि भदोही जनपद में ये पहला मामला नहीं है यहां आए दिन कभी बाल श्रमिक तो कभी बाल बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया जाता है तो कभी कभी मासूम बच्चे रंग बिरंगी कालीन कंपनियों से प्रताड़ित होकर स्वयं फरार हो जाते है बावजूद इसके आज तक कभी किसी विभाग ने ठोस कार्रवाई की जहमत नहीं उठाई है, बाल श्रमिकों के नाम पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च होने और तमाम कानून के बाद भी कालीन की कंपनियों से बच्चों का मिलना जारी है सरकार के दावों कथनी और करनी में साफ दिखाई दे रहा है।

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