भदोही में गौशाला में मर रहे गौवंश:न खाने को चारा मिलता है, न है इलाज की व्यवस्था

2 महीने पहले
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भदोही में गौशाला संचालकों की लापरवाही से मर रहे गौवंश। - Dainik Bhaskar
भदोही में गौशाला संचालकों की लापरवाही से मर रहे गौवंश।

भदोही में गौशाला में अव्यवस्थाओं के चलते गौवंशों की मौत हो रही है। प्रदेश की भाजपा सरकार गौशाला संचालकों को प्रति पशु 30 रुपए देती है। लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारी और ठेकेदार इस पैसे का बंदरबांट कर लेते हैं। जिसके चलते न पशुओं को खाना मिलता है। न ही उन्हें इलाज मिल पाता है। जिसके चलते उनकी मौत हो रही है।

केवल कमाई बढ़ाने के लिए लाए जाते हैं पशु
जिले के सीतामढ़ी के विकासखंड डीघ के ग्राम सभा फुलवरिया में बने गौशाला में गौवंश भूख और इलाज की कमी से मर रहे हैं। लोगों ने बताया कि गौशालाओं में मवेशी तो हैं। मगर इनके लिए ना तो चारा की व्यवस्था है। ना तो इलाज की समुचित व्यवस्था है। आवारा पशुओं को लाद-फांदकर के यहां लाया जाता है। बस नंबर बढ़ाने के लिए ताकि अधिक से अधिक कमाई की जा सके। यहां आए दिन पशु भूख की वजह से मर रहे है। कई बार शिकायत की गई है लेकिन अधिकारी आते है और जांच कर चले जाते है। लेकिन कभी कुछ होता नहीं है। बल्कि शिकायत करने वालों को ही उल्टा धमका दिया जाता है।
प्रभारी मंत्री बोले- हमारी सरकार ने दिया 300 करोड़ का बजट
जिले के प्रभारी और यूपी सरकार में मत्स्य, पशुधन एवं दुग्ध विकास राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद जिले में निरीक्षण करने आए थे। उस दौरान भी गौशालाओं में गायें भूख और देखभाल की अभाव में दम तोड़ रही थी। उन्होंने इस संबंध में बताया था की उत्तर प्रदेश में इससे पहले सभी रजिस्टर्ड गौसेवा केंद्रों को सालाना एक दो करोड़ के बजट में ही काम चलाना पड़ता था। जिसमें कुछ को मिलते थे और कुछ को नहीं। लेकिन प्रदेश की ये पहली सरकार है जो गौरक्षा और उनके संरक्षण के लिए अलग से बजट लाई है। जिसमें 300 करोड़ के बजट का प्रावधान किया गया है। सरकार कुल 5 लाख गौवंश सहित छुट्टा पशुओं को संरक्षण देते हुए उनकी देखभाल और उनके खाने-पीने का भी इंतजाम कर रही है। जिसमें प्रति पशु 900 रुपए प्रतिमाह दे रही है। जिसके लिए डीएम के माध्यम से लाइसेंस दिया जाता है।

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