चांदपुर में भागवत कथा का आयोजन:कथा व्यास ने कहा - माता का ऋण सात जन्म में भी नहीं उतरता, कभी भूले भी न करें अपमान

चाँदपुर, बिजनौर15 दिन पहले
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चांदपुर के मोहल्ला साहूवान स्थित पंडित गुरु नेतराम जी के मंदिर में भागवत कथा का आयोजन हो रहा है। कथा के दूसरे दिन कथा व्यास डा. मिथिलेश मुदगल ने कहा कि शास्त्र कहते हैं कि माता का ऋण सात जन्म मे भी नहीं उतरता है। इसलिए हमें माता का सदैव सम्मान करना चाहिए। कभी भी भूलकर अपमान नहीं करना।

10 हजार बार भगवान के नाम का जप करने से बुद्धि होगी शुद्ध

कथा सुनाते हुए डा. मिथिलेश ने कहा कि व्यास जी ने श्री भागवत की रचना कैसे की। व्यास जी श्री भागवत के श्लोक बोलते थे। गणेश जी उन श्लोकों को लिखते गये। इस प्रकार श्री भागवत जी की रचना हुई। जो भक्त दस हजार बार भगवान के नाम का जप करेगा, उसकी बुद्धि शुद्ध होती है। व्यास जी ने सोचा कि भागवत की रचना के बाद इसका प्रचार कौन करेगा। व्यास जी ने शिष्यों से कहा कि मेरा पुत्र शुकदेव कहां रहता है। देख कर आओ।

व्यास जी के शिष्य वहाँ पहुंचे, जहाँ शुकदेव जी गंगा स्नान कर रहे थे। व्यास जी के शिष्यों ने शुकदेव जी से कहा कि तुम्हारे पिता जी ने याद किया है। उन्होंने मानव कल्याण के लिए भागवत पुराण की रचना की है। इसका प्रचार आपको करना है। शुकदेव जी विरक्त हैं। उन्होंने कुछ नहीं सुना। तब व्यास जी के शिष्यों ने भागवत जी के सुंदर श्लोकों का गायन किया। शुकदेव जी मंत्रमुग्ध हो गये। शुकदेव जी तैयार हो गये।

कथा के मुख्य यजमान शेखर वर्मा और सुषमा वर्मा ने व्यास जी एवं श्री भागवत जी का पूजन किया। कथा में विशाल वर्मा, सुषमा वर्मा, मीनू शर्मा, कविता वर्मा, राम कौशिक, नैतिक वर्मा, सचिन गोसाई, माही वर्मा, सन्तु वर्मा, नमन कौशिक, मनोज वर्मा, रेनू वर्मा और ऊमा देवी आदि का सहयोग रहा।