बुलंदशहर में किसानों को मिल रहे धान के अच्छे दाम:2800 रुपए प्रति क्विंटल बिकने वाली धान के मिल रहे 3780 रुपए

बुलंदशहर2 महीने पहले
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बुलंदशहर में चालू वर्ष में धान की अच्छी कीमत मिलने से किसान खुश हैं। मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसान के चेहरों पर फसल के अच्छे दाम मिलने की खुशी देखी जा सकती है। धान की 1509 प्रजाति 3780 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान धान की खेती करते हैं।

धान की फसल किसानों की आय के मुख्य स्रोतों में से एक है।अनाज मंडी में धान लेकर पहुंचे किसान वीरेंद्र लोधी, संजय शर्मा आदि ने बताया कि इस वर्ष बारिश कम होने के कारण धान की लागत में वृद्धि हुई है।

धान बेचने के लिए मंडी पहुंच रहे हैं किसान

धान की अगेती प्रजाति 1509 के गत वर्ष के 2800 रुपए प्रति क्विंटल के मुकाबले इस वर्ष प्रति क्विंटल 3780 रुपए मिल रहे हैं। भविष्य में और भी दाम बढ़ने की संभावना है। लागत अधिक आने के बावजूद भी मंडी में दाम अच्छे होने के कारण उन्हें लाभ हो रहा है। फसल के अच्छे दाम मिलने से वह खुश हैं।

मंडी आढ़ती योगेश गोयल और विपुल गुप्ता ने बताया कि धान की अगेती प्रजाति एक सितंबर से पहुंचनी शुरू हो गई थी। एक सितंबर को 180 क्विंटल धान मंडी पहुंचा था। जिसके बाद से लगातार किसान मंडी में अपना धान बेचने के लिए मंडी पहुंच रहे हैं। सोमवार तक मंडी के आढ़ती 3500 क्विंटल धान की खरीद कर चुके हैं।

जिले में 90 हजार हेक्टेयर में है धान की फसल

इस बार जिले में 90 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में धान की फसल उगाई गई है। इस बार बारिश कम होने के कारण किसानों ने किसी तरह फसल पकवाकर पहुंचाने का काम किया है। अब रुक-रुक कर जगह-जगह हो रही बारिश के चलते किसानों को अपनी फसल की चिंता भी परेशान कर रही है।

जिले की मंडियों में इस बार धान का रेट अच्छा मिलने से भी किसानों को आस है कि इस बार दाम अच्छा मिलेगा। जबकि पिछले साल धान का रेट दो हजार रुपए के आसपास था। किसानों को अपनी उपज का भी दाम नहीं मिल सका था। जिले में बासमती धान की ही खेती की जाती है।

बारिश के कारण रुकी है कटाई

वैज्ञानिक डॉ. विवेकराज का कहना है कि इस समय धान की फसल की जगह-जगह कटाई चल रही है। लेकिन अभी वो बारिश होने के कारण रुक गई है। खेतों में फसल कटाई के लिए भी खड़ी है। किसान कटाई की तैयारी पूरी कर चुके हैं।

मौसम साफ होते ही धान की कटाई में तेजी आ जाएगी। इसके लिए किसान मजदूरों से भी संपर्क करने लगे हैं। अधिकतर किसानों ने स्वयं ही फसल की कटाई और उठाई की तैयारी कर ली है।

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