धान का कटोरा उगलने लगा 'तेलंगाना सोना':1 हजार किसान उगा रहें बारीक और सुगंधित धान; हैदराबाद की रिसर्च को चंदौली में मिला बाजार

वाराणसी12 दिन पहले
चंदौली में किसान तेलंगाना सोना का उत्पादन कर रहे हैं। BHU में किसानों को प्रेरणा मिली।

UP में धान का कटोरा कहा जाने वाला चंदौली अब 'तेलंगाना' सोना उगाएगा। तेलंगाना सोना चावल की एक प्रजाति है जो यहां की लोकप्रिय धान प्रजाति नाटी मंसूरी को मात दे रही है। यह प्रजाति सच में सोने जैसी खरी है। यह नाटी मंसूरी से कहीं ज्यादा लाभ दिला रही है। धान की पैदावार और मांग भी बढ़ रही है। खाने में स्वादिष्ट और बारीक होना लोगों को काफी पसंद आ रहा है।

बरहनी ब्लॉक में इमिलिया गांव के किसान अजय सिंह ने तेलंगाना सोना (RNR 15048) के बीज का उत्पादन और खेती की है। अजय ने एक हजार किसानों का उत्पादक संघ (FPO) बनाया और खुद का बीज संवर्धन प्लांट लगाया। चावल को उसमें रिफाइन करने के बाद संगठन के दूसरे किसानों को भी इसकी खेती करा रहे हैं। हालांकि, पहला साल है इसलिए उन्होंने अभी 5000 टन तेलंगाना सोना का उत्पादन किया है।

तेलंगाना सोना।
तेलंगाना सोना।

फाइन ग्रेड का चावल

तेलंगाना सोना आने के बाद किसान नाटी मंसूरी धान से दूरी बनाने लगे हैं। कारण, इसका चावल मोटा होता है, जिसे बाजार में बेचना मुश्किल हो जाता है। तेलंगाना सोना प्रजाति के धान की प्रति हेक्टेयर 65 से 70 क्विंटल पैदावार है। इसका चावल महीन और सुगंधित होने से बाजार में अच्छी कीमत मिल रही है। फाइन ग्रेड में शामिल इसका धान नाटी मंसूरी की खेती करने वाले किसानों को काफी पसंद आ रहा है। जबकि नाटी मंसूरी को द्वितीय ग्रेड में रखा गया है। इसे सरकारी क्रय केंद्र पर बेचने पर सामान्य धान की कीमत मिलेगी।

BHU का कृषि विज्ञान संस्थान और अजय सिंह किसानों को तेलंगाना सोना का बीज उपलब्ध कराएंगे।
BHU का कृषि विज्ञान संस्थान और अजय सिंह किसानों को तेलंगाना सोना का बीज उपलब्ध कराएंगे।

BHU से मिली प्रेरणा
अजय सिंह ने वाराणसी के BHU से काॅमर्स से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसी दौरान उसे यूनिवर्सिटी में कृषि के एक सेमिनार में हिस्सा लेने का मौका मिला। देश और विदेश के कृषि वैज्ञानिकों ने खेती के कई फायदे बताए, जिसमें उन्हें तेलंगाना सोना के बारे में पता चला। सेमिनार के बाद वह सीधे घर आ गए। अजय ने कहा कि उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि खेती-किसानी से जुड़ी रही। साल 2015 में बरहनी ब्लाक के किसानों के साथ मिलकर एक FPO का गठन किया।

किसान अजय सिंह।
किसान अजय सिंह।

पहले बाेते थे चना और सब्जी, नहीं निकल पाता था खर्च
अजय ने बताया कि शुरुआत में किसानों ने पारंपरिक धान, गेहूं, चना और सब्जियों की खेती करते थे। इससे हमारा खर्च भी नहीं चल पाता था। मगर अब हालात बदलने लगे हैं। अब हम लाभ की स्थिति में आ गए हैं। वहीं FPO से जुड़े दूसरे किसान भी यह प्रोग्रेस देखकर मुझसे मिले और तेलंगाना सोना उपजाने की इच्छा जताई।

यह है न्यूट्रिशनल खूबी

तेलंगाना सोना धान की प्रजाति कई प्रकार की खूबियां पाई जाती है। इसे शुगर रोग वाले मरीजों को भी खिलाया जा सकता है। क्योंकि इसमें कई ऐसे आक्सीडेंट हैं जो शरीर को पौष्टिक तत्व प्रदान करते हैं। हालांकि जैविक विधि से तैयार धान की डिमांड अधिक है। कृषि वैज्ञानिक डा. एसपी सिंह ने बताया कि चंदौली के किसानों के यह प्रजाति वरदान साबित होगी।

BHU कृषि विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक प्रो. पीके सिंह।
BHU कृषि विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक प्रो. पीके सिंह।

बारीक और स्वादिष्ट चावल, BHU देगा बीज
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कृषि विज्ञान संस्थान चावल अनुसंधान (मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग इन राइस) प्रभारी प्रो. पीके सिंह ने बताया कि तेलंगाना सोना देश में चावल की एक लोकप्रिय प्रजाति है। इसे प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय, हैदराबाद ने विकसित किया है। इसे बेहतर उपज और स्वाद के लिए जाना जाता है।
प्रो. सिंह ने कहा कि यह बारीक धान में आता है। बहुत जल्दी 135 दिन में तैयार हो जाता है।

वाराणसी, चंदौली और मिर्जापुर में तो और भी कम दिन लगता है। वैरायटी काफी अच्छी है। IIRI के वाराणसी स्थित आईसार्क ऑफिस में इसे रि-प्रोड्यूस किया गया है। वहीं इसकी उपज 50-55 कुंतल प्रति हेक्टेयर है। चंदौली समेत 2-4 किसानों के पास उत्पादन अच्छा हुआ है। इस चावल की मार्केटिंग काफी बेहतर है। किसानों के पास सबसे बेहतर ऑप्शन है। किसान चाहे तो BHU या IRRI से संपर्क करके इसका बीज ले सकता है। हम तेलंगाना एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से इसके लिए संपर्क करेंगे।

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