चंदौली...किसानों को पराली न जलाने के दिए गए निर्देश:जैविक खाद बनाने पर दिया गया जोर, आधुनिक खेती के बारे में दी जानकारी

चंदौली22 दिन पहले
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केवीके का किया गया निरीक्षण। - Dainik Bhaskar
केवीके का किया गया निरीक्षण।

चंदौली में आचार्य नरेंद्र देव कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के कुलपति डा. विजेंद्र सिंह ने नगर के केवीके का निरीक्षण किया। उन्होनें किसानों को उन्नत खेती के प्रति जागरुक करने और पराली को निस्तारण करने के लिए जैविक खाद बनाने पर जोर दिया। इसके बाद केवीके फार्म हाउस पर बीज के लिए तैयार विभिन्न फसलों की उपज को देखा। उन्होनें जिले के प्रगतिशील किसानों से भी बात की।

अच्छी प्रजाति के लगाए जाते हैं बीज

केवीके के प्रभारी डा. सत्यपाल सिंह ने कहा कि केंद्र पर किसानों को आधुनिक खेती के बारें में प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट और इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना संचालित किया जा रहा है। फार्म हाउस पर धान, केला और सब्जियों की अच्छी प्रजाति के बीज लागए गए हैं। यहां प्रशिक्षण लेने वाले किसानों को मशरुम, बागवानी, पशुपालन और उद्यान लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

पराली का करें निस्तारण

कुलपति डा. विजेंद्र सिंह ने कहा कि‌ किसानों की आय बढ़ाने में कृषि विविधिकरण का मत्वपूर्ण योगदान होता है। वायु प्रदुषण रोकने के लिए किसानों को पराली जलाने के बजाय उसका निस्तारण करना चाहिए। धान की कटाई के बाद खेत में पराली को डीकंपोज करने के लिए हैप्पी सीडर और जीरो टिलेज मशीन से गेहूं बीज की बुवाई करें। विश्व विद्यालय से भी कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसमें चंदौली के किसान भी शामिल हैं। जिससे उन्हें आधुनिक खेती की जानकारी दी जा सके।

मशरुम की खेती के लिए लगेगी यूनिट

चंदौली जनपद की पहचान धान के कटोरे के रुप में विख्यात है। यहां सामान्य धान की फसलों के अलावा ब्लैक राइस(काला धान) की खेती होती है। जो एक प्रकार से औषधीय गुणों से भरपूर है। इसकी डिमांड देश-विदेश से होती है, लेकिन अब चंदौली के किसानों को मशरुम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए केवीके में एक मशरुम उत्पादन यूनिट की स्थापना होगी।

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