स्कूल को लिखी चिट्‌ठी में कैप्टन वरुण का शौर्य पढ़िए:आर्मी स्कूल के प्रिंसिपल को लिखा था- औसत दर्जे का होना भी ठीक होता है

देवरिया6 महीने पहले
तमिलनाडु के कुन्नूर में CDS बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर क्रैश में एकमात्र जिंदा बचे भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह- फाइल

तमिलनाडु के कुन्नूर में CDS बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर क्रैश में एकमात्र जिंदा बचे भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह इस समय अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं। शौर्य चक्र से सम्मानित होने के बाद ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने अपने स्कूल के प्रिसिंपल को एक चिट्ठी लिखी थी। इस चिट्ठी में छात्रों से कहा था कि औसत दर्जे का होना ठीक होता है।

बता दें कि हरियाणा के चंडी मंदिर में स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल से ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने पढ़ाई की थी। स्कूल के प्रिंसिपल को 18 सितंबर 2021 को लिखे एक पत्र में उन्होंने एक छात्र के रूप में अपने जीवन के बारे में बताते हुए लिखा कि औसत दर्जे का होना ठीक है। हर कोई स्कूल में पढ़ने में तेज नहीं होता। हर कोई 90 प्रतिशत स्कोर नहीं कर पाता। यदि आप ऐसा करते हैं तो यह एक अद्भुत उपलब्धि है और इसकी सराहना की जानी चाहिए।

आप जो कर सकते हैं, उसमें बेस्ट करें
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने आगे लिखा था, अगर ऐसा नहीं होता है तो यह मत सोचिए कि आप औसत दर्जे के हैं। आप स्कूल में औसत दर्जे के हो सकते हैं, लेकिन यह जीवन में आने वाली चीजों का कोई पैमाना नहीं है। अपनी हॉबी ढूंढें, यह कला, संगीत, ग्रॉफिक डिजाइन, साहित्य इत्यादि हो सकती है। आप जो भी काम करते हैं, समर्पित रहें, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। यह सोचकर कभी सोने मत जाओ कि मैं और प्रयास कर सकता था।

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह द्वारा अपने स्कूल के प्रिसिंपल को लिखा गया लेटर।
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह द्वारा अपने स्कूल के प्रिसिंपल को लिखा गया लेटर।

मुश्किल से 12वीं क्लास में फर्स्ट डिवीजन मिला
अपने बारे में चिट्ठी में ग्रुप कैप्टन लिखते हैं कि मैं बहुत ही औसत छात्र था, जो मुश्किल से 12वीं क्लास में फर्स्ट डिवीजन हासिल की थी। इसके बावजूद मैंने 12वीं क्लास में अपने अनुशासन में किसी भी तरह की कमी नहीं आने दी। मैं खेल और अन्य एक्टिविटीज में भी एवरेज था, लेकिन मुझमें एयरप्लेन और एविशन को लेकर पैशन था। मैंने दो बार एयरोनॉटिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया क्विज में अपने स्कूल का प्रतिनिधित्व किया। हम लोग उस प्रतियोगिता में एक बार सेकंड और एक बार थर्ड पोजिशन पर आए थे।

अपना दिमाग और दिल लगा दूं तो अच्छा कर सकता हूं
वह लिखते हैं कि कैसे एक युवा कैडेट के रूप में उनमें आत्मविश्वास की कमी थी। एक लड़ाकू स्क्वाड्रन में एक युवा फ्लाइट लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन के बाद मुझे एहसास हुआ कि अगर मैं अपना दिमाग और दिल लगा दूं तो मैं अच्छा कर सकता हूं। मैंने उस सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए काम करना शुरू कर दिया, जो मैं केवल यह सुनिश्चित करने के विरोध में कर सकता था कि मैं पास होने के लिए जरूरी मानक हासिल कर सकता हूं।

पत्र में उन्होंने आगे लिखा है, 'राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में एक कैडेट के रूप में उन्होंने पढ़ाई या खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं किया। जब मैं एएफए पहुंचा तो मुझे एहसास हुआ कि विमानों के लिए मेरे जुनून ने मुझे अपने साथियों पर बढ़त दी है। फिर भी मुझे अपनी वास्तविक क्षमताओं पर भरोसा नहीं था।

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह द्वारा अपने स्कूल के प्रिसिंपल को लिखा गया लेटर।
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह द्वारा अपने स्कूल के प्रिसिंपल को लिखा गया लेटर।

तेजस की भीषण दुर्घटना टाली
पत्र में उन्होंने जिक्र किया था कि पिछले साल वह एक तेजस विमान उड़ा रहे थे, जिसमें एक बड़ी तकनीकी खामी आ गई थी, लेकिन उन्होंने अपने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए उड़ान के बीच एक भीषण दुर्घटना को टाल दिया, जिसके लिए उन्हें अगस्त में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह ने पत्र में खुद को मिले शौर्य चक्र का श्रेय स्कूल को देते हुए लिखा था कि वह इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का श्रेय स्कूल, एनडीए और उसके बाद वायु सेना में वर्षों से जुड़े सभी लोगों को देते हैं। मैं यह मानता हूं कि उस दिन किया गया काम मेरे शिक्षक, प्रशिक्षकों और साथियों द्वारा संवारने और सलाह देने का परिणाम था।

देवरिया के रहने वाले हैं वरुण सिंह
ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया के कन्हौली गांव के रहने वाले हैं। इस समय वरुण सिंह तमिलनाडु के वेलिंगटन में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के डायरेक्टिंग स्टाफ हैं। वरुण सिंह के पिता कर्नल केपी सिंह भी सेना से रिटायर्ड हैं। इस समय वरुण सिंह का बंगलुरु के मिलिट्री अस्पताल में इलाज चल रहा है।

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