गर्मी में गहरी जुताई से बढ़ेगी खरीफ की पैदावार:देवरिया में कृषि रक्षा अधिकारी ने कहा- आमदनी बढ़ाना है तो किसान खेत की गहरी जुताई करें

देवरिया5 महीने पहले
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देवरिया में गर्मी के मौसम में खेतों की गहरी जुताई से फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया, आई.पी.एम अर्थात इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट एक ऐसी विधा है, जिसमें भौतिक, यांत्रिक, जैविक विधियों का प्रयोग कर एवं रासायनिक आदि तत्वों के कम से कम प्रयोग द्वारा उत्पादन लागत कम कर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इसके साथ ही सस्टेनेबल कृषि को बढ़ावा दिया जाता है।

रबी फसलों की कटाई के बाद खेत खाली हो जाते हैं और खरीफ की फसल की बुआई की तैयारी शुरू हो जाती है। गर्मी में खेतों की गहरी जुताई करना बेहद फायदेमंद है। तेज धूप में जुताई के बाद पलटी मिट्टी से खरपतवार अवशेष हानिकारक कीड़े, अंडे, लार्वा आदि नष्ट हो जाते हैं। खरपतवार, फसल अवशेष सड़कर खाद बन जाते हैं, जिससे अगली खरीफ फसल लाभान्वित होती है और लागत में भी कमी आती है। बारिश का पानी भी खेतों में गहराई तक पहुंचता है, जिससे नाइट्रोजन आदि तत्वों की वृद्धि होती है।

खरीफ फसल की बुआई से पूर्व ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई बहुत जरूरी है। गहरी जुताई से नीचे की मिट्टी ऊपर आ जाती है। भुरभुरी हो जाती है। इससे बारिश का पानी मिट्टी की गहराई तक पहुंचता है और पानी की कमी पूरा करता है। खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है। गहरी जुताई से मिट्टी के अंदर छिपे हानिकारक कीड़े-मकोड़े उनके अंडे, लार्वा, प्यूपा आदि ऊपर आकर धूप से मर जाते हैं। खरपतवार के बीज, आदि भी ऊपर आकर सूर्य की तीव्र किरणों की गर्मी से नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी के अंदर के रोगकारक जीवाणु कवक, निमेटोड, सूक्ष्म जीव भी मर जाते हैं।

फसल अवशेष खरपतवार पानी के संपर्क में आकर और थोड़ी यूरिया से सड़ कर खाद में बदल जाते हैं। इससे किसानों को कम खाद का प्रयोग करना पड़ता है और मिट्टी का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। मिट्टी में वायु संचार बढ़ जाता है, जिससे उपलब्ध ऑक्सीजन में खरपतवार नाशी, कीटनाशी रसायनों के विषाक्त अवशेष और पूर्व फसलों की जड़ों द्वारा मुक्त हानिकारक रसायन समाप्त हो जाता है। वायु संचार बढ़ने से फसलों की जड़ों का विकास अच्छा होता है। इस प्रकार लाभप्रद खेती के लिए खेतों की गहरी जुताई बहुत जरूरी है।