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सरकार की अनदेखी से देवरिया की मिठास गायब:चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जिले में 4 मिलें हो गई बंद, अब सिर्फ एक चल रही है

देवरिया4 महीने पहले
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चीनी मिलों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन सरकार की अनदेखी से एक-एक कर चीनी मिलें बंद हो गईं। - Dainik Bhaskar
चीनी मिलों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन सरकार की अनदेखी से एक-एक कर चीनी मिलें बंद हो गईं।

एक वक्त था, जब देवरिया को चीनी का कटोरा कहा जाता था। प्रदेश में सबसे ज्यादा चीनी मिलों वाला जिला देवरिया ही था। गन्ने की खेती किसानों के लिए वरदान हुआ करती थी। चीनी मिलों से हजारों लोगों को रोजगार मिलता था, लेकिन सरकार की अनदेखी से एक-एक कर चीनी मिलें बंद हो गईं। साथ ही जिले से चीनी की मिठास भी गायब हो गई। वहीं, किसानों ने भी गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया। अब गिने-चुने किसान ही गन्ने की खेती कर रहे हैं। सरकारों की उपेक्षा के चलते चीनी मिलें अपना अस्तित्व खो चुकी हैं।

जिले की पांच मिलों में से इस समय सिर्फ एक चीनी मिल (प्रतापपुर) लड़खड़ाते हुए चल रही है। बाकी चारों मिलें बंद गई हैं। बसपा सरकार में प्रदेश की 6 मिलों को बेच दिया गया। इसमें भटनी चीनी मिल भी शामिल थी। चुनावी मौसम में भटनी चीनी मिल के आस-पास के किसान और कर्मचारी एक बार फिर नेताओं और सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं। इलाके के लोगों की लंबे समय से मांग है कि मिल को फिर से चालू किया जाए।

आजादी के पहले हुई थी भटनी चीनी मिल की स्थापना

आजादी के पूर्व 1919 में नूरी मियां ने भटनी नगर के नूरीगंज में चीनी मिल की स्थापना की, लेकिन यह 1921 में चालू हुई। बाद में इस चीनी मिल को कस्टोडियन ने ले ली और 1956 में मोतीलाल पदमपद को नीलाम कर दिया। बाद में इसे उप्र राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लिमिटेड ने अधिग्रहित कर लिया।

भटनी चीनी मिल 2006-07 में चलाकर बंद कर दी गई। मायावती सरकार में भटनी की चीनी मिल को 28 मार्च 11 को महज पौने पांच करोड़ रुपये में हनीवेल शुगर्स प्रा.लिमिटेड नई दिल्ली को बेंच दिया गया। इसकी जमीन की कीमत पचास करोड़ रुपये से अधिक और उसके उपकरणों की कीमत 60 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। चीनी मिल की कुल जमीन 13.837 हेक्टेयर के 2.77 हेक्टेयर हिस्से पर नूरीगंज बाजार बसा है।

सरकार की अनदेखी से जिले की पांच चीनी मिलें बंद हो गईं।
सरकार की अनदेखी से जिले की पांच चीनी मिलें बंद हो गईं।

पौने पांच करोड़ में बेंच दी अरबों की प्रॉपर्टी

जिस चीनी मिल से कभी हजारों लोगों की रोजी रोटी चलती थी, आज वही चीनी किसी भूतहा खण्डहर की तरह दिखता है। करोड़ो की लागत के उपकरण खराब हो रहे है। अरबों रुपये की प्रॉपर्टी को बसपा सरकार ने महज पौने पांच करोड़ में हनीवेल शुगर्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया।

डेढ़ साल से बाकी कर्मचारियों का वेतन

बिक चुकी चीनी मिल पर कम्पनी द्वारा सिक्योरिटी गार्ड, गनमैन, सुपरवाइजर सहित पांच कर्मचारियों का वेतन करीब डेढ़ साल से बाकी है ।बन्द पड़े मिल पर तैनात हँसनाथ तिवारी ने बताया की जिस कम्पनी ने चीनी मिल खरीदी है उसी ने हम लोगो को मिल के देख रेख के लिए यहां रखा हुआ है लेकिन डेढ़ वर्षों से वेतन न मिलने से भुखमरी का संकट आ गया है। 5 महीने पूर्व लेबर कोर्ट में मुकदमा कर हम लोगो ने वेतन की गुहार लगाई है ।

शुगर कॉम्प्लेक्स के स्थापना की मांग

भटनी चीनी मिल को पूर्ववर्ती सरकार द्वारा औने पौने दामों पर बेचने के बाद यह मुद्दा काफी गरमा गया ।भटनी चीनी मिल किसान संघर्ष समिति द्वारा भटनी चीनी मिल चालू करने की मांग को लेकर कई बार धरना प्रदर्शन किया गया। संघर्ष समिति के संयोजक योगेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि भटनी चीनी मिल नीलामी दोषपूर्ण थी ।इसे औने पौने दामों पर बेच दिया गया ।ईडी ने अपनी जांच में नीलामी प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताया है।

योगेंद्र उपाध्याय कहते है की सरकार से मांग है की चीनी मिल के पास पर्याप्त जमीन है। इसमें आधुनिक चीनी मिल की स्थापना की जाए। आधुनिक चीनी मिल स्थापित हो जाने से किसानों को की आय बढ़ जाएगी और लोगों को रोजगार मिलेगा।

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