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  • Phoolmata Devi Is Sitting In The Middle Of The Pond In Devriya: The Temple Is Built In The Palace Of The Malla Dynasties, Devotees Used To Swim And Go For Darshan; Pond Was Built To Prevent Marriage Disturbance

देवरिया में तालाब के बीच विराजमान हैं फूलमती माता:मल्ल राजवंशजों के महल में बना है मंदिर, पहले तैरकर दर्शन को जाते थे श्रद्धालु; शादी के विघ्न को रोकने के लिए बनाया था तालाब

देवरिया10 दिन पहले
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देवरिया में मुख्यालय से 45 किमी दूर भागलपुर विकास खण्ड के धर्मेर गांव में विशाल तालाब के बीच महल में फूलमती माता का मंदिर है। यह मझौलीराज राज परिवार के वंशजों के कुल देवी का मंदिर है। वैसे तो पूरे साल इस मंदिर पर श्रद्धालु आते रहते हैं, लेकिन नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की ज्यादा भीड़ रहती है। क्षेत्र के लेकर दूर दराज व बिहार सहित अन्य प्रांतों के भी श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।

यह है मान्यता

सैकड़ों साल पहले मझौलीराज पर दुखहरन मल्ल का शासन हुआ करता था। राजा को जब संतान के रूप में पुत्री हुई तो उन्होंने ज्योतिषियों से उनके भविष्य के बारे में पूछा। ज्योतिषियों ने राजा को बताया की राजकुमारी के विवाह के समय एक शेर द्वारा इनके पति का प्राणान्त कर दिया जाएगा। पुत्री के भविष्य को लेकर चिंतित राजा ने धर्मेर गांव के महल के आसपास एक विशालकाय तालाब खुदवा कर उसमें पानी भरवा दिया। जिससे विवाह के समय कोई भी जानवर महल के अंदर न आने पाए।

पिंडी रूप में विराजमान में हैं देवी।
पिंडी रूप में विराजमान में हैं देवी।

देवी के पिंडी रूप की पूजा होती है

मान्यता है की राज कुमारी के विवाह के दौरान ही महल में अचानक से शेर प्रकट हुआ। शेर ने राजकुमारी के होने वाले पति का प्राणान्त कर दिया। जिसके बाद राजकुमारी भी यहीं पर सती हो गईं। कालांतर में यह महल खंडहर में तब्दील हो गया। महल के खंडहर पर ही देवी की पिंडी रूप की पूजा की जाती है। बाद में मझौलीराज परिवार के धर्मेर में रहने वाले वंशजों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी मांगा जाए, वह कभी खालीं नही जाता।

तालाब के बीच में होने के कारण यह मंदिर अपनी अद्वितीय मनमोहक दृश्य के कारण भी श्रद्धालुओं में आकर्षण का केंद्र है।
तालाब के बीच में होने के कारण यह मंदिर अपनी अद्वितीय मनमोहक दृश्य के कारण भी श्रद्धालुओं में आकर्षण का केंद्र है।

तालाब तैरकर दर्शन करने जाते थे श्रद्धालु

मंदिर के चारों तरफ विशाल तालाब होने के कारण पूरे साल इसमें पानी भरा रहता है। 15 साल पहले तक देवी दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को तैरकर मंदिर तक जाना पड़ता था। बाद में यहां पोखरे के बीच से सड़क का निर्माण करा दिया गया है। तालाब के बीच में होने के कारण यह मंदिर अपनी अद्वितीय मनमोहक दृश्य के कारण भी श्रद्धालुओं में आकर्षण का केंद्र है।

मझौलीराज परिवार के धर्मेर में रहने वाले वंशजों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।
मझौलीराज परिवार के धर्मेर में रहने वाले वंशजों ने यहां मंदिर का निर्माण कराया।
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