राम-सीता विवाह का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु:रुद्रपुर सिद्धेश्वर धाम में सप्तदिवसीय रामकथा का हुआ समापन, सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया भाग

रुद्रपुर (देवरिया)5 महीने पहले
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क्षेत्र के सिधौना में सिद्धेश्वर धाम स्थित है। यहां पर सप्तदिवसीय रामकथा चल रहा है। बुधवार रात कथा के अंतिम दिन राम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया गया। कथावाचक शशिकांत महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम एक आदर्श राजा, आज्ञाकारी पुत्र और आदर्श पति होने के साथ ही प्रबल योद्धा भी थे।

आधुनिकता के विविध रंगों का समावेश है
वाल्मिकि रामायण के आदिकाव्य में रामकथा के प्रथम गान होने के बाद तुलसीदास द्वारा रामचरितमानस ने रामकथा को जनसाधारण में अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया। इसमें भक्ति भाव की प्रधानता है। साथ ही राम का ईश्वरत्व पूरी तरह उभर आता है। सीता-राम का विवाह प्रसंग पढ़ने सुनने एवं भक्ति रस का आस्वाद लेने में अत्यंत मधुर हैं। सीता मैया के अवतरण से लेकर विवाह तक के प्रसंगों में आध्यात्मिकता, भावनात्मकता एवं आधुनिकता के विविध रंगों का समावेश है।

संत राममिलन पाठक ने कहा कि श्रीराम शक्ति, शील और सौंदर्य की प्रतिमूर्ति हैं। अवध को राम ने शील से जीता, जनकपुरी को सौंदर्य और लंका को शक्ति से जीता था। नरलीला की पूर्णता के लिए अभिन्न सीता एवं राम लौकिक दृष्टि से कुछ समय के लिए भिन्न भी हो जाते हैं। सीता और राम का विवाह लोक नीति से संपन्न हुआ है। जिसमें इच्छा स्वयंवर, प्रण स्वयंवर, लौकिक रीति और शास्त्रीय विधि विधान का अद्भुत समन्वय है। रामकथा में आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे। शाम को भंडारे का प्रसाद भी बांटा गया।

कथावाचक शशिकांत महाराज ने श्रीराम के बताए गुण।
कथावाचक शशिकांत महाराज ने श्रीराम के बताए गुण।

बताया कि भगवान राम जब रावण को मारकर अयोध्या वापस आए तो अयोध्यावासियों ने उनका बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया। अयोध्यावासियों ने फूल वर्षा कर व घर में उत्सव मनाकर घी के दिए जलाकर राम, लक्ष्मण और सीता का स्वागत किया। कहा कि श्रीरामचंद्र के राज्याभिषेक में समस्त ब्रह्मांड के देवी देवता पधारे थे। सभी ने राम को राजा बनते देखकर अपार हर्ष व्यक्त किया था।

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