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एटा में संविदा कर्मियों की हड़ताल:मांगों को लेकर तीसरे दिन किया प्रदर्शन, कोराना टीकाकरण और जांच प्रभावित

एटा2 महीने पहले
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अपनी मांगों को लेकर संविदा कर्मियों ने प्रदर्शन किया। - Dainik Bhaskar
अपनी मांगों को लेकर संविदा कर्मियों ने प्रदर्शन किया।

एटा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों की तीसरे दिन हड़ताल से कोरोना टीकाकरण और जांच का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। इस दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं चालू रखी गई हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से खासा परेशान हैं। वो बातचीत के जरिये कोशिश में जुटा है कि किसी तरीके से ये हड़ताल समाप्त हो और कोरोना टीकाकरण, जांच और सर्विलांश का काम पुनः चालू हो।

सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस हड़ताल से प्रतिदिन होने वाले कोरोना टीकाकरण में हड़ताल के चलते 50 फीसदी की कमी आयी है। हड़ताल के पूर्व रोजाना 15,18,20 हजार कोरोना वैक्सीन प्रतिदिन लग रहीं थीं, जो कि हड़ताल के बाद दो दिन से 8,9,10 हजार तक पहुंच गई है।

परमानेंट स्टाफ पर ओमिक्रॉन रोकने की जिम्मेदारी

सीएमओ ने बताया कि ओमिक्रोन से निपटने के लिए हमने परमानेंट स्टाफ को लगा दिया है। जो शासन के आदेश प्राप्त हुए हैं उनके अनुसार बस स्टैंड पर हमें टीम लगानी है। सैंपलिंग करनी है, वो हमने लगा दी है और वो लागू हो जाएगा। जो विदेशों से लोग आ रहे हैं उनकी हम टेस्टिंग करते हैं और टेलीफोन से वार्ता भी करते हैं। ये हमारा परमानेंट स्टाफ कर रहा है।

सीएमओ बोले- जल्द हड़ताल खत्म होगी

उन्होंने स्वीकार किया कि मैन पावर कम है तो हड़ताल से असर तो पड़ता ही है। ये हड़ताली लोग जल्दी ही वापस आ जाएंगे। इनसे वार्ता चल रही है। हड़ताली कर्मचारियों ने के आरोप कि प्राशासन, शासन और सीएमओ दवाब बनाकर हड़ताल तुड़वाना चाहते है के जवाब में उन्होंने कहा कि प्राशासन और हम लोग बातचीत कर रहे हैं अगर उसको दूसरे रूप में लिया जाता है तो वो गलत है।

कर्मचारी बोले- मांगे न मानने तक होगा प्रदर्शन

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रविन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि हमारी 8 मांगे हैं जिनको सरकार को बताया है लेकिन हमारी मांगों पर अब तक शासन, प्राशासन की कोई बात नहीं हुई। उन्होंने बताया कि डीएम, सीएमओ व अन्य विभागों द्वारा दवाब बनाया जा रहा है कि धरना, हड़ताल खत्म किया जाए लेकिन जब तक हमारी मांगे पूरी नही होंगी हम पीछे नही हटेंगे। इमरजेंसी सेवा छोड़कर सारी सेवाएं बाधित हैं। अगर शासन प्राशासन हमारी मांगे नहीं मानेगा तो हम सारी सेवाएं बाधित कर देंगे।

करीब 600 संविदाकर्मी हैं

संविदा कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री अतुल भदौरिया ने बताया कि हम लोगों पर धरना वापस लेने के लिए दवाब बनाया जा रहा है। पूरे जनपद में 600 के आसपास एनएचएम संविदा कर्मचारी हैं। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी पूरी तरह से हड़ताल पर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि संविदा कर्मचारियों की वेदना को समझें, पूर्व में हमें नियमित, समायोजित करने और हक दिलाने का आश्वासन दिया गया था।

क्या है मामला?

जिले में पिछले तीन दिनों से 8 सूत्रीय मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के नेशनल हेल्थ मिशन के लगभग 600 से अधिक संविदा कर्मी डॉक्टर, एएनएम, जीएनएम, फार्मासिस्ट, कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर, स्टाफ नर्स, प्रोग्राम मैनेजर, लेखा विभाग के समस्त संविदा कर्मियों ने सीएमओ आफिस पर धरना प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरे दिन अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बने हुए हैं।

ये हैं मांगें

संविदा कर्मचारियों की 8 सूत्रीय मांगों में विनियमितिकरण और समायोजन, वेतन विसंगतियों को दूर करने, जॉब सिक्योरिटी, रिक्त, म्युचुअल ट्रांसफर पर ट्रांसफर करने, आउट सोर्स की नीति को खत्म करने,कर्मचारियों का बीमा करवाने, आयुष्मान भारत योजना का लाभ देने, आशा आशा बहुओं को एक नियत मानदेय देने की मांगें शामिल हैं।