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यूपी बार काउंसिल ऑफ के चेयरमैन प्रशांत सिंह पहुंचे एटा:कहा- केसो की बढ़ती पेंडेंसी के लिए जज, वकील और प्राशासन जिम्मेदार

एटा10 दिन पहले
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उत्तर प्रदेश के चीफ स्टैंडिंग काउन्सिल और बार काउन्सिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के सदस्य ने उठाये जजों की नियुक्तो के कॉलेजियम सिस्टम पर सवाल अदालतों में केसो की पेंडेंसी कम करने को वकीलों,न्यायाधीशों और प्रशाशन को मिलकर रास्ता निकालना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए किए जाने वाले अनेकों कार्य बताए।

बार काउंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के को चेयरमैन और उत्तर प्रदेश के चीफ स्टैंडिंग काउंसिल प्रशांत सिंह अटल ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार और बार कौंसिल के सहयोग से हम लोगों ने अधिवक्ताओं की बेहतरी के लिये तमाम काम किए हैं। उन्होंने जजों की नियुक्ति के लिये कॉलेजियम सिस्टम की खामियों पर सरकार और न्यायपालिका को मिलकर काम करना चाहिए।

अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए बहुत से काम किए गए
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए बहुत से काम किए गए हैं। पहले 60 साल तक मृत्यु पर अधिवक्ताओं को 5 लाख मिलते थे, अब ये 70 साल तक कर दिया गया है। आजाद भारत में सर्वाधिक पैसा इस दौरान वकीलों को दिया जाता है।

करीब 91 करोड़ रूपया मृतक अधिवक्ताओं के परिवार वालों को दिए जा चुके हैं
करीब 91 करोड़ रूपया हम लोग मृतक अधिवक्ताओं के परिवार वालों को दे चुके हैं। हमें ख़ुशी है कि कोरोना काल में भी जिन अधिवक्ताओं का देहांत हुआ उन्हें भी बड़ी संख्या में हम दे पाए हैं, जो बच्चे हुए हैं उनके लिए लगातार हम लोग प्रयासरत हैं कि उनको भी दें। नए अधिवक्ताओं को 5/5 हजार रूपया कॉपी किताब और स्टेशनरी के लिए दिया जा रहा है।

अधिवक्ता कल्याण निधि को बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है
अधिवक्ता कल्याण निधि जो पहले डेढ़ लाख थी, उसको अब बढाकर 5 लाख कर दिया गया है। 400 करोड़ रुपये विभिन्न जनपदों में हाथरस, शामली, अमेठी जहां किराए पर जनपद न्यायाधीश के कक्ष थे, ऐसे कई जनपदों में जनपद न्यायाधीश का कक्ष बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने दिया है। इसके अतिरिक्त अधिवक्ताओं के चैम्बर निर्माण के लिये भी पैसा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश बार काउन्सिल ने नए अधिवक्ताओं के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को और आसान किया है।

हाई कोर्ट के जजों की कमी
जब उनसे पूछा गया कि न्यायालयों में केशों की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है, तो उन्होंने इसका कारण जजों की कमी को बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 160 हाई कोर्ट के जज हैं, जिनमें से 60 के स्थान रिक्त हैं। छोटे छोटे मुकदमो में कार्यपालिका की कमी के कारण प्रत्यावेदन समय से नहीं बन पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेंडेंसी के लिये केवल जज या वकील ही जिम्मेदार नहीं हैं, प्रशासन भी इसके लिये जिम्मेदार है। प्रशासन को चाहिए कि लिटिगेशन कम से कम हों। हम लोगों ने तय किया है कि उत्तर प्रदेश की कचहरियों में कम से कम हड़ताल हों, जिससे पेंडेंसी कम हों सके।

इस पर उन्होंने कहा कि इस दिशा में राष्ट्रपति और विधि मन्त्री ने भी कहा है मुझे लगता है कि कॉलेजियम सिस्टम में यदि कोई खामियां हैं तो सरकार और न्यायपालिका को साथ मिलकर के इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम सिस्टम में यदि कोई खामी है जिसपर आवाज उठायी है कानून मन्त्री जी ने तो मिल बैठकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि जजों को रिटायरमेंट के बाद सरकार विभिन्न आयोगों में अध्यक्ष बनाकर भेज देती है ये राज्य सभा भेज देती है, जिससे उनपर उगलियां उठती हैं तो उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नियुक्तियों में 50 फीसदी स्थान ट्रिब्यूनल्स में अधिवक्ताओं से भरने चाहिए चाहे कैट हों या सैट हों जिससे स्पीडी जस्टिस मिल सकेगा।