एटा में नदी में कूदी किशोरी का नहीं चला पता:पूरी रात PAC फ्लड यूनिट ने चलाया सर्च ऑपरेशन, बड़ी बहन से बोली थी-पता नहीं मैं कहां हूं

एटा2 महीने पहले
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एटा जनपद के बागवाला थाना क्षेत्र में काली नदी में छलांग लगाने वाली 17 साल की कल्पना का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। रातभर पीएसी की तृतीय फ्लड टीम के गोताखोर और स्थानीय गोताखोर कल्पना को नदी से बरामद करने की जद्दोजहद में लगे रहे, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

24 घंटे से अधिक का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद भी ऑपरेशन जारी है। बागवाला थाना के इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह ने मौके से बताया कि लगातार रेस्क्यू ऑपेरशन जारी है। एटा के सीओ सिटी राजकुमार सिंह ने भी रात में मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग की थी।

मां बोलीं- ताई के घर जाने के बहाने गई थी बेटी

17 साल की कल्पना की मां संतोष ने रोते हुए बताया, " हमें नहीं मालूम कि बेटी ने क्यों काली नदी में छलांग लगा दी। कल सुबह बेटी ने बेसन-चावल बनाये थे। कह रही थी कि पापा को ये बहुत पसंद है। उसके बाद बोली कि ताई जी बुला रहीं है। ताई के घर पर तेरहवीं थी।

इतना कहकर कल्पना पड़ोस में ताई के यहां चली गयी। उसके बाद एक दो घंटे तक नहीं आयी तो लगा ताई बीमार हैं तो डॉक्टर के यहां दवा दिलाने गई होगी। लेकिन फिर भी मैंने वहां पाता किया। वहां बताया गया कि कल्पला वहां पहुंची ही नहीं।"

सीओ ने रात को काली नदी में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनीटरिंग की।
सीओ ने रात को काली नदी में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनीटरिंग की।

बड़ी बहन से कहा-पता नहीं मैं कहां हूं

मां संतोष के मुताबिक, मेरी बड़ी बेटी बिट्टा का दिल्ली से कल्पना के पास फोन गया कि मम्मी से बात करवा दो तो कल्पना ने बड़ी बेटी को बताया कि हमें नहीं पता कि हम कहां हैं, और मम्मी कहां हैं?

रात को काली नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान परिवार और गांव के लोग भी मौके पर मौजूद रहे।
रात को काली नदी में रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान परिवार और गांव के लोग भी मौके पर मौजूद रहे।

बड़ी बेटी ने बताया तो हुई अनहोनी की आशंका

संतोष बताती हैं ," बड़ी बेटी ने पड़ोस में फोन कर मुझसे बात की तो बताया कि कल्पना कह रही है कि हमें नहीं पता हम कहां हैं। इसके बाद मुझे चिंता हुई तो कल्पना के पापा को खबर की और फिर हम लोगों ने बेटी को ढूंढ़ना शुरू किया। सब जगह ढूंढ़ा पर कहीं नहीं मिली। गांव वाले भी ढूंढ़ने लगे। बाद में पता चला कि कल्पना ने काली नदी मे छलांग लगा दी है। मुझे कुछ नहीं पता कि बिटिया ने ऐसा क्यों किया।"

पड़ोसी बोले- 9 बजे दिखी थी कल्पना

कल्पना के पड़ोस में रहने वाले रघुराज बताते हैं, " सुबह करीब 9 बजे कल्पना अपने घर में ये कहकर गयी थी कि परिवार के ही ताऊ के घर जा रही है। ताऊ के घर में अनिल नाम के लड़के की मौत हो गयी थी ,जिसकी कल तेरहवीं थी। परिवार की बात थी इसलिए एक दो घंटे तक किसी ने गौर नहीं किया। इसी बीच कल्पना की बड़ी बहन बिट्टी की कॉल घर पर आई तो शक हुआ और उन्होंने कल्पना को ढूंढ़ना शुरू किया। बाद में बताया गया कि कल्पना ने काली नदी में छलांग लगा दी है।"

कोरोना काल में चली गई थी पिता की नौकरी

रघुराज ने बताया, "कल्पना के पिता रामवीर दिल्ली में प्राइवेट कम्पनी में गार्ड की नौकरी करते थे। कोरोना के दौरान लॉक डाउन में नौकरी छूट गयी तो गांव आ गए। गांव मे 4-5 बीघा खेती है, जिससे घर का गुजारा होता है।

5 भाई-बहनों में सबसे छोटी थी कल्पना

कल्पना 5 भाई-बहन हैं। सबसे बड़ा भाई प्रमोद दिल्ली में प्राइवेट कम्पनी में गैस सप्लाई का काम करता है। उससे छोटा अवधेश और उससे छोटा विजय दिल्ली में ही प्राइवेट कम्पनी में नौकरी करते हैं। कल्पना घर में सबसे छोटी थी।

भाई भी दिल्ली में करते हैं नौकरी

बड़ी बहन बिट्टा की भी शादी दिल्ली मे हुई है और वह दिल्ली में ही रहती है। गांव में पढ़ाई का साधन न होने के कारण ये सभी बच्चे 10वीं कक्षा तक ही पढ़े हैं। मां का और परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है।

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