चकरनगर में प्रवासी पक्षियों के बारे में किया जागरूक:वन क्षेत्राधिकारी ने कहा, पर्यावरण प्रदूषण के चलते विलुप्त हो रहे पक्षी

चकरनगर5 दिन पहले
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विश्व प्रवासी पक्षी दिवस के मौके पर चकरनगर में शनिवार को सामाजिक वानिकी प्रभाग रेंज एवं सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर यानी स्कॉन के संयुक्त तत्वावधान में पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय में जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान प्रवासी पक्षियों से जुड़े कई मुद्दों के बारे में लोगों को जागरूक किया गया।

मई और अक्टूबर के दूसरे शनिवार को मनाया जाता है विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

गोष्ठी को संबोधित करते हुए स्कॉन सचिव वन्यजीव विशेषज्ञ संजीव चौहान ने कहा कि विश्व प्रवासी पक्षी दिवस हर साल मई और अक्टूबर के दूसरे शनिवार को मनाया जाता है।इस साल यह 14 मई को मनाया जा रहा है। विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य प्रवासी पक्षियों के बारे में जागरूकता पैदा करना है और उनके आवासों, विशेष रूप से आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाता है।

रात में पक्षियों के लिए रोशनी कम करना है वार्षिक थीम

उन्होंने बताया कि हर साल विश्व प्रवासी पक्षी दिवस एक वार्षिक थीम प्रस्तुत करता है। जिसका उद्देश्य प्रवासी पक्षियों को प्रभावित करने वाले मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके संरक्षण के लिए दुनिया भर के लोगों और संगठनों को संरक्षण हेतु प्रेरित करना होता है। इस वर्ष की थीम प्रवासी पक्षियों पर प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव है तो वहीं इस साल का स्लोगन (नारा) रात में पक्षियों के लिए रोशनी कम करें।

घरों की छतों पर और बगीचों में भोजन-पानी की व्यवस्था करने की अपील की

वन क्षेत्राधिकारी चकरनगर शिव कुमार ने बताया पर्यावरण में प्रदूषण के कारण पक्षी विलुप्त होते जा रहे हैं। यदि अप्रबंधित पक्षियों को छोड़ दिया जाता है, तो वे भटक सकते हैं और सही मार्ग खो सकते हैं। यानी उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। इसके साथ ही हमें उनकी देखभाल पर ध्यान देना चाहिए और इनके लिए घरों की छतों पर और बगीचों में उन्हें पानी भोजन की व्यवस्था की जानी चाहिये।

प्रजनन करने व खुद को जिंदा रखने के लिए पक्षी करते हैं प्रवास

वन दरोगा सूर्यकान्त शुक्ला ने कहा कि प्रवासी पक्षी अपने बच्चों को पालने, प्रजनन करने या मौसम की मार से खुद को बचाने के लिए जब पक्षी सर्वोत्तम पारिस्थितिक परिस्थितियों एवं आवासों की खोज में सैकड़ों से हजारों किमी की दूरी पर उड़ान भरते हैं, तब इस प्रक्रिया को प्रवास कहा जाता है। कार्यक्रम में वन दरोगा संदीप कुमार यादव, प्रधानाध्यापक कुलदीप, विमल कुमार सिंह व अमरेश कुमार ने भी अपने विचार प्रकट किए।

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