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  • 1000 Cows Buried In Parauli Ramayan Gaushala Of Etawah: 15 Cows Died Every Day Due To Hunger, Dead Bodies Kept Rotting For Weeks, Burial Was Done After Insect Infestation

इटावा की गोशाला में भूख से मर रहीं गायें:2 दिन में 16 की मौत; हफ्तों तक सड़ती रही लाशें, कौए नोचते रहे मांस, अब जेसीबी से दफनाया जा रहा

इटावाएक महीने पहले
इटाला जिले में स्थित गोशाला में दो दिनों में 18 गोवंश की मौत हो चुकी है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का कहना है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए लेकिन उत्तर प्रदेश के इटावा में गायों की लापरवाही से जान जा रही है। यहां मरने वाली गायों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लाशों को जेसीबी से दफनाई जा रही हैं। पिछले 2 दिनों में 16 गोवंशों की मौत हो चुकी है। गोशाला रामायन में 12 गोवंश अभी भी बीमार हैं। दो दिन में इतनी अधिक संख्या में गोवंशों की मौत की खबर पाकर अफसरों ने गोशाला पहुंचकर मौका मुआयना किया। डॉक्टरों की टीम ने बीमार गोवंशों की जांच और इलाज किया।

गोशाला में ही दफन की जा रही लाशें
मामला बसरेहर ब्लॉक की परौली रामायन गोशाला का है। गाय का शव दफनाने वाले जेसीबी चालक रामपाल ने बताया कि तीन महीनों में वह एक हजार गोवंश दफना चुका है। शुक्रवार को ही उसने 10 गोवंश और गुरुवार को 8 दफनाए हैं। बताया कि यहां रोज गोवंश मर रहे हैं, कभी 10 तो कभी 15। वहीं, गोशाला के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि मौत के बाद गोवंश हफ्तों तक पड़े रहते हैं। शव को कौए नोचते रहते हैं। कीड़े लगने से जब उसकी दुर्गंध फैलती है, तब उनको दफना देते हैं।

मीडिया के पहुंचने की जानकारी मिलने पर बसरेहर ब्लॉक के अफसर टीम के साथ गोशाला पहुंच गए। गोशाला की व्यवस्थाओं को देखा। कर्मचारियों से बातचीत की। पशु चिकित्सक ने टीम के साथ गोवंश के शवों को पोस्टमार्टम किया। इसके बाद गोवंशों के शवों को परिसर में ही दफना दिया गया।

नगला हरी में स्थित रामायन गोशाला में ही मृत गायों को दफन किया जा रहा है।
नगला हरी में स्थित रामायन गोशाला में ही मृत गायों को दफन किया जा रहा है।
गड्‌ढा खोदकर गायों को गोशाला में ही दफन किया जा रहा है।
गड्‌ढा खोदकर गायों को गोशाला में ही दफन किया जा रहा है।

दलदल में रह रहे गोवंश, खाने को मिल रहा सूखा चारा

गोशाला में बने तालाब की मिट्टी का कटाव हो गया है। गोवंश उसी में फंस जाते हैं। इससे गोवंशों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गोशाला में पीछे की तरफ लगे टिन शेड के नीचे भी दलदल है। शुक्रवार की सुबह ताखा ब्लॉक से गोशाला पहुंचे पशु चिकित्सक डॉ. विजय कुमार बीमार गोवंशों का इलाज किया। उन्होंने बताया गोवंश पर्याप्त मात्रा में हरा चारा न मिल पाने से बीमार हो रहे हैं। गोशाला परिसर दलदल हो जाने से गोवंश उसमें फंस जाते हैं और बीमार पड़ जाते हैं।

जेसीबी के ड्राइवर ने कहा कि बीते तीन महीने से रोज 5 से लेकर 10 तक गोवंश को दफन कर रहा हूं।
जेसीबी के ड्राइवर ने कहा कि बीते तीन महीने से रोज 5 से लेकर 10 तक गोवंश को दफन कर रहा हूं।
गायों को दफनाने के लिए जेसीबी से कराई जाती है खोदाई।
गायों को दफनाने के लिए जेसीबी से कराई जाती है खोदाई।

भाजपा नेता ने सीएम से जांच की मांग की
भाजपा नेता मनीष यादव ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाए। जिलाधिकरी एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के खातों से महीनों तक गोवंश के भोजन के लिए पैसा रिलीज़ नहीं किया जाता है, जिससे भोजन के अभाव में गोवंश दम तोड़ रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष ने कहा कि सरकार की लापरवाही के चलते गोवंश की हत्या करने का काम किया जा रहा है।

अफसरों ने गोशाला का निरीक्षण किया।
अफसरों ने गोशाला का निरीक्षण किया।

सीवीओ बोले- आज नहीं तो कल मरेंगे ही गोवंश

चीफ वेटनरी ऑफिसर डॉ. विनीत पांडेय ने बताया कि गोवंशों की उम्रदराज होने की वजह से मौत हुई है। कुछ गोवंशों को ग्रामीणों ने छोड़ दिया था। उन्हें कमजोर अवस्था में गोशाला पहुंचा दिया गया। उनको हरा चारा दिया जा रहा है। इसके बाद भी उनका स्वास्थ्य नहीं सुधरता है, जिससे उनकी मौत हो रही है। गोवंश इतने कमजोर हैं कि वह आज नहीं तो कल मरेंगी ही।

बताया कि परौली गोशाला में 869 गोवंश संरक्षित हैं। ग्राम पंचायत स्तर से इसका संचालन किया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से 15 दिन पहले 10 लाख रुपए दिए गए थे। इससे पहले 39 लाख रुपए दिए जा चुके हैं। इसी कुल 49 लाख रुपए इसी महीने दिए जा चुके हैं। एक गाय के हिसाब से 30 रुपए प्रतिदिन दिए जा रहे हैं।

डॉक्टर ने बताया कि सूखा चार गोवंशों के गले में फंस जाता है जिसके चलते भी उनकी मौत हो जाती है।
डॉक्टर ने बताया कि सूखा चार गोवंशों के गले में फंस जाता है जिसके चलते भी उनकी मौत हो जाती है।

पंचायत सचिव दुर्विजय का कहना है कि गोशाला में गुरुवार को छह और शुक्रवार को दस गोवंशों की मौत हुई है। कुछ गोवंश बीमार हैं। जिन गोवंशों की मौत हुई है, वह उम्रदराज थीं। गोशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त मात्रा में भूसा, हरा चारा, दाना सब कुछ मौजूद है।

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