इटावा की गौशालाओं में भूसे की कमी:जिले में 114 गौशाला संचालित, प्रतिदिन 624 क्विंटल भूसे की जरूरत; 12 हजार से अधिक हैं गौवंश

इटावाएक महीने पहले
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इटावा में पहले सड़कों पर घूमने वाले अन्ना मवेशियों की हालत खराब थी और अब गौशाला जाकर भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही। यही कारण है कि भीषण गर्मी के मौसम में अधिकांश गौशालाओं में भूसे की व्यवस्था न होने से गौवंश की मुसीबत बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ दिनों में गौशालाओं में भूसे की समस्या खत्म करने के लिए जो प्रशासनिक प्रयास हुआ, उसके बल पर अधिकांश गौशालाओं में भूसा तो उपलब्ध हुआ, लेकिन पर्याप्त भूसा न होने से समस्या जस की तस सामने खड़ी है।

और तो और गर्मी, भूख व बीमारी के अस्वस्थ गौवंश गौशाला में छाया का पर्याप्त प्रबंध न होने पर बीमार व स्वस्थ मवेशी एक साथ रहने को मजबूर हैं। दोपहर की गर्मी में खुले आसमान के नीचे अपर्याप्त शेड के कारण मवेशियों को खुले में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि गौशालाओं में चारा, पानी व छाया के पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं।

जिले में शहरी व ग्रामीण इलाकों में 114 गौशाला संचालित हैं। पशु पालन विभाग का दावा हैं कि 1990 की पशु गणना के अनुसार उन्हें 10,841 अन्ना गोवंश का संरक्षण करना था, जबकि वर्तमान में इन गौशालाओं में 12,488 गोवंश को रखा गया है। साफ है कि इस समय 1,626 अन्ना गौवंश गौशालाओं में अतिरिक्त रखे गए हैं, जबकि गौशाला की क्षमता कम है।

गौशाला में मौजूद गौवंशों को हरा चारा तो छोड़िए खाने के लिए सूखा भूसा भी नहीं मिल पा रहा है।
गौशाला में मौजूद गौवंशों को हरा चारा तो छोड़िए खाने के लिए सूखा भूसा भी नहीं मिल पा रहा है।

चारागाह की जमीन पर बोया गया हरा चारा
जिले में पहले स्थिति विपरीत थी, जब गौशालाओं की क्षमता अधिक थी और गोवंश कम संख्या में आ रहे थे, लेकिन अब बड़ी संख्या में गौवंश गौशालाओं तक पहुंच चुके हैं। भूसे और चारे की कमी को पूरा करने के लिए कई जगह गौवंश को गौशाला के आस-पास, नहर पटरी व खाली खेतों व उसके आसपास चराया जा रहा है। कुछ जगह चारागाह की जमीन पर हरा चारा भी बोया गया है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है।

कम दरों पर बेचने को तैयार नहीं किसान
सभी ब्लॉक में गौशाला में भूसा सप्लाई के लिए टेंडर निकाला गया है, लेकिन कोई इतनी कम दरों पर सप्लाई को तैयार नहीं है। दूसरी ओर आसपास के राज्यों के साथ जिले में भी ईंट-भट्टों में इस बार कोयले की कमी के चलते भूसे का प्रयोग खूब हो रहा है और इसकी कीमत भी सही मिल रहीं है। लिहाजा लोग भूसा या तो खुद पशुपालन में प्रयोग कर रहे हैं या फिर भट्टों को बेंच रहे हैं।

भूसा दान करने पर होंगे सम्मानित
वहीं दूसरी ओर भूसे की कमी से जूझती गौशालाओं के लिए जिले के अधिकारी, कर्मचारियों, प्रधान, रोजगार सेवक, लेखपाल आदि से भूसा दान करने की अपील भी की जा रही है। जिला उद्योग केंद्र की ओर से सभी उद्यमियों, उद्यमी संगठन और व्यापारियों से अपील करते हुए कहा गया कि जिले में संचालित गौशालाओं में भूसा की कमी हो जाने के कारण भूसा दान करने का कष्ट करें। दान करने वाले उद्यमियों और व्यापारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा और सम्मानित भी किया जाएगा।

भूसा स्टॉक का हिसाब सब कुछ हवा में

  • जिले में कुल गौशालाएं- 114
  • गौशालाओं में गौवंश- 12,488
  • प्रतिदिन भूसे की जरूरत- 624.40 क्विंटल
  • भूसे का स्टॉक बचा- 1,178 क्विंटल
  • अब तक हुआ टेंडर- 4 बार