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इटावा-बरेली के 29 किमी के सफर में 454 गड्ढे:15 मिनट के सफर में लगता है 1 घंटा; 3 साल में 48 लोगों की गई जान, 129 से ज्यादा लोग हुए घायल

इटावाएक महीने पहलेलेखक: उवैश चौधरी
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रात के समय इस स्टेट हाइवे पर सफर और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। - Dainik Bhaskar
रात के समय इस स्टेट हाइवे पर सफर और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है।

इटावा जिला मुख्यालय को आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे से जोड़ने वाले 29 किलोमीटर के बरेली हाइवे में छोटे-बड़े कुल 454 गड्ढे है। गड्‌ढों के चलते वाहन सवार रोज हादसों के शिकार हो रहे हैं। यहां से रोज करीब पांच हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। ऐसे में रात के समय इस स्टेट हाइवे पर सफर और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। इटावा से चौबिया तक तकरीबन 416 छोटे- बड़े गड्ढे हैं। जबकि चौबिया से चौपला तक 38 बड़े गड्ढे हैं।

आमतौर पर 29 किलोमीटर की दूरी किसी भी दो पहिया या चार पहिया वाहन से तय करने में 15 मिनट का समय लगता है लेकिन इस 29 किलोमीटर की खस्ताहाल सड़क पर इस दूरी को तय करने में लगभग 1 घंटे का समय लोगों का बर्बाद होता है। समय के साथ ही ईंधन की बर्बादी भी होती है। बीते तीन साल में इस सड़क पर हुए हादसों में 48 लोगों की मौत हुई है। जबकि 129 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

तीन सालों में बरेली हाईवे को जाम करने की लगभग 14 बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। इनके पीछे मुख्य वजह सड़क पर हुआ हादसा ही था जिसमें अपनों की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने हाइवे को जाम कर दिया था। दैनिक भास्कर के संवाददाता उवैश चौधरी की रिपोर्ट में देखिए सड़कों का हाल...

तीन सालों में बरेली हाईवे को जाम करने की लगभग 14 बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं।
तीन सालों में बरेली हाईवे को जाम करने की लगभग 14 बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं।

इसी रास्ते से जाते हैं आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे

इटावा के इस 29 किलोमीटर के इस सफर से न सिर्फ लोग आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे का सुहावना सफर तय करते हैं, बल्कि फर्रुखाबाद-बरेली के लिए भी इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसके अलावा बसरेहर, चौबिया, मूँज, बारालोकपुर, समेत संतोषपुरा घाट, उदयपुरा रोडवेज वर्कशॉप समेत माउंट लिट्रा जी स्कूल, ईस्टर्न फ्रेड रेल कॉरिडोर, नेशनल हाईवे, जुगरामऊ, नवीन मंडी स्थल जैसे इलाकों के अलावा विनीत विहार कॉलोनी समेत दो दर्जन से अधिक नई व वीआईपी कॉलोनी भी इसी मुख्य सड़क पर हैं। साथ ही आगरा- लखनऊ एक्सप्रेस वे के जरिए लखनऊ व दिल्ली से आने वाले अधिकारी, राजनेता व अन्य वीवीआईपी भी एक्सप्रेस वे से चौपला कट पर ही उतरना पसंद करते हैं। इसके बावजूद स्टेट हाईवे की ऐसी दशा किसी को नजर नहीं आती।

स्टेट हाइवे की दशा और दिशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से निर्माण कार्य को अनुमति दी है।
स्टेट हाइवे की दशा और दिशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से निर्माण कार्य को अनुमति दी है।

विश्व बैंक के सहयोग से प्रस्तावित है निर्माण कार्य

स्टेट हाइवे की दशा और दिशा सुधारने के लिए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक के सहयोग से निर्माण कार्य को अनुमति दी है। टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हो चुका है। बाईपास के अलावा सड़क की चौड़ाई बढ़ाने, पुल, पुलिया आदि के निर्माण के साथ ही तीन खंडों में इसे विस्तारित किया जाना है। उससे पहले पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय राजमार्ग खंड द्वारा इसका रखरखाव किया जाता है लेकिन इसके बावजूद उसकी स्थिति लंबे समय से खराब है। हाल ही में राज्यपाल के कार्यक्रम को लेकर दतावली तक जो पैचवर्क किया गया था, वह भी उखड़ चुका है।

दतावली तक जो पैचवर्क किया गया था, वह भी उखड़ चुका है।
दतावली तक जो पैचवर्क किया गया था, वह भी उखड़ चुका है।

कहां पर कितने गड्‌ढे?

  • भरथना चौराहा से उदयपुरा - 41
  • उदयपुरा से बसरेहर - 46
  • बसरेहर से बहादुरपुर - 34
  • बहादुरपुर पड़ाव से चौबिया- 48
  • चौबिया से चौपला - 87
  • चौपला से एक्सप्रेस वे कट- 62
  • एक्सप्रेस वे से बरालोकपुर- 82
  • बरालोकपुर से कर्री पुलिया- 54
  • गड्‌ढों की वजह से अक्सर हादसे होते हैं।
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